जिनशासन ध्वज फहराकर शासन स्थापना दिवस बपैया में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। समाज के सभी प्रमुख सदस्य हुए शामिल।
जिनशासन ध्वज फहराकर शासन स्थापना दिवस
जिनशासन ध्वज फहराकर शासन स्थापना दिवस महिदपुर रोड समीपस्थ ग्राम बपैया में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वैशाख सुदी ग्यारस सोमवार को प्रातः 8:00 बजे जैन श्री संघ बपैया द्वारा यह धार्मिक आयोजन विमलनाथ स्वामी मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। यह आयोजन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसमें धर्म, परंपरा और आस्था का सुंदर समागम देखने को मिला।
आयोजन का विवरण
महिदपुर रोड के समीप स्थित ग्राम बपैया में आयोजित इस कार्यक्रम में 2582वां शासन स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने ध्वज पूजन किया और शासन गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात पूरे विधि-विधान से शासन ध्वज फहराया गया, जो जैन धर्म की परंपराओं और मूल्यों का प्रतीक है।ध्वज फहराने के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने धार्मिक भावनाओं के साथ इस पावन अवसर का आनंद लिया और समाज में एकता एवं धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
इस धार्मिक आयोजन में समाज के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- श्री संघ अध्यक्ष प्रकाश बरडिया
- सुगन चंद बरडिया
- रमेश चंद
- राजेंद्र कुमार बरडिया
तथा समाज के सभी महानुभावों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया और धर्म लाभ प्राप्त किया।
धार्मिक महत्व
जिनशासन ध्वज फहराकर शासन स्थापना दिवस मनाने का उद्देश्य जैन धर्म की शिक्षाओं और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना है। यह दिन जैन धर्म के शासन की स्थापना और उसकी निरंतरता का प्रतीक है।ध्वज फहराना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह धर्म, सत्य, अहिंसा और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प भी है। इस प्रकार के आयोजन समाज को एकजुट करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं।
मीडिया जानकारी
इस पूरे कार्यक्रम की जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी द्वारा दी गई। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में समाज के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और इसे सफल बनाया।
निष्कर्ष
जिनशासन ध्वज फहराकर शासन स्थापना दिवस का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज में एकता, श्रद्धा और संस्कारों को मजबूत करने का भी माध्यम बना। इस प्रकार के आयोजन समाज के सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
