प्रयागराज में BSNL निदेशक के शाही दौरे का विवाद: Jyotiraditya Scindia ने जारी किया नोटिस
प्रयागराज: बीएसएनएल निदेशक विवेक बंजल के प्रयागराज दौरे की तैयारी में 50 अधिकारियों की तैनाती और निजी वस्तुओं की व्यवस्था के आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद ने नई दिशा पकड़ ली है। केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने इसे नियमों का उल्लंघन और अस्वीकार्य बताते हुए निदेशक को सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
यह मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में सरकारी प्रोटोकॉल और संस्थागत अनुशासन पर बहस छेड़ गया है।
विवाद की शुरुआत
बीएसएनएल के निदेशक विवेक बंजल 25-26 फरवरी को प्रयागराज में दो दिवसीय दौरे पर आने वाले थे। इसके लिए 19 फरवरी 2026 को कार्यालय आदेश जारी किया गया।
आदेश में लगभग 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न कार्य सौंपे गए थे। इनमें शामिल थे:
- संगम स्नान का आयोजन
- नौका विहार
- बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर के दर्शन
- प्रत्येक स्थल पर अधिकारी की भूमिका का लिखित विवरण
स्नान किट और निजी वस्तुओं का आदेश विवादित
सबसे अधिक विवाद उस आदेश से उत्पन्न हुआ जिसमें संगम स्नान के लिए स्नान किट की सूची दी गई थी। आदेश के अनुसार:
- पुरुषों के लिए 6 किट, महिलाओं के लिए 2 किट
- तौलिया, अंडरवियर, चप्पल, कंघी, दर्पण और तेल की बोतल
- होटल और सर्किट हाउस में सूखे मेवे, फल, शेविंग किट, टूथपेस्ट, ब्रश, साबुन, शैम्पू और तेल की व्यवस्था
कुल मिलाकर, 20 अलग-अलग कार्यों के लिए लगभग 50 अधिकारियों को तैनात किया गया था।
इस आदेश के वायरल होने के बाद, जनता और सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
Jyotiraditya Scindia का बयान
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस विवाद पर स्पष्ट किया कि:
- स्थापित नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- निदेशक को सात दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है।
- जवाब मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
- उन्होंने कहा कि यह 21वीं सदी है और इस तरह का व्यवहार चौंकाने वाला है।
- सरकार ने यह भी कहा कि संस्थागत अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन सर्वोपरि है।
सिंधिया ने इसे अनुचित और अस्वीकार्य बताया और संकेत दिया कि बीएसएनएल प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता है।
दौरा रद्द होने का निर्णय
जैसे ही कार्यालय आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तत्काल विवेक बंजल का प्रयागराज दौरा रद्द कर दिया गया।
प्रयागराज के एक वरिष्ठ बीएसएनएल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“यह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश हो सकती है।”
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आदेश पर टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन दौरा रद्द हो चुका है।
प्रशासनिक मर्यादा और प्रोटोकॉल पर बहस
यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठे हों। पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं, जैसे:
- दिल्ली में स्टेडियम खाली कराकर कुत्ता घुमाने का विवाद
- उस समय अधिकारी संजीव खैरवार को दिल्ली से बाहर तैनात किया गया था
अब बीएसएनएल प्रकरण ने फिर से प्रशासनिक मर्यादा और प्रोटोकॉल पालन पर बहस छेड़ दी है।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
- सोशल मीडिया पर आदेश की वायरल होने के बाद जनता ने इसे शाही और अनुचित रवैया बताया।
- कई लोग इसे कर्यालयीन नियमों और सार्वजनिक धन के अनुचित उपयोग के रूप में देख रहे हैं।
- वायरल आदेश ने बीएसएनएल की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीएसएनएल प्रबंधन और भविष्य की कार्रवाई
सरकार ने संकेत दिया है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। निदेशक को कारण बताने के बाद:
- नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है
- संस्थागत नियमों और प्रोटोकॉल का पालन सख्ती से लागू किया जाएगा
- भविष्य में किसी भी सरकारी दौरे की तैयारी में स्वच्छ और पारदर्शी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी
निष्कर्ष
प्रयागराज में बीएसएनएल निदेशक के दौरे का विवाद केवल एक कार्यालयीन आदेश का मामला नहीं है। यह सरकारी संस्थाओं में अनुशासन, प्रोटोकॉल और जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia का कदम स्पष्ट संदेश देता है कि:
- सरकारी अधिकारियों को स्थापित नियमों का पालन करना अनिवार्य है
- सार्वजनिक धन और संसाधनों का सही और पारदर्शी उपयोग होना चाहिए
- किसी भी प्रकार का शाही व्यवहार या अनुचित आदेश सार्वजनिक दृष्टि में स्वीकार्य नहीं है
यह मामला भविष्य में बीएसएनएल और अन्य सरकारी संस्थाओं के दौरे, कार्यक्रम और प्रोटोकॉल पर सख्त नीतियों और अनुशासनात्मक मानकों को लागू करने का उदाहरण बनेगा।
