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विवाह योग्य जीवनसाथी मिलना क्यों हो रहा है कठिन? अखिल भारतीय श्वेताम्बर जैन महिला संघ की विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताए समाधान

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Published On: 24 July 2026
Members of the Akhil Bharatiya Shwetambar Jain Mahila Sangh during a seminar on modern marriage challenges and finding suitable life partners at Dadawadi Rambag in Indore
— Members of the Akhil Bharatiya Shwetambar Jain Mahila Sangh during a seminar on modern marriage challenges and finding suitable life partners at Dadawadi Rambag in Indore

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विवाह योग्य जीवनसाथी मिलना क्यों हो रहा है कठिन? अखिल भारतीय श्वेताम्बर जैन महिला संघ की विचार गोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताए समाधान

दादावाड़ी रामबाग में आयोजित संगोष्ठी में शिक्षा, करियर, बढ़ती अपेक्षाओं और सामाजिक बदलावों पर हुई विस्तृत चर्चा, 77 महिला संघों की पदाधिकारी रहीं उपस्थित

इंदौर। बदलते सामाजिक परिवेश, आधुनिक जीवनशैली और युवाओं की प्राथमिकताओं के कारण आज विवाह योग्य जीवनसाथी का चयन पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उच्च शिक्षा, करियर, आर्थिक आत्मनिर्भरता और जीवनसाथी से जुड़ी बढ़ती अपेक्षाओं ने विवाह की प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा के उद्देश्य से अखिल भारतीय श्वेताम्बर जैन महिला संघ (केंद्रीय इकाई) द्वारा इंदौर स्थित दादावाड़ी रामबाग में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी में समाज के वरिष्ठ वक्ताओं, महिला संघ की पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्तमान समय में विवाह योग्य युवक-युवतियों के सामने आ रही चुनौतियों पर अपने विचार रखे तथा व्यावहारिक समाधान भी सुझाए। कार्यक्रम में इंदौर के 77 महिला संघों की पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही।

बदलते समय के साथ बदल रही हैं विवाह की प्राथमिकताएं

कार्यक्रम की शुरुआत में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का संबंध माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में आए बदलावों ने विवाह की पारंपरिक प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है।

आज अधिकांश युवक और युवतियां पहले अपनी शिक्षा पूरी करना, करियर स्थापित करना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। इसके बाद ही विवाह का निर्णय लेते हैं, जिससे विवाह की औसत आयु लगातार बढ़ रही है।

वक्ताओं ने कहा कि यह परिवर्तन कई दृष्टियों से सकारात्मक है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं।

उच्च शिक्षा और करियर के कारण बढ़ रही विवाह की आयु

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वीरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की प्राथमिकताएं पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना, बेहतर करियर बनाना और आर्थिक रूप से मजबूत होना आज अधिकांश युवाओं का लक्ष्य है। इसी कारण विवाह की आयु पहले की अपेक्षा अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और करियर महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यदि विवाह को लगातार टालते रहें तो बाद में उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश अपेक्षाकृत कठिन हो सकती है।

बढ़ती अपेक्षाएं बन रही हैं सबसे बड़ी चुनौती

वीरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि आज जीवनसाथी के चयन में केवल पारिवारिक संस्कार ही नहीं, बल्कि शिक्षा, आय, व्यवसाय, रूप-रंग, कद, शहर, परिवार की सामाजिक स्थिति, जीवनशैली और व्यक्तिगत पसंद जैसे अनेक मानदंड शामिल हो गए हैं।

इन बढ़ती अपेक्षाओं के कारण कई बार अच्छे रिश्ते भी केवल छोटी-छोटी बातों की वजह से आगे नहीं बढ़ पाते।

उन्होंने सुझाव दिया कि जीवनसाथी का चयन करते समय व्यवहार, संस्कार और आपसी समझ को प्राथमिकता देना अधिक आवश्यक है।

महिलाओं की आत्मनिर्भरता सकारात्मक बदलाव

श्रीमती रेखा जैन ने कहा कि आज महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना समाज के लिए अत्यंत सकारात्मक परिवर्तन है।

उन्होंने कहा कि शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाएं अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हो रही हैं, जिससे समाज में महिलाओं की भूमिका और अधिक मजबूत हुई है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता के साथ जीवनसाथी के चयन में समानता, सम्मान और अनुकूलता की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं, जिससे उपयुक्त साथी का चयन पहले की अपेक्षा अधिक समय लेने लगा है।

भौगोलिक दूरी भी बन रही बाधा

गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए स्नेह कटारिया ने कहा कि आज शिक्षा, नौकरी और व्यवसाय के कारण अधिकांश युवक-युवतियां अलग-अलग शहरों या विदेशों में रह रहे हैं।

ऐसी स्थिति में परिवारों के बीच संपर्क कम हो जाता है और व्यक्तिगत मुलाकातों के अवसर भी सीमित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दूरी के कारण कई अच्छे रिश्ते प्रारंभिक स्तर पर ही आगे नहीं बढ़ पाते।

