सुल्तान सिंह शेखावत का झकनावदा मेला स्वागत बना चर्चा का विषय। माँ माही माता मवेशी मेले में राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक एकता का संदेश।
सुल्तान सिंह शेखावत का झकनावदा मेला स्वागत: परंपरा, सम्मान और समरसता का जीवंत उदाहरण
सुल्तान सिंह शेखावत का झकनावदा मेला स्वागत न सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि यह ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। झकनावदा में आयोजित माँ माही माता जी मवेशी मेला वर्षों से क्षेत्र की पहचान रहा है और इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से ऐतिहासिक बन गया।
माँ माही माता मवेशी मेला: आस्था और आजीविका का संगम
झकनावदा का यह मेला केवल पशु व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का केंद्र है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक और व्यापारी इस मेले में भाग लेते हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री का भव्य स्वागत
29 दिसंबर को मेले में विशेष अतिथि के रूप में पहुँचे Sultan Singh Shekhawat का मेला आयोजक समिति द्वारा पारंपरिक साफ़ा बांधकर और पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया गया। यह स्वागत स्थानीय परंपराओं के अनुरूप गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सम्मान
इस अवसर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मेला आयोजक समिति ने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं का समान रूप से सम्मान किया।
यह संदेश स्पष्ट था—
मेला राजनीति नहीं, सामाजिक एकता का मंच है।
सम्मानित प्रमुख नामों में शामिल रहे:
- भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र राठौड़
- भाजपा नेत्री देवकुंवर पड़ियार
- पूर्व विधायक वालसिंह मेड़ा
- ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह राठौर
- मेला समिति अध्यक्ष मनोहरसिंह सेमलिया
पुलिस, पत्रकार और सहयोगियों का सम्मान
मेले की शांति व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों, ASF जवानों, पत्रकारों और मेला सहयोगियों का भी साफ़ा पहनाकर सम्मान किया गया।
यह पहल बताती है कि सुल्तान सिंह शेखावत का झकनावदा मेला स्वागत केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर सहयोगी के सम्मान का उत्सव था।
शेखावत का संदेश: परंपरा को मिलेगा सरकारी सहयोग
अपने संबोधन में शेखावत ने कहा कि—
“माँ माही माता मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसकी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार से हर संभव सहयोग दिलाने का प्रयास करूंगा।”
उन्होंने आयोजक समिति, पंचायत कर्मियों, दुकानदारों और पत्रकारों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
आयोजक समिति की सोच
मेला समिति अध्यक्ष मनोहरसिंह सेमलिया ने कहा—
“समाज, शासन और जनसेवा से जुड़े लोगों का सम्मान करना हमारी परंपरा है। यही मेला हमारी पहचान है।”
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
ग्रामीणों और व्यापारियों ने इस आयोजन को
अनुशासित
समरस
ऐतिहासिक
बताया।
कई लोगों का कहना था कि वर्षों बाद ऐसा आयोजन देखने को मिला, जहां राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान हुआ।
निष्कर्ष
सुल्तान सिंह शेखावत का झकनावदा मेला स्वागत आने वाले वर्षों के लिए एक उदाहरण बन गया है—
जहां परंपरा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द एक साथ नजर आया।
