42 वर्ष 9 माह की सेवा के बाद कैलाश कुमार खरे सेवानिवृत्त, सांदीपनि विद्यालय परिवार ने दी आत्मीय विदाई
पलेरा (टीकमगढ़)। नगर के सांदीपनि शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ प्राथमिक खण्ड लीडर एवं प्रधानाध्यापक कैलाश कुमार खरे की अधिवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर विद्यालय परिवार ने विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और परिजनों ने उनके 42 वर्ष 9 माह के सेवाकाल को याद किया। उपस्थित लोगों ने उनकी कर्तव्यपरायणता, सरल स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। समारोह के अंत में विद्यालय परिवार के सदस्य गाजे-बाजे के साथ उन्हें घर तक छोड़ने गए।
मां शारदे के पूजन से हुआ शुभारंभ
विदाई समारोह की शुरुआत अतिथियों ने मां शारदे के पूजन एवं वंदन से की। विद्यालय की छात्राओं आस्था, आध्या और गुंजन ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक कैलाश कुमार खरे को मंच पर स्थान देकर तिलक लगाया गया और पुष्पहार से उनका स्वागत किया गया।
विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर उनके लंबे सेवाकाल के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में मौजूद साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान तथा विद्यालय से जुड़े अनुभवों को स्मरण किया। समारोह में विभिन्न संस्थाओं के प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षक भी उपस्थित रहे।
लंबे सेवाकाल और कर्तव्यपरायणता की सराहना
उपस्थित वक्ताओं ने कैलाश कुमार खरे के 42 वर्ष 9 माह के सेवाकाल को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि खरे ने अपने दायित्वों का निर्वहन कर्तव्यपरायणता के साथ किया। उनके सरल, सहज और मृदुभाषी व्यवहार को याद करते हुए वक्ताओं ने शिक्षक के रूप में उनके व्यक्तित्व की प्रशंसा की।
जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपने उद्बोधनों में उनके प्रति आदर व्यक्त किया। समारोह में उनके शिक्षण कार्य के साथ विद्यार्थियों को दिए गए अनुशासन और संस्कारों का भी उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने कहा कि उनके सेवाकाल की स्मृतियां विद्यालय परिवार के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनका मार्गदर्शन आगे भी उपयोगी रहेगा।
लगभग दो पीढ़ियों को दिया मार्गदर्शन
बीईओ राजेश गुप्ता और आरके जैन ने कहा कि कैलाश कुमार खरे हिंदी साहित्य के विद्वान शिक्षक रहे हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल में विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अनुशासन, संस्कार और प्रोत्साहन के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन भी प्रदान किया।
उन्होंने खरे के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि लगभग दो पीढ़ियों को उनके शिक्षण और मार्गदर्शन का लाभ मिला है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों के प्रति उनकी भूमिका की सराहना की। हिंदी साहित्य के प्रति उनकी विद्वता और शिक्षक के रूप में उनके योगदान को समारोह में विशेष रूप से याद किया गया।
आराध्या मिश्रा ने कविता से व्यक्त किया सम्मान
विद्यालय की छात्रा कुमारी आराध्या मिश्रा ने अपने प्रधान शिक्षक के सम्मान में कविता प्रस्तुत की। अपनी प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने कैलाश कुमार खरे के प्रति आदर और भावनाएं व्यक्त कीं। कविता में खरे को विद्वता की प्रखर पहचान बताते हुए प्राथमिक खण्ड की शान कहा गया।
विद्यार्थी की इस प्रस्तुति ने समारोह में शिक्षक और छात्र के संबंधों को अभिव्यक्त किया। आराध्या ने कविता के माध्यम से अपने प्रधान शिक्षक के योगदान को याद किया। कार्यक्रम की शुरुआत में आस्था, आध्या और गुंजन की सरस्वती वंदना तथा बाद में आराध्या की कविता ने विद्यार्थियों की ओर से सम्मान व्यक्त करने का अवसर दिया।
कवियों ने गीतों से याद किए साथ बिताए पल
कवि सुमन ने कैलाश कुमार खरे के साथ बिताए लम्हों को याद करते हुए ‘आंखन असुआ आ गए’ गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में पुराने अनुभवों और विदाई की भावनाओं को स्थान मिला। गीत के माध्यम से उन्होंने खरे के साथ जुड़ी स्मृतियों को साझा किया।
कवि जयहिंद सिंह ने संस्था की ओर से भेंट किए गए विदाई पत्र के गीत का गायन किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में खरे के सेवाकाल की उपलब्धियों का उल्लेख किया। दोनों कवियों की प्रस्तुतियों ने समारोह में साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से सेवानिवृत्त शिक्षक के प्रति सम्मान प्रकट किया।
स्वस्थ जीवन और निरंतर मार्गदर्शन की कामना
समारोह में उपस्थित सभी वक्ताओं ने कैलाश कुमार खरे के उत्तम स्वास्थ्य और प्रसन्न जीवन की कामना की। उन्होंने आग्रह किया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे विद्यालय परिवार को अपना मार्गदर्शन देते रहें। वक्ताओं ने उनके अनुभवों और शिक्षण से जुड़े ज्ञान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के प्राचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक, खरे के परिजन और रिश्तेदार उपस्थित रहे। सभी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार के सदस्य गाजे-बाजे के साथ उनके घर तक गए और आत्मीयता के साथ विदाई दी।
