केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र में गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी का मंगल प्रवेश
श्रद्धालुओं ने बिछाए पलख पांवड़े, जगह-जगह हुआ पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती
केशवरायपाटन, जिला बूंदी (राजस्थान)। दिगम्बर जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले केशवरायपाटन अतिशय क्षेत्र में वर्षायोग के लिए परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी का मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। नगरवासियों और श्रद्धालुओं ने गुरु मां के स्वागत के लिए पलख पांवड़े बिछाए और जगह-जगह पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नगर प्रवेश का दृश्य श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा। बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और समाजजन इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ नगर प्रवेश
रविवार सुबह से ही नगर के प्रवेश द्वार राजराजेश्वर चौराहे पर श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था। छोटी साइकिलों पर सवार बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सहभागिता की। महिलाओं ने मंगल कलश धारण किए और 21 ढोलों की मधुर ध्वनि, कच्छी घोड़ी नृत्य दल, भजन मंडली एवं डीजे वाहन के साथ भव्य स्वागत यात्रा निकाली गई।
कोटा से पहुंची आदि दिव्य घोष की प्रस्तुति और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसी भव्य यात्रा के बीच पूज्य गुरुमां ने नगर में प्रवेश किया।
पाटन समाज के लिए सौभाग्य का अवसर
क्षेत्र अध्यक्ष गुलाबचंद (चूना वाले) ने बताया कि दिगम्बर जैन साधु-संतों का कोई स्थायी निवास नहीं होता, लेकिन वर्षायोग के चार माह वे एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं। इसका उद्देश्य वर्षा ऋतु में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवों की हिंसा से बचना होता है।
उन्होंने बताया कि पूज्य गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी की प्रेरणा से उत्तर भारत के प्राचीन दिगम्बर जैन तीर्थ केशवरायपाटन का पुनरुद्धार कार्य चल रहा है। विभिन्न स्थानों से आए निवेदनों के बावजूद पूज्य गुरुमां ने वर्षायोग के लिए पाटन तीर्थ को चुना, जो समस्त जैन समाज के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
31 स्वागत द्वारों से किया गया अभिनंदन
नगर प्रवेश संयोजक एवं कमेटी कोषाध्यक्ष ने बताया कि यह पूज्य गुरुमां का 31वां वर्षायोग है। इसी विशेष अवसर को देखते हुए नगर परिसर में कुल 31 स्वागत द्वार बनाए गए।
प्रत्येक स्वागत द्वार पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। हर दसवें स्वागत द्वार के बाद 31 थालियों से गुरु मां का पाद प्रक्षालन किया गया। तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश के बाद मंदिर कमेटी द्वारा भी पूज्य गुरुमां की मंगल अगवानी की गई।

गुरु मां ने दिया पुरुषार्थ का संदेश
मंगल प्रवेश के अवसर पर अपने आशीर्वचन में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने जीवन में पुरुषार्थ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्म के साथ कुछ भाग्य लेकर आता है, लेकिन जीवन में सफलता और उन्नति के लिए पुरुषार्थ करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केवल भाग्य के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
श्रद्धालुओं ने अर्पित किए श्रीफल
कार्यक्रम का संचालन महामंत्री राकेश जैन ‘चपलमन’ ने किया। उन्होंने सभी आगंतुक श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
कोटा से आए गुरु मां के अनन्य भक्त राजमल पाटोदी, विनोद टोरडी, विमल नान्ता, जे.के. जैन, मनोज जी, आशीष जी जैसवाल, ईश्वर सोनी सहित खटकड़, तालेड़ा, मायजा, कापरेन आदि क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुमां को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु पूर्णिमा और कलश स्थापना कार्यक्रम
वर्षायोग मीडिया प्रभारी यथार्थ पाटनी ने जानकारी देते हुए बताया कि 29 जुलाई को केशवरायपाटन तीर्थ क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर आचार्य शांति सागर जी छाणी महाराज की अखंड आचार्य परंपरा का गुणगान एवं पूजन पूज्य माताजी के सानिध्य में संपन्न होगा।
उन्होंने बताया कि 2 अगस्त को दोपहर 1 बजे कृषि उपज मंडी केशवरायपाटन परिसर में वर्षायोग कलश स्थापना का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक कार्यक्रम में देशभर से गुरु मां के भक्तों के पहुंचने की संभावना है।

धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम के अंत में क्षेत्र निर्माण मंत्री जितेंद्र शाह एवं कार्याध्यक्ष अभिषेक लुहाड़िया ने सभी श्रद्धालुओं, समाजजनों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
केशवरायपाटन में आयोजित यह मंगल प्रवेश समारोह धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए गुरु मां के वर्षायोग को सफल बनाने का संकल्प लिया।
प्रस्तुति: राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि”, पत्रकार कोटा (राज.)
