इंदौर में आरएसएस की 100 साल की यात्रा पर बनी ‘शतक’ फिल्म देखने पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय। थिएटर में सीट न मिलने पर जमीन पर बैठकर फिल्म देखने की सादगी बनी चर्चा का विषय।
कैलाश विजयवर्गीय शतक फिल्म: इंदौर में सादगी की मिसाल
इंदौर में हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आरएसएस की 100 साल की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ देखने के लिए एक सिनेमा हॉल पहुंचे थे। लेकिन थिएटर में इतनी भीड़ थी कि उन्हें बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली।
ऐसी स्थिति में उन्होंने किसी विशेष व्यवस्था की मांग नहीं की बल्कि सादगी दिखाते हुए जमीन पर बैठकर ही फिल्म देखना स्वीकार किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी आश्चर्य और प्रेरणा का विषय बन गया।
इंदौर में ‘शतक’ फिल्म देखने पहुंचे कैलाश विजयवर्गीय
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के एक सिनेमा हॉल में आरएसएस के 100 वर्षों के इतिहास पर आधारित फिल्म ‘शतक’ देखने पहुंचे थे। इस फिल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना काल से लेकर आज तक के सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान को दर्शाया गया है।फिल्म को देखने के लिए बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और आम लोग भी पहुंचे थे।थिएटर में अचानक इतनी भीड़ हो गई कि सीटें पूरी तरह भर गईं। कई लोगों को खड़े रहकर फिल्म देखने की स्थिति बन गई।
सीट नहीं मिली तो जमीन पर बैठकर देखी फिल्म
जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय थिएटर पहुंचे, तब तक सभी सीटें भर चुकी थीं। सामान्य परिस्थितियों में किसी मंत्री के लिए तुरंत विशेष व्यवस्था की जाती है, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।उन्होंने कहा कि जब बाकी लोग जमीन पर बैठकर फिल्म देख रहे हैं तो वे भी उसी तरह देखेंगे। इसके बाद वे जमीन पर बैठकर फिल्म देखने लगे।यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों ने उनकी तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिए, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
आरएसएस की 100 साल की यात्रा पर आधारित है ‘शतक’ फिल्म
फिल्म ‘शतक’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर उसके सामाजिक योगदान और विचारधारा की यात्रा को दर्शाती है।इस फिल्म में बताया गया है कि किस तरह संघ ने समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई है।फिल्म में ऐतिहासिक घटनाओं, स्वयंसेवकों के अनुभवों और संगठन के विकास की कहानी को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत किया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
जैसे ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के जमीन पर बैठकर फिल्म देखने की तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बन गईं।कई लोगों ने उनकी सादगी की तारीफ की, जबकि कुछ लोगों ने इसे एक अलग प्रकार का संदेश बताया।ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों लोगों ने इन तस्वीरों को शेयर किया और कहा कि यह घटना नेताओं और जनता के बीच जुड़ाव को दिखाती है।
सादगी और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव की मिसाल
राजनीति में अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। लेकिन कैलाश विजयवर्गीय का यह व्यवहार लोगों को यह संदेश देता है कि नेता और कार्यकर्ता के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए।उन्होंने जिस तरह सामान्य दर्शकों के बीच बैठकर फिल्म देखी, उससे कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखने को मिला।
यह घटना बताती है कि कभी-कभी छोटे-छोटे व्यवहार भी लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ देते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना के बाद कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी।कुछ लोगों ने कहा कि यह एक सादगीपूर्ण और सकारात्मक संदेश है, जबकि कुछ ने इसे सामान्य घटना बताते हुए ज्यादा महत्व नहीं दिया।फिर भी यह घटना मीडिया और सोशल मीडिया दोनों में चर्चा का विषय बनी रही।
निष्कर्ष
इंदौर में फिल्म ‘शतक’ देखने के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा जमीन पर बैठकर फिल्म देखना एक साधारण घटना होते हुए भी खास बन गई।इस घटना ने यह दिखाया कि सादगी और सहजता किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान हो सकती है।
राजनीति में अक्सर नेताओं और जनता के बीच दूरी की बात कही जाती है, लेकिन ऐसे उदाहरण उस दूरी को कम करने का काम करते हैं।
इंदौर में हुई यह घटना आने वाले समय में भी लोगों को याद रहेगी, क्योंकि यह केवल एक फिल्म देखने का प्रसंग नहीं बल्कि सादगी और समानता का संदेश देने वाला पल था।
