जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री द्वारा रोजाना स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा नवकारसी का भव्य आयोजन
भगवान आदिनाथ की आराधना, आत्मशुद्धि और धर्म एकता का प्रतीक बना जावरा का आयोजन – 2500 से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया लाभ
जावरा (मध्य प्रदेश)।
कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व जैन, हिन्दू और सिख धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, परंतु जैन धर्म में इसका धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व विशेष रूप से प्रमुख है। इसी दिव्यता का प्रतीक बनकर सोमवार को जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री (Jain Social Group Jawra Maitri) द्वारा ग्राम रोजाना स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भव्य नवकारसी आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें सकल जैन समाज के लगभग 2500 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
कार्तिक पूर्णिमा: जैन धर्म में तप, त्याग और मोक्ष का पर्व
कार्यक्रम के दौरान ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष व अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टर अनिल धारीवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि —
“कार्तिक पूर्णिमा जैन धर्म में आत्मिक शुद्धि, तपस्या और मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक दिन है। यह पर्व हमें आत्म-अनुशासन, संयम और धार्मिकता की दिशा में अग्रसर करता है।”
उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ ने शत्रुंजय पर्वत पर कठोर तपस्या कर इस पर्वत को पवित्र तीर्थ में परिवर्तित किया था। आज भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन देशभर के जैन श्रद्धालु शत्रुंजय पर्वत पर चढ़ाई कर भगवान आदिनाथ की आराधना करते हैं और पापों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संदीप रांका का वक्तव्य
इस अवसर पर जैन कॉन्फ्रेंस आत्म ध्यान योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संदीप रांका ने कहा कि —
“कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व जैन अनुयायियों के लिए अध्यात्म और आत्मशुद्धि की एक अद्वितीय अभिव्यक्ति है। इस दिन साधु-साध्वी चार्तुमास पूर्ण कर वर्षभर के विहार का प्रारंभ करते हैं और जैन धर्म की पताका को आगे बढ़ाते हैं।”
उन्होंने बताया कि भगवान आदिनाथ की तपस्या का स्मरण करते हुए जैन समाज हर वर्ष इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, नवकारसी और प्रभात फेरियां आयोजित करता है, जिससे समाज में एकता और अध्यात्मिकता की भावना जाग्रत होती है।
13 वर्षों से निरंतर नवकारसी आयोजन की परंपरा
जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री परिवार द्वारा यह आयोजन पिछले 13 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इस परंपरा का उद्देश्य है — सकल जैन समाज को एक मंच पर लाना, भगवान महावीर स्वामी के मित्रता (मैत्री) और अहिंसा के संदेश का प्रसार करना।
ग्रुप के अध्यक्ष राजेश पोखरना, सचिव शशांक मेहता और मीडिया प्रभारी मनीष मेहता ने बताया कि इस वर्ष भी आयोजन में समाज के सभी वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने प्राचीन श्री आदिनाथ जैन मंदिर में दर्शन-वंदन किया और नवकारसी का लाभ प्राप्त किया।
समाज गौरव स्व. कन्हैयालाल धारीवाल व स्व. सरदारमल धारीवाल को समर्पण
इस अवसर पर समाज गौरव स्व. कन्हैयालाल जी धारीवाल एवं स्व. सरदारमल जी धारीवाल की स्मृति में उनके परिवार के सुरेश कुमार धारीवाल परिवार द्वारा गुरुदेव राजेन्द्र सुरीश्वर जी म.सा. को आभूषण समर्पित किए गए। यह समर्पण कार्यक्रम पूरे समाज के समक्ष हुआ, जिससे समाज में भावनात्मक एकता का वातावरण बना।
साथ ही श्री आदिनाथ मंदिर के पुजारी को वर्षभर सेवा कार्य के लिए जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री परिवार द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख समाजजन एवं गणमान्य अतिथि
इस धार्मिक आयोजन में शहर एवं आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंच पर उपस्थित प्रमुख अतिथियों में —
संस्थापक अनिल धारीवाल,
पूर्व अध्यक्ष गण संदीप रांका, पंकज कांठेड, आशीष पोखरना, राजीव लुक्कड़, आलोक बरैया,
सचिव शशांक मेहता,
संदीप दसेड़ा, अर्पल कोचट्टा, दीपक मेहता, विपिन चोरडिया, पियूष कांठेड, शैलेष श्रीश्रीमाल, आशीष चत्तर, राजेश हिंगड़, मनीष मेहता, अजय पटवा, संतोष कोचट्टा, वैभव ओस्तवाल, डॉ. ऋषि मेहता, मनीष धारीवाल, अभय कांठेड सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से भी कई अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें भाजपा नगर अध्यक्ष राजेश शर्मा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा, भाजपा पूर्व अध्यक्ष अभय कोठारी, तथा सर्राफा एसोसिएशन महासचिव प्रकाश कांठेड शामिल थे।
आध्यात्मिक एकता और समाज सेवा का अनूठा संगम
जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री के संस्थापक अनिल धारीवाल ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की प्रेरणा देता है। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाला यह नवकारसी उत्सव समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है।
उन्होंने कहा —
“यह नवकारसी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मा की शुद्धि और समाज के प्रति समर्पण का उत्सव है। जैन धर्म के सिद्धांत — ‘अहिंसा, अपरिग्रह, और सत्य’ — आज भी हमें मार्गदर्शन देते हैं।”
आस्था, परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक
अंत में सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से यह संदेश दिया कि कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, अनुशासन और समाज सेवा की प्रेरणा का प्रतीक है।
कार्यक्रम का समापन भगवान आदिनाथ की आरती और जैन सोश्यल ग्रुप जावरा मैत्री के सदस्यों द्वारा “मित्रता और धर्म एकता के जयघोष” के साथ हुआ।
📍 निष्कर्ष:
जावरा का यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि जैन समाज की एकता, सेवा और अध्यात्म का सशक्त संदेश भी दे गया।
जैन सोशल ग्रुप जावरा मैत्री द्वारा हर वर्ष इस नवकारसी का आयोजन यह दर्शाता है कि परंपराएँ केवल निभाई नहीं जातीं — बल्कि उनमें समाज के विकास और आत्मिक उन्नति की प्रेरणा छिपी होती है।


