MP News: किसानों की स्थिति पर कांग्रेस ने साधा निशाना, जीतू पटवारी ने उठाए गंभीर सवाल
भोपाल। MP में किसानों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार की कृषि नीतियों और उनके असफल कार्यान्वयन पर तीखा हमला बोला। पटवारी ने कहा कि सरकार बार-बार यह दावा करती है कि राज्य में कृषि लाभ का धंधा बन रही है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत किसान वर्तमान में कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, और पिछले दो दशकों में कृषि क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नहीं हुए।
पटवारी ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि विपक्ष का काम केवल कमियों को उजागर करना नहीं है, बल्कि किसानों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए गंभीर चर्चा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किए गए वादे और घोषणाएं किसान हित में पर्याप्त नहीं साबित हुई हैं।
सोयाबीन और धान खरीद का वादा अधूरा
कांग्रेस नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लंबे कार्यकाल में किए गए वादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोयाबीन को 6,000 रुपए प्रति क्विंटल और धान को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हुआ। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को लाभ देने के बजाय केवल योजनाओं के नाम पर प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस रवैये से छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खुद को पहलवान बताते हैं, लेकिन कई बार उनके अधिकारी उन्हें ही चित कर देते हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस केवल पिछले 20 सालों का हिसाब नहीं मांग रही है, बल्कि सिर्फ पिछले एक साल के कार्यों का मूल्यांकन करना चाहती है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सरकार किसानों के हित में वास्तविक कदम उठा रही है या नहीं।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उठाए सवाल
पटवारी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश में किसानों की वास्तविक स्थिति और केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार से प्रदेश को कुल 24,000 करोड़ रुपए मिलने थे, लेकिन अब तक केवल 9,000 करोड़ रुपए ही आए हैं, जो कुल राशि का लगभग 21 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह राशि यदि समय पर और पूरी तरह से किसानों तक पहुंचती, तो प्रदेश में कृषि क्षेत्र की स्थिति बेहतर होती और किसान कर्ज में नहीं डूबते।
पटवारी ने केंद्र सरकार की इस लापरवाही को किसानों के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा। उनका कहना था कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की कमी और बजट के सही उपयोग में विफलता किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।
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कृषि विभाग में कर्मचारियों की कमी और बजट का अपव्यय
कांग्रेस अध्यक्ष ने कृषि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी और सरकारी तंत्र की अक्षमता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कृषि कल्याण वर्ष मनाए जाने के बावजूद बजट की लगभग 40 प्रतिशत राशि खर्च नहीं की गई। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है, जो सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गए हैं।
पटवारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रदेश के कई जिलों में कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हुई है और कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। उनका कहना था कि यह स्थिति छोटे और सीमांत किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे समय पर फसल की लागत, बीज, खाद और सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकारी मदद पर निर्भर रहते हैं।
कांग्रेस का जनमत संवाद अभियान
पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि कांग्रेस जल्द ही प्रदेशभर में जनमत संवाद अभियान शुरू करेगी। इस अभियान के तहत सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ किसानों को एकजुट किया जाएगा। कांग्रेस का उद्देश्य इस अभियान के माध्यम से किसानों और आम जनता की समस्याओं को सामने लाना और सरकार की उपेक्षा को उजागर करना है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल आलोचना का मंच नहीं होगा, बल्कि इसमें किसानों की वास्तविक समस्याओं को सुना जाएगा और उनके समाधान के लिए ठोस सुझाव भी दिए जाएंगे। इसके जरिए किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और उनकी मांगों पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाएगा।
किसानों की वास्तविक स्थिति
मध्य प्रदेश के लगभग 90 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति सबसे खराब है। उन्हें खेती के लिए आवश्यक साधन खरीदने, बीज और उर्वरक लेने के लिए उच्च ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। पटवारी ने कहा कि यह कर्ज किसानों को आर्थिक जाल में फंसा रहा है और कई किसान आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में विकास और लाभ के दावे के बावजूद, छोटे किसानों को फसल का सही मूल्य नहीं मिलता। किसानों को अपने उत्पाद की सही कीमत पाने के लिए अक्सर मंडी और सरकारी खरीद केंद्रों तक लंबा सफर तय करना पड़ता है। वहीं, बड़े और शक्तिशाली किसान समूह सरकारी नीतियों और खरीद के दावों का फायदा उठाते हैं।
आर्थिक सहायता और योजना का अभाव
पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की आर्थिक सहायता योजनाएं और कृषि सब्सिडी सही तरीके से लागू नहीं हो रही हैं। किसान अक्सर सरकारी सहायता राशि पाने के लिए कई महीने इंतजार करते हैं। ऐसे में वे अपने परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनियमित और महंगे कर्ज लेने को मजबूर होते हैं।
कांग्रेस का मानना है कि कृषि क्षेत्र की स्थिरता और किसानों का आर्थिक कल्याण राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए। पटवारी ने कहा कि सरकार के वादों और घोषणाओं के बीच वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार किसानों की समस्या को केवल प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रही है, लेकिन उनका वास्तविक कल्याण नहीं कर रही।
निष्कर्ष
जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहेगी और उनकी समस्याओं को उठाती रहेगी। प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति, कर्ज का बोझ, सरकारी योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन और कर्मचारियों की कमी को लेकर उन्होंने गंभीर चिंता जताई।
पटवारी का कहना था कि विपक्ष का काम केवल कमियों को उजागर करना नहीं है, बल्कि किसानों और आम जनता के लिए ठोस समाधान और सटीक नीति का सुझाव देना भी है। कांग्रेस के जनमत संवाद अभियान का उद्देश्य किसानों और आम जनता की समस्याओं को सामने लाना, उन्हें सरकार तक पहुंचाना और उनकी मांगों पर कार्रवाई का दबाव बनाना है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट हो गया कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति चिंताजनक है और इसके सुधार के लिए राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। जीतू पटवारी का संदेश साफ था—किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और उनकी वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना होगा।
