कुपोषण पर वार: जबलपुर में माताओं की विशेष काउंसलिंग – भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की सराहनीय पहल
जबलपुर, मध्यप्रदेश | 30 अक्टूबर 2025
मध्यप्रदेश के जबलपुर में कुपोषण के खिलाफ एक सराहनीय पहल देखने को मिली। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (Bharatiya Manav Adhikar Sahkar Trust) की ओर से मनमोहन नगर स्वास्थ्य केंद्र के पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में माताओं के लिए विशेष काउंसलिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व ट्रस्ट की जबलपुर संभाग अध्यक्ष श्रीमती सौंपा चटर्जी ने किया, जिसमें कुपोषित बच्चों की माताओं को बच्चों के पोषण, संतुलित आहार और स्वच्छता के महत्व की जानकारी दी गई।
कुपोषण के खिलाफ जागरूकता की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम में विशेषज्ञों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने बताया कि बच्चों में कुपोषण के मुख्य कारणों में असंतुलित आहार, स्वच्छता की कमी और मातृ स्वास्थ्य की उपेक्षा प्रमुख हैं।
माताओं को यह सिखाया गया कि—
- कुपोषण (Malnutrition) के प्रमुख कारण क्या हैं।
- संतुलित आहार (Balanced Diet) बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में कैसे सहायक होता है।
- घरेलू खाद्य पदