Jain संत सुरक्षा जांच को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन भेजकर सागर-अशोकनगर क्षेत्र में जैन संतों के विरुद्ध दुष्प्रचार की उच्च स्तरीय जांच और संत सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की।
Jain संत सुरक्षा जांच: राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने CM डॉ. मोहन यादव को भेजा ज्ञापन
इंदौर | राजेश जैन दद्दू
Jain संत सुरक्षा जांच की मांग को लेकर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर मध्य प्रदेश में विचरण कर रहे जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संतों के विरुद्ध रचे जा रहे कथित षड्यंत्र की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने बताया कि सागर, अशोकनगर एवं आसपास के क्षेत्रों में सोशल मीडिया के माध्यम से जैन संतों के विरुद्ध अनर्गल एवं आपत्तिजनक दुष्प्रचार किया जा रहा है, जिससे समाज में सौहार्द बिगड़ने की आशंका उत्पन्न हो रही है।
Jain संत सुरक्षा जांच की मांग
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के केंद्रीय संघ नायक राकेश जैन गोहिल द्वारा क्रमांक संग./2026/124 के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र प्रेषित किया गया है।पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश दिगंबर जैन समाज बहुल राज्य होने के साथ-साथ जैन संतों की पवित्र साधना और तपस्थली के रूप में भी पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। ऐसे में राज्य में विचरण करने वाले संतों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेजा गया ज्ञापन
ज्ञापन में संघ ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि Jain संतों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे दुष्प्रचार की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।संघ का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व समाज में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और संतों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे समय रहते रोकना आवश्यक है।
मध्य प्रदेश को बताया गया जैन संतों की तपस्थली
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश को दिगंबर जैन संतों की प्रमुख तपस्थली माना जाता है।परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने भी मध्य प्रदेश, विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र को अपनी तपस्थली बनाया था। यही कारण है कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सभी संघों के जैन संतों का निरंतर मंगल विहार और धर्म प्रचार-प्रसार होता रहता है।
सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार का आरोप
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने अपने पत्र में कहा है कि पिछले कुछ समय से सागर, अशोकनगर और आसपास के क्षेत्रों में कुछ तत्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जैन संतों के विरुद्ध आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।संघ के अनुसार ऐसे प्रयास धार्मिक भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पूरे मामले की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है।
अशोकनगर पुलिस की कार्रवाई की सराहना
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस मामले में अशोकनगर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई सराहनीय रही है।जानकारी के अनुसार, अशोकनगर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कासल द्वारा 3 जून 2026 को कोतवाली थाना अशोकनगर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की।संघ ने पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा एवं थाना प्रभारी द्वारा समाज की भावनाओं को समझते हुए किए गए प्रयासों की सराहना की है।
संत सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग
राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश में विचरण कर रहे जैन संतों की सुरक्षा के लिए व्यापक और प्रभावी व्यवस्था की जाए।संघ का मानना है कि धार्मिक संतों के सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज एवं शासन दोनों की है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए।
“कलौ एकता बलम्” के संदेश के साथ संघ की अपील
संघ ने अपने ध्येय वाक्य “कलौ एकता बलम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक और धार्मिक एकता ही सबसे बड़ी शक्ति है।राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि जैन संतों की सुरक्षा, सम्मान और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
