Kanpur किडनी स्कैम: एमबीए छात्र ने पढ़ाई की फीस के लिए बेची अपनी किडनी
Kanpur से बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बिहार के बेगूसराय जिले के रहने वाले एमबीए छात्र आयुष कुमार ने अपनी पढ़ाई की फीस जमा न कर पाने के कारण अपनी किडनी बेच दी। घटना का खुलासा तब हुआ जब आयुष हैलट अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हुआ और पुलिस ने उसकी शिकायतों पर कार्रवाई शुरू की।
आयुष ने पुलिस से बार-बार कहा, “सर, मेरी मां को मत बताइए, मुझे बहुत बड़ी गलती हो गई।” इस मामले ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
छात्र की भावनात्मक स्थिति: गर्लफ्रेंड से मिलते ही रो पड़े
पुलिस की सुरक्षा में आयुष की गर्लफ्रेंड, जो बिहार के बेगूसराय जिले की रहने वाली है, कानपुर आई। पुलिस की कड़ी सुरक्षा में दोनों की मुलाकात कराई गई। आयुष ने गर्लफ्रेंड को देखकर फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया। उसने बार-बार कहा, “मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।” गर्लफ्रेंड ने उसे दिलासा देते हुए कहा कि सब ठीक हो जाएगा।
दोनों छात्र देहरादून की ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं। आयुष चौथे सेमेस्टर में है जबकि उसकी गर्लफ्रेंड दूसरे सेमेस्टर में पढ़ रही है।
किडनी बेचने का कारण: पढ़ाई की फीस और आर्थिक तंगी
आयुष ने पुलिस को बताया कि उसकी परिवारिक आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब थी। पिता का देहांत हो चुका है और घर की जमीन गिरवी रखी हुई थी। इसके चलते बैंक से लोन भी नहीं मिल रहा था।
आयुष दो महीने से अपने कॉलेज की फीस जमा नहीं कर पा रहा था। साइबर ठगों के चंगुल में फंसने के बाद भी वह कुछ हासिल नहीं कर पाया। इसी बीच उसने एजेंट शिवम अग्रवाल से मुलाकात की और किडनी बेचने का झांसा देकर 6 लाख रुपये का सौदा किया गया।
- आधा पैसा नकद दिया गया
- बाकी ऑपरेशन के बाद देने का वादा किया गया
हालांकि ऑपरेशन के बाद सिर्फ 3.5 लाख रुपये ही आयुष के खाते में जमा किए गए। बाकी पैसे अभी तक नहीं मिले।
ऑपरेशन का पूरा मामला: दो गाड़ियों में आठ डॉक्टरों की टीम
आयुष ने पुलिस को पूरे गैंग का ब्यौरा दिया।
- सबसे पहले उसे अली नाम के व्यक्ति ने डॉ. अनुराग उर्फ अमित से मिलवाया।
- फिर उसे डॉ. वैभव और डॉ. अफजल से मिलवाया गया।
- डॉ. अफजल ने मेडिकल रिपोर्ट मंगवाई, जो नोएडा के डॉ. रोहित को भेजी गई।
- उनकी सलाह पर कानपुर के आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन के दौरान दो गाड़ियों में आठ डॉक्टरों की टीम शामिल थी। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि एक गाड़ी लखनऊ और दूसरी गाजियाबाद की ओर गई।
पुलिस कार्रवाई और लुकआउट नोटिस
कानपुर पुलिस ने अब तक इस किडनी गैंग के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
चार फरार डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है:
- डॉ. अफजल (मेरठ, अल्फा अस्पताल संचालक)
- डॉ. वैभव
- डॉ. अनुराग उर्फ अमित
- डॉ. रोहित उर्फ राहुल
पुलिस की टीम मेरठ पहुंच चुकी है और अल्फा अस्पताल का लेखा-जोखा लिया जा रहा है। इसके अलावा, आहूजा, प्रिया और मेड लाइफ अस्पतालों के डीवीआर भी कब्जे में लिए गए हैं।
गर्लफ्रेंड की प्रतिक्रिया और परिवार की चिंता
आयुष की गर्लफ्रेंड ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि उसने आखिर अपनी किडनी क्यों बेची। आयुष ने कहा कि फीस जमा न होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा।
गर्लफ्रेंड ने डॉक्टरों से आयुष की सेहत की जानकारी ली और कहा कि उसकी मां बेहद परेशान हैं। आयुष का छोटा भाई ऋषभ प्राइवेट जॉब कर रहा है और घर का खर्च संभाल रहा है।
रिसीवर की स्थिति
किडनी रिसीवर पारुल तोमर (मेरठ निवासी) को भी हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका भाई दिव्यांक आईसीयू के बाहर लगातार बैठा रहा, लेकिन मिलने की अनुमति नहीं मिली।
छात्र की गुहार: पैसे दिलाने की मांग
आयुष अब पुलिस से बार-बार यह मांग कर रहा है कि बचे हुए पैसे जल्दी दिलाए जाएं। वह डर रहा है कि पढ़ाई अधूरी न रह जाए। पुलिस का कहना है कि आयुष की स्थिति अब बातचीत के योग्य है और उसकी निगरानी मेडिकल टीम कर रही है।
कई शहरों में पुलिस की सक्रियता
कानपुर पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। विशेष टीमें लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में सक्रिय हैं।
साथ ही, साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका के किडनी ट्रांसप्लांट मामले की भी अलग से जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी किसी भी समय हो सकती है।
निष्कर्ष
यह मामला छात्रों की आर्थिक तंगी और साइबर ठगी के कारण उठाए गए गंभीर कदम का उदाहरण है। कानपुर किडनी स्कैम ने स्वास्थ्य और कानूनी सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की सक्रियता और लुकआउट नोटिस से उम्मीद है कि पूरी गैंग जल्द पकड़ी जाएगी और इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
