—Advertisement—

जंतर-मंतर पर छात्रों का जश्न: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने कहा- लोकतंत्र में डरना नहीं, बोलना है

Author Picture
Published On: 25 July 2026
Students celebrate at Jantar Mantar in New Delhi after the resignation of Education Minister Dharmendra Pradhan, raising slogans, waving flags, and demanding justice for NEET paper leak victims and compensation for affected families
— Students celebrate at Jantar Mantar in New Delhi after the resignation of Education Minister Dharmendra Pradhan, raising slogans, waving flags, and demanding justice for NEET paper leak victims and compensation for affected families

—Advertisement—

जंतर-मंतर पर छात्रों का जश्न: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने कहा- लोकतंत्र में डरना नहीं, बोलना है

छात्र आंदोलन को मिली बड़ी सफलता, जंतर-मंतर पर गूंजे ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारे

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई। इस्तीफे की सूचना मिलते ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हजारों छात्रों और आंदोलनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी, तिरंगे लहराए और “छात्र एकता जिंदाबाद”, “लोकतंत्र जिंदाबाद” तथा “हमारी एकता हमारी ताकत” जैसे नारों से पूरा जंतर-मंतर गूंज उठा।

हालांकि इस उत्सव के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने उन विद्यार्थियों को भी याद किया, जिन्होंने कथित तौर पर NEET पेपर लीक विवाद के कारण मानसिक तनाव का सामना किया और अपनी जान गंवाई। सभी छात्रों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत विद्यार्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।

छात्र आंदोलन ने बदला राजनीतिक माहौल

पिछले कई सप्ताह से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन, विभिन्न सामाजिक समूह और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे युवा लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों का आरोप था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मामलों में सरकार पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है।

इसी बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद आंदोलनकारियों ने इसे अपने संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से किए गए शांतिपूर्ण आंदोलन की ताकत का प्रमाण है।

प्रियंका गांधी ने दी छात्रों को बधाई

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि देश लोकतांत्रिक मूल्यों से चलता है, किसी भी प्रकार की तानाशाही से नहीं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का उदाहरण है।

प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और सरकारों को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए।

सोनम वांगचुक बोले— यह लोकतंत्र और शांति की जीत

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र और शांतिपूर्ण आंदोलन की जीत है। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाया।

वांगचुक ने कहा कि जब नागरिक संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखते हैं तो लोकतंत्र मजबूत होता है और सरकारों को जनता की भावनाओं का सम्मान करना पड़ता है।

‘जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा’

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनके आंदोलन की अंतिम मंजिल नहीं है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

छात्र नेताओं ने कहा कि पिछले 26 दिनों से भीषण गर्मी के बावजूद हजारों छात्र लगातार जंतर-मंतर पर डटे रहे। इस दौरान अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन किसी ने भी आंदोलन छोड़ने का फैसला नहीं किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार और प्रशासन की ओर से कई तरह के दबाव बनाए गए, लेकिन छात्रों का मनोबल नहीं टूटा।

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके का बड़ा बयान

CJP (काउंसिल ऑफ जस्टिस एंड पीस) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को छात्रों की सामूहिक जीत बताया।

उन्होंने कहा कि—

“झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। लोकतंत्र में डरना नहीं, बोलना चाहिए।”

दिपके ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता और युवाओं में होती है। यदि छात्र एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं तो सरकारों को उनकी मांगें सुननी ही पड़ती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक व्यक्ति को आंदोलन का नायक बनाना उचित नहीं है। यह सफलता हजारों छात्रों, अभिभावकों और समाज के उन लोगों की है जिन्होंने लगातार इस आंदोलन का समर्थन किया।

आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी आंदोलनकारी संगठनों ने कहा कि उनकी दो प्रमुख मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं।

पहली मांग यह है कि NEET पेपर लीक प्रकरण के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

दूसरी मांग यह है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।

आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

जंतर-मंतर पर पहले तनाव, फिर जश्न

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा से पहले जंतर-मंतर के आसपास का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा।

दोपहर के समय प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की, पथराव और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। कई स्थानों पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

इस दौरान कई प्रदर्शनकारी छात्रों तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें भी सामने आईं।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।

छात्र नेताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन उन्हें बलपूर्वक हटाने की कोशिश की गई।

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।

घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।

छात्र बोले— यह सिर्फ शुरुआत है

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल किसी मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है।

उनके अनुसार यह आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए चलाया जा रहा है।

छात्रों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकारों को युवाओं के सवालों का जवाब देना ही होगा।

लोकतंत्र में छात्र शक्ति का संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने लोकतांत्रिक आंदोलनों की भूमिका पर भी नई बहस शुरू कर दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब छात्र संगठित होकर संविधान के दायरे में अपनी मांग रखते हैं तो उसका प्रभाव शासन-प्रशासन पर भी दिखाई देता है।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि सभी पक्ष कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए संवाद के माध्यम से समाधान खोजें ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।

आगे क्या?

अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

यदि आंदोलनकारियों की शेष मांगों पर सहमति बनती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि लिखित आश्वासन नहीं मिलता है तो छात्रों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

फिलहाल जंतर-मंतर पर छात्रों का उत्साह यह संदेश देता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण जनआंदोलन आज भी अपनी प्रभावशीलता बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाले संवाद पर पूरे देश की नजर रहेगी।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp