सांसद नवीन जैन और आईजा की मांग: जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेस का नाम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के नाम पर रखा जाए
सिरोंज।
राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर मांग की है कि रेलगाड़ी संख्या 11702 जबलपुर से रायपुर वाया डोंगरगढ़ एक्सप्रेस का नाम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के नाम पर रखा जाए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इस ट्रेन का नाम “आचार्य विद्यासागर एक्सप्रेस” या “मूकमाटी एक्सप्रेस” रखा जा सकता है।
इस मांग को लेकर ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री को पत्र भेजकर समर्थन जताया है।
🛤️ रेल मंत्री को भेजा गया अनुरोध पत्र
सांसद नवीन जैन ने अपने पत्र में लिखा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज न केवल जैन समाज के आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि वे सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणा-स्रोत और राष्ट्रसंत थे।
उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत के इतिहास में महात्मा गांधी ने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया, उसी प्रकार आचार्य श्री ने भी “इंडिया नहीं, भारत बोलो” का आह्वान कर भारतीय संस्कृति और स्वदेशी जीवनशैली को अपनाने की प्रेरणा दी।
🌿 आचार्य श्री विद्यासागर जी: जन-जन के संत
नवीन जैन ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज मात्र एक धर्मगुरु नहीं, बल्कि मानवता, सत्य, करुणा और आत्मसंयम के प्रतीक थे।
उनकी शिक्षाएं जाति और धर्म की सीमाओं से परे जाकर हर व्यक्ति के जीवन को स्पर्श करती थीं।
वे कहते थे — “संयम ही सच्ची शक्ति है, और आत्मनिर्भरता ही सच्ची स्वतंत्रता।”
🚶♂️ 1.5 लाख किलोमीटर पदविहार से दिया सद्भाव का संदेश
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि आचार्य श्री ने अपने संन्यास जीवन में अब तक लगभग 1,50,000 किलोमीटर का पदविहार (पैदल यात्रा) किया।
उन्होंने अपने प्रवासों के माध्यम से मानवता, अहिंसा, सत्य और सद्भाव का संदेश पूरे देश में फैलाया।
जहाँ भी वे गए, वहाँ उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण, स्वदेशी उद्योग और नैतिक जीवन को बढ़ावा दिया।
🧵 कारागारों में हथकरघा केंद्र शुरू करवाए
सांसद जैन ने बताया कि आचार्य श्री की प्रेरणा से कारागारों (जेलों) में हथकरघा केंद्र स्थापित किए गए, ताकि बंदियों को आत्मनिर्भरता और ईमानदारी के कार्यों से जोड़ा जा सके।
यह उनके करुणा और समाज-सेवा के दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है।
🛕 जबलपुर और डोंगरगढ़ — आचार्य श्री की कर्मभूमि और समाधि स्थली
आचार्य श्री की कर्मभूमि जबलपुर (मध्य प्रदेश) रही है, जहाँ उन्होंने सबसे अधिक प्रवास और आत्मसाधना की।
वहीं उनकी समाधि छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुई, जो आज सम्पूर्ण जैन समाज के लिए पवित्र तीर्थ स्थल बन चुका है।
इसी कारण जबलपुर से डोंगरगढ़ को जोड़ने वाली इस रेलगाड़ी का नाम उनके नाम पर रखा जाना पूर्णतः उपयुक्त और प्रतीकात्मक है।
🪔 जन्मदिवस पर घोषणा की उम्मीद
सांसद नवीन जैन ने अनुरोध किया कि आगामी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जन्मदिवस पर दिल्ली-एनसीआर में होने वाले भव्य कार्यक्रम में यदि रेल मंत्री इस नामकरण की घोषणा करें, तो यह सम्पूर्ण जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय होगा।
📰 आईजा (All India Jain Journalist Association) ने भी किया समर्थन
इस मांग को बल देते हुए ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया और प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट राजीव जैन सैनानी ने भी प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री को पत्र भेजा।
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज संपूर्ण देश के संत थे, जिन्होंने भारत की एकता, अखंडता और संस्कृति को नया आयाम दिया।
उनकी प्रेरणा से देशभर में लाखों लोग संयम, सत्य और स्वदेशी विचारधारा को अपनाकर जीवन सुधार रहे हैं।
🇮🇳 “इंडिया नहीं, भारत बोलो” – स्वदेशी का संदेश
आईजा ने अपने पत्र में लिखा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी ने हमेशा “इंडिया नहीं, भारत बोलो” का आह्वान कर भारतीयों को अपने मूल और संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।
यह विचार आज भी राष्ट्रवाद, स्वाभिमान और स्वदेशी चेतना का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
🙏 प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं दर्शन
सांसद जैन और आईजा दोनों ने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं कई बार आचार्य श्री के दर्शन कर उनसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त कर चुके हैं।
मोदी जी ने अपने अनेक भाषणों में आचार्य श्री की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें “भारत के नैतिक और आध्यात्मिक ध्रुवतारा” कहा है।
🕊️ आचार्य श्री पूर्णमति माताजी का चातुर्मास दिल्ली एनसीआर में
वर्तमान में आचार्य श्री विद्यासागर जी की सुयोग्य शिष्या परम पूज्या आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी का चातुर्मास दिल्ली-एनसीआर में चल रहा है।
माताजी की प्रेरणा और आशीर्वाद से ही इस मांग को सम्पूर्ण जैन समाज का समर्थन प्राप्त हो रहा है।
📜 समाज की भावनाओं का सम्मान करने की अपील
सांसद नवीन जैन ने कहा कि यह अनुरोध केवल राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि समाज की गहरी आस्था का प्रतीक है।
उन्होंने कहा —
“यदि इस रेलगाड़ी का नाम आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के नाम पर रखा जाता है, तो यह उनके प्रति श्रद्धांजलि और सम्मान का अद्वितीय प्रतीक होगा।
इससे देशभर के नागरिकों में भारतीय संस्कृति, संयम और स्वदेशी भावना के प्रति नवचेतना जागेगी।”
