7 साल तक फर्जी IAS बनकर घूमता रहा युवक, थाने पहुंचते ही खुल गई पोल
झारखंड में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 35 वर्षीय युवक को पिछले सात वर्षों से फर्जी अधिकारी बनकर घूमने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह शख्स खुद को कभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताता था तो कभी भारतीय डाक और दूरसंचार लेखा एवं वित्त सेवा (IPTAFS) का अफसर। आरोपी का नाम राजेश कुमार है, जो झारखंड के कुखी इलाके का रहने वाला है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि राजेश न तो कभी IAS बना और न ही किसी सरकारी सेवा में चयनित हुआ, लेकिन इसके बावजूद वह वर्षों तक एक वरिष्ठ अधिकारी की तरह जीवन जीता रहा।
पिता की इच्छा बनी ढोंग की वजह
पूछताछ में सामने आया कि राजेश कुमार ने चार बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी थी, लेकिन हर बार असफल रहा। इसके बावजूद वह अपने पिता को यह दिखाना चाहता था कि वह एक बड़ा अधिकारी बन चुका है। पिता की खुशी और सामाजिक प्रतिष्ठा के दबाव में उसने धीरे-धीरे एक झूठी पहचान गढ़ ली और खुद को सरकारी अफसर बताकर घूमने लगा। राजेश ने न केवल खुद को अधिकारी बताना शुरू किया, बल्कि उसने पूरी तैयारी के साथ यह ढोंग रचा। वह फर्जी पहचान पत्र, सरकारी नेमप्लेट लगी कार और प्रभावशाली भाषा के सहारे लोगों को विश्वास दिलाता रहा कि वह केंद्र सरकार का उच्च अधिकारी है।
ऐसे खुली फर्जी IAS अफसर की पोल
इस पूरे मामले का पर्दाफाश 2 जनवरी को हुआ, जब राजेश कुमार एक जमीन विवाद के सिलसिले में झारखंड के हुसैनाबाद थाने पहुंचा। वहां उसने थाना प्रभारी से मुलाकात की और खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर का IAS अधिकारी बताया। उसने यह भी दावा किया कि वह वर्तमान में भुवनेश्वर में मुख्य लेखा अधिकारी के पद पर कार्यरत है। बातचीत के दौरान राजेश ने बताया कि वह पहले देहरादून, हैदराबाद और भुवनेश्वर जैसे शहरों में तैनात रह चुका है। इतना ही नहीं, थाना परिसर से निकलने से पहले उसने खुद को IPTAFS (Indian Postal and Telecommunications Accounts and Finance Service) का अधिकारी भी बताया।
थाना प्रभारी को हुआ शक
हालांकि, राजेश की बातों और व्यवहार में कुछ ऐसी बातें थीं, जिनसे थाना प्रभारी को शक हुआ। इसके बाद SHO ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच कराने का फैसला लिया। पुलिस ने जब संबंधित विभागों और रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि राजेश कुमार नाम का कोई भी व्यक्ति न तो IAS है और न ही IPTAFS अधिकारी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।
फर्जी पहचान के साथ ऐशो-आराम की जिंदगी
पुलिस जांच में सामने आया कि राजेश कुमार पिछले सात सालों से खुद को IAS अधिकारी बताकर एक प्रभावशाली जीवन जी रहा था। वह JH01Z-4884 नंबर की कार से घूमता था, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा हुआ था और फर्जी सरकारी नेमप्लेट लगी थी। उसके पास एक फर्जी सरकारी आईडी कार्ड था, जिसे वह लोगों को दिखाकर अपनी पहचान साबित करता था। इसके अलावा, उसके पास चाणक्य IAS एकेडमी का भी एक फर्जी आईडी कार्ड मिला है, जिससे वह खुद को UPSC से जुड़ा और भरोसेमंद साबित करता था।
समाज और सिस्टम को गुमराह करता रहा फर्जी IAS
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फर्जी IAS राजेश का व्यवहार इतना आत्मविश्वास भरा था कि आम लोग ही नहीं, बल्कि कई बार स्थानीय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी भी उसे असली IAS अफसर मान लेते थे। वह सरकारी भाषा, नियमों और प्रक्रियाओं की सामान्य जानकारी रखता था, जिससे उसकी बातों पर जल्दी भरोसा हो जाता था। हालांकि अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उसने इस फर्जी पहचान के जरिए किसी प्रकार का आर्थिक लाभ, सरकारी सुविधाएं या किसी को धमकाने जैसी गतिविधियां की हैं।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने राजेश कुमार के खिलाफ फर्जी दस्तावेज रखने, सरकारी अधिकारी का रूप धारण करने, धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। उसके पास से बरामद फर्जी आईडी कार्ड, नेमप्लेट और अन्य दस्तावेजों को जब्त कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किन-किन लोगों को धोखा देता रहा और क्या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी काम कर रहा था।
मनोवैज्ञानिक दबाव और सामाजिक दिखावा
यह मामला सिर्फ कानून व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि समाज में बढ़ते प्रतिष्ठा दबाव और असफलता को स्वीकार न कर पाने की मानसिकता को भी उजागर करता है। चार बार UPSC में असफल होने के बाद भी राजेश ने सच्चाई स्वीकारने के बजाय झूठी जिंदगी को चुन लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में व्यक्ति धीरे-धीरे अपने ही बनाए झूठ को सच मानने लगता है, जिससे वह लंबे समय तक लोगों को गुमराह कर पाता है।
