जिन शासन की रक्षा पर महिदपुर रोड के राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने प्रेरणादायक प्रवचन दिए। उन्होंने जिन शासन के महत्व, महापुरुषों के बलिदान और धर्म प्रभावना का संदेश दिया।
जिन शासन की रक्षा: करोड़ों महापुरुषों के बलिदान से अमर बना जिन शासन
रिपोर्टर : सचिन भंडारी | महिदपुर रोड
महिदपुर रोड में हुआ प्रेरणादायक प्रवचन
जिन शासन की रक्षा के संदेश के साथ महिदपुर रोड स्थित राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के अवसर पर विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने रविवार को “अहो जिन शासन तेरे लिए” विषय पर प्रभावशाली प्रवचन दिया। लगभग ढाई घंटे तक चले इस आध्यात्मिक प्रवचन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ धर्म लाभ प्राप्त किया।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि प्रबल पुण्योदय के योग से ही मनुष्य को जिन शासन की रक्षा और उसके सान्निध्य का सौभाग्य प्राप्त होता है। निगोद से निकलने के बाद जीव को 48 बार मनुष्य जन्म मिलता है, लेकिन उनमें से केवल पांच बार ही जिन शासन प्राप्त होता है। इसलिए हमें इस दुर्लभ अवसर का सम्मान करते हुए जिन शासन के प्रति पूर्ण समर्पित रहना चाहिए।
डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब का संदेश
प्रवचन के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने कहा कि जिन शासन की रक्षा केवल एक धार्मिक दायित्व नहीं बल्कि आत्मकल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि यदि हम शासन की रक्षा करेंगे तो शासन हमारी रक्षा करेगा।उन्होंने कहा कि करोड़ों महापुरुषों ने जिन शासन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके त्याग और समर्पण के कारण आज भी जिन शासन सुरक्षित और प्रभावशाली बना हुआ है। इसलिए प्रत्येक जैन समाज के व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह धर्म प्रभावना, सेवा और सदाचार के माध्यम से जिन शासन की अभिवृद्धि में योगदान दे।
जिन शासन की रक्षा क्यों आवश्यक है?
साध्वी श्रीजी ने बताया कि जिन शासन की रक्षा का अर्थ केवल मंदिरों या धार्मिक स्थलों की सुरक्षा नहीं है, बल्कि भगवान महावीर के बताए सिद्धांतों को जीवन में अपनाना भी है।उन्होंने कहा कि जिन शासन हमें—
- सभी जीवों के प्रति दया रखना सिखाता है।
- करुणा और प्रेम का भाव विकसित करता है।
- अहिंसा का पालन करना सिखाता है।
- सत्य एवं संयम का मार्ग दिखाता है।
- समता और वात्सल्य का संदेश देता है।
इन्हीं मूल्यों के कारण जिन शासन आज भी पूरी दुनिया में मानवता के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
करोड़ों महापुरुषों के बलिदान का स्मरण
प्रवचन में साध्वी श्रीजी ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि जिन शासन की रक्षा के लिए अनगिनत महापुरुषों ने अपने प्राण न्योछावर किए।उनके त्याग और तपस्या के कारण आज भी जैन धर्म अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित है। समाज को चाहिए कि वह उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर धर्म प्रभावना, सेवा, अध्ययन और संस्कारों को आगे बढ़ाए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु को प्रतिदिन जिन शासन की उन्नति और धर्म प्रभावना का संकल्प लेना चाहिए।
धर्म प्रभावना एवं लाभार्थियों का सम्मान
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि रविवार के मंगलमय कार्यक्रम में अनेक परिवारों ने धार्मिक लाभ प्राप्त किए।
- संपूर्ण दिवस की धार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ आशीष कुमार-भेरूलाल चोरड़िया परिवार ने लिया।
- शासन ध्वज को अक्षत से बढ़ाने का लाभ सुरेशचंद एवं आशीष कुमार बोहरा परिवार, खरवा कलां ने प्राप्त किया।
- कुमकुम से छाप लगाने का लाभ रमेशचंद्र, अमित कुमार एवं अंकेश कुमार कोचर मावा वाला परिवार द्वारा लिया गया।
समाज की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यक्रम में महिदपुर रोड सहित खरवा, डेलची एवं आसपास के विभिन्न श्रीसंघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह, श्रद्धा और समर्पण के साथ प्रवचन का श्रवण किया तथा धर्म लाभ प्राप्त किया। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
निष्कर्ष
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के प्रवचन ने समाज को यह संदेश दिया कि जिन शासन की रक्षा केवल अतीत के महापुरुषों का कार्य नहीं बल्कि वर्तमान पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति जिन शासन के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारे और धर्म प्रभावना के कार्यों में सहभागी बने, तो समाज में अहिंसा, प्रेम, करुणा और सद्भाव की भावना और अधिक मजबूत होगी।


