भोपाल में जीतू पटवारी का जोरदार प्रदर्शन: पीसीसी कार्यालय से शिवराज के बंगले तक किसानों की आवाज़
भोपाल, 15 अक्टूबर 2025 — मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसानों के हक और उनकी फसलों के उचित मूल्य की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन PCC कार्यालय से शुरू होकर सीधे प्रदेश के कृषि मंत्री के सरकारी बंगले तक पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपने मुद्दों को लेकर नारेबाजी की और उचित समाधान की मांग की।
प्रदर्शन की शुरुआत और पुलिस का सामना
प्रदर्शन की शुरुआत PCC कार्यालय से हुई, जहां कांग्रेस के कई नेताओं और किसानों ने एकत्र होकर किसान हितों के लिए सड़क पर उतरने का निर्णय लिया। जैसे ही जत्था आगे बढ़ा, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने कई बार पुलिस अवरोधों को पार किया और जीतू पटवारी के नेतृत्व में आगे बढ़ते हुए प्रदर्शन को जारी रखा।
शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने हंगामा
प्रदर्शनकारी जब मंत्री के बंगले के सामने पहुंचे, तो उन्होंने सड़क पर गेहूं की बोरियां डालकर नारेबाजी शुरू की। किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार किसानों को लगातार सिर्फ वादे देकर ठगा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस सहायता नहीं मिल रही।
मंत्री से बातचीत और हल्की तनावपूर्ण स्थिति
स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जिसके बाद कृषि मंत्री खुद बाहर आए और नेताओं से बातचीत की। बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारी बंगले के अंदर जाने की जिद करते रहे, जिससे मौके पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की झड़प भी हुई।
किसानों की प्रमुख मांगें
जीतू पटवारी ने कहा कि किसानों को फसल का न्यायसंगत मूल्य तुरंत दिया जाए और उन्हें केवल भावांतर योजना या फॉर्मूला आधारित छूट से भ्रमित न किया जाए। उनका कहना था कि यह समय किसानों के लिए वास्तविक राहत का होना चाहिए, न कि सिर्फ दिखावटी योजनाओं का।
पुलिस की कार्रवाई और कांग्रेस का विरोध
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई बार प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिससे छोटे-मोटे टकराव भी हुए। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न तो नेताओं का हौसला टूटेगा और न ही किसानों के हित के लिए संघर्ष रुकेगा।
निष्कर्ष
भोपाल में जीतू पटवारी का यह प्रदर्शन किसानों के हक की आवाज़ बनकर उभरा। यह न केवल किसानों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नया मोड़ ला सकता है। अब जनता की नजर इस बात पर होगी कि सरकार किसानों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेती है और उनके लिए ठोस कदम उठाती है।
यह घटना मध्यप्रदेश की राजनीति में किसानों के मुद्दों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को मुख्य चर्चा का विषय बना सकती है।

