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Indore :जैन आगम चार अनुयोग की अद्भुत व्याख्या, मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने बताया मोक्ष मार्ग का सार

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Published On: 21 May 2026
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Indore जैन आगम चार अनुयोग पर मुनि श्री विमल सागर जी महाराज का प्रेरणादायी प्रवचन, इंदौर धर्मसभा में मोक्ष मार्ग का विस्तार से वर्णन।

Indore जैन आगम चार अनुयोग मोक्ष मार्ग के साधक हैं – मुनि श्री विमल सागर जी महाराज

Indore स्थित उदय नगर जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य Vimal Sagar Ji Maharaj ने जैन दर्शन और जैन आगम के महत्व पर विस्तृत प्रवचन देते हुए कहा कि जैन आगम चार अनुयोग में विभाजित है और यही अनुयोग मोक्ष मार्ग के वास्तविक साधक हैं।उन्होंने कहा कि जैन धर्म की संपूर्ण शिक्षा इन चार अनुयोगों में समाहित है और जीव इन्हीं के माध्यम से आत्म कल्याण एवं मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

जैन आगम चार अनुयोग की विस्तृत व्याख्या

अपने प्रवचन में Vimal Sagar Ji Maharaj ने बताया कि जैन आगम चार प्रमुख अनुयोगों में विभाजित है और किसी भी अनुयोग को गौण नहीं माना जा सकता।उन्होंने चारों अनुयोगों का महत्व विस्तार से समझाया।

प्रथमानुयोग – कथा और चरित्र का ज्ञान

मुनि श्री ने बताया कि प्रथमानुयोग में कथा, चरित्र एवं आदर्श जीवन प्रसंगों का वर्णन किया गया है।यह अनुयोग मनुष्य को महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने और सदाचार के मार्ग पर चलने की सीख देता है।

करुणानुयोग – कर्म और लोक सिद्धांत का वर्णन

उन्होंने कहा कि करुणानुयोग में कर्म सिद्धांत और लोक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन मिलता है।इस अनुयोग के माध्यम से जीव अपने कर्मों के परिणाम को समझता है और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

चरणानुयोग – आचार विचार और दैनिक जीवन का मार्गदर्शन

Vimal Sagar Ji Maharaj ने बताया कि चरणानुयोग में श्रावकों और मुनियों के आचार-विचार, दैनिक दिनचर्या, व्रत एवं नियमों का वर्णन किया गया है।यह अनुयोग अनुशासन, संयम और सदाचारपूर्ण जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करता है।

द्रव्यानुयोग – आत्मा और तत्वों का ज्ञान

उन्होंने कहा कि द्रव्यानुयोग में आत्मा, छह द्रव्यों और सात तत्वों का वर्णन मिलता है।जैन दर्शन के अनुसार आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए द्रव्यानुयोग का ज्ञान अत्यंत आवश्यक माना गया है।

जैन आगम चार अनुयोग से आत्म कल्याण संभव

मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार जीव इन चारों अनुयोगों के माध्यम से अपने जीवन को सुधार सकता है।इन अनुयोगों का अध्ययन व्यक्ति को आत्म कल्याण, संयम, सदाचार और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

लव कुश विद्या विहार स्कूल में चला सर्वांगीण विकास शिविर

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि लव कुश विद्या विहार स्कूल में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष शिविर आयोजित किया गया।इस शिविर में लगभग 600 बच्चों ने भाग लिया और सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बच्ची वान्या जैन को कंप्यूटर उपहार स्वरूप दिया गया, जबकि अन्य 11 बच्चों को कूलर भेंट किए गए।

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आर्यिका श्री उपशम मति माताजी एवं श्रुत मति माताजी के समाधि मरण पर जताया दुख

धर्मसभा में दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। समाज के अध्यक्ष Vinay Bakliwal ने कहा कि संत शिरोमणि Acharya Vidyasagar Ji Maharaj से दीक्षित आर्यिका श्री उपशम मति माताजी एवं आर्यिका श्री श्रुत मति माताजी का दुर्घटना में असामयिक समाधि मरण होने से संपूर्ण जैन समाज अत्यंत दुखी और आहत है।उन्होंने कहा कि समाज इस दुखद घटना पर विनयांजलि अर्पित करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समाज का प्रतिनिधिमंडल भोपाल जाकर मुख्यमंत्री Mohan Yadav से मुलाकात करेगा।

संतों की सुरक्षा को लेकर बनेगी विशेष योजना

समाज के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री Mohan Yadav से संतों के आहार, निहार एवं विहार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।समाज द्वारा संतों की यात्रा और विहार के दौरान उचित सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष योजना तैयार करने की पहल की जाएगी।

सामाजिक संसद के पदाधिकारियों का हुआ सम्मान

शिविर में सहयोग देने पर सामाजिक संसद के पदाधिकारियों का सम्मान किया गया।सम्मानित होने वालों में विनय बाकलीवाल, डी के जैन, जेनेश झांझरी, पिंकेश टोंग्या, सतीश जैन, सुदीप जैन और पवन पाटोदी शामिल रहे।इनका सम्मान ट्रस्ट अध्यक्ष पी सी जैन, सचिन जैन (उद्योगपति), संतोष जैन सर, राकेश जैन पम्पु, मनीष नायक, अशोक जैन, जितेंद्र जैन सीए, अतुल जैन (थाला वाले) एवं सचिन कोल ने किया।

धर्मसभा का सफल संचालन

धर्मसभा का सफल संचालन श्री भरत जैन ने किया जबकि आभार प्रदर्शन संदीप जैन द्वारा व्यक्त किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और मुनि श्री के प्रवचन से प्रेरणा प्राप्त की।

जैन समाज में धार्मिक जागरूकता का संदेश

धर्मसभा के माध्यम से जैन समाज को धार्मिक अध्ययन, आत्मचिंतन और संस्कारों की दिशा में प्रेरित किया गया।मुनि श्री विमल सागर जी महाराज के प्रवचनों ने समाज को मोक्ष मार्ग और आत्म शुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

सतीश जैन ( इला बैंक)
प्रचार प्रमुख दिगंबर जैन समाज ,
सामाजिक संसद, इंदौर

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