आधुनिक और पारंपरिक सोच के बीच संतुलन जरूरी

विजया जैन ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती आधुनिक और पारंपरिक सोच के बीच संतुलन बनाना है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी स्वतंत्र विचारों और आधुनिक जीवनशैली को महत्व देती है, जबकि परिवार पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक परंपराओं को भी बनाए रखना चाहते हैं।

यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं और अपेक्षाओं को समझें, तो विवाह संबंधों में आने वाली कई कठिनाइयों को आसानी से दूर किया जा सकता है।

असफल विवाह का डर भी बढ़ा रहा है निर्णय का समय

सुशीला बेताला ने कहा कि वर्तमान समय में तलाक और असफल वैवाहिक जीवन के बढ़ते उदाहरणों के कारण युवक-युवतियां विवाह का निर्णय लेने में अधिक सतर्क हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि सावधानी अच्छी बात है, लेकिन अत्यधिक संशय और अनिश्चितता कई बार अच्छे अवसरों को भी समाप्त कर देती है।

उन्होंने युवाओं से संतुलित सोच के साथ निर्णय लेने की अपील की।

संवाद की कमी से टूट जाते हैं अच्छे रिश्ते

पूजा जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कई बार प्रारंभिक बातचीत के दौरान अपेक्षाओं और विचारों का स्पष्ट आदान-प्रदान नहीं हो पाता।

इसके कारण छोटी-छोटी गलतफहमियां उत्पन्न हो जाती हैं और अच्छे रिश्ते भी आगे नहीं बढ़ पाते।

उन्होंने सुझाव दिया कि विवाह से पहले दोनों परिवारों और युवक-युवती के बीच खुला एवं सकारात्मक संवाद होना चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

अपेक्षाओं को यथार्थवादी बनाने की सलाह

रेखा नानावटी ने कहा कि आज समाज में जीवनसाथी को लेकर अपेक्षाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यक गुणों और केवल इच्छित गुणों के बीच अंतर समझना चाहिए।

यदि प्रत्येक व्यक्ति हर क्षेत्र में पूर्णता खोजने का प्रयास करेगा, तो उपयुक्त जीवनसाथी मिलना स्वाभाविक रूप से कठिन हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि पारिवारिक संस्कार, आपसी सम्मान, विश्वास और समझौते की भावना किसी भी सफल वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी आधारशिला होती है।

खोज का दायरा बढ़ाने की जरूरत

संगीता पोरवाल ने सुझाव दिया कि परिवारों को विवाह योग्य युवक-युवतियों की खोज केवल अपने शहर या सीमित सामाजिक दायरे तक सीमित नहीं रखनी चाहिए।

यदि आवश्यक हो तो अन्य शहरों, राज्यों और व्यापक सामाजिक नेटवर्क में भी रिश्तों की तलाश करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों के कारण दूर-दराज़ के परिवारों से भी आसानी से संपर्क स्थापित किया जा सकता है।

विश्वसनीय मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म अपनाने पर जोर

सुधा जैन ने कहा कि तकनीक के इस दौर में विश्वसनीय मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म और सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित ऑनलाइन मैट्रिमोनियल मीट का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिला संघ द्वारा समय-समय पर आयोजित वैवाहिक परिचय सम्मेलन और ऑनलाइन परिचय कार्यक्रम समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

उन्होंने अधिक से अधिक परिवारों से ऐसे आयोजनों में भाग लेने का आग्रह किया।

समाज में संवाद और सहयोग बढ़ाने पर दिया गया बल

गोष्ठी के दौरान सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि विवाह जैसी सामाजिक संस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए परिवारों, सामाजिक संगठनों और युवाओं के बीच बेहतर संवाद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े और अनावश्यक अपेक्षाओं से बचते हुए संस्कारों एवं पारिवारिक मूल्यों को महत्व दे, तो विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश अपेक्षाकृत सरल हो सकती है।

77 महिला संघों की रही सहभागिता


इस महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी में इंदौर के 77 महिला संघों की पदाधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान सभी ने अपने अनुभव साझा किए तथा विवाह संबंधी सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

अंत में महिला संघ की सचिव पूजा जैन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की विचार गोष्ठियां समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देती हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश

गोष्ठी का निष्कर्ष यही रहा कि बदलते समय के साथ सामाजिक सोच में भी संतुलित बदलाव आवश्यक है। शिक्षा, करियर और आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विवाह जैसी संस्था की सफलता का आधार आज भी आपसी सम्मान, विश्वास, संवाद और पारिवारिक संस्कार ही हैं।

वक्ताओं ने युवाओं और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे जीवनसाथी के चयन में केवल बाहरी मानकों को महत्व न दें, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार, पारिवारिक मूल्यों और आपसी समझ को प्राथमिकता दें। यही दृष्टिकोण भविष्य में सफल और सुखद वैवाहिक जीवन की मजबूत नींव बन सकता है।

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