जैन अधिवक्ता एसोसिएशन अधिवेशन सिरोंज में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। संगठन की मजबूती, अधिवक्ताओं की एकता और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
जैन अधिवक्ता एसोसिएशन अधिवेशन सिरोंज में सफलता के साथ सम्पन्न हुआ, जिसने संगठन की एकता, मजबूती और सक्रियता को एक नई दिशा दी।
इस भव्य अधिवेशन में प्रदेशभर से आए जैन अधिवक्ताओं ने सहभागिता की और संगठन को और अधिक सशक्त बनाने पर गहन मंथन किया।
संगठन की मजबूती पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्टेट बार काउंसिल की कोषाध्यक्ष श्रीमती रश्मी ऋतु जैन ने कहा कि जैन अधिवक्ता एसोसिएशन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के लिए एक मजबूत परिवार है।
उन्होंने कहा कि जब भी संगठन का कोई सदस्य किसी परेशानी में होता है, पूरा संगठन उसके साथ खड़ा नजर आता है।
संभाग और जिला स्तर पर संगठन विस्तार की आवश्यकता
श्रीमती जैन ने कहा कि संगठन को और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रत्येक संभाग और जिले में नियमित बैठकें आवश्यक हैं। इससे न केवल सदस्य संख्या बढ़ेगी, बल्कि संगठनात्मक ढांचा भी मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेशभर के जैन अधिवक्ता एक साझा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जुड़े हुए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर तत्काल सहयोग और परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
डिक्लेरेशन और मतदान पर महत्वपूर्ण संदेश
स्टेट बार काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य नरेन्द्र कुमार जैन ने अधिवक्ताओं को डिक्लेरेशन की अनिवार्यता के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बिना डिक्लेरेशन के मतदान का अधिकार नहीं मिल पाएगा और हर अधिवक्ता का मत अत्यंत बहुमूल्य है।
युवा अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका
युवा अधिवक्ता राजीव जैन सैनानी ने संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठों के संरक्षण और मार्गदर्शन से संगठन की गतिविधियों में नई ऊर्जा आएगी और आगामी अधिवेशन और भी भव्य रूप में आयोजित किया जाना चाहिए।
50 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले अधिवक्ताओं का सम्मान
अधिवेशन के दौरान 50 वर्ष से अधिक समय से वकालत कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सम्मान किया गया।
यह सम्मान न केवल उनके अनुभव का आदर था, बल्कि युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
कार्यक्रम की विशेष झलकियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश चंद जैन ने की।
इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन, ध्वजारोहण, मंगलाचरण एवं सामूहिक भोज का आयोजन भी किया गया, जिससे आयोजन और अधिक गरिमामय बन गया।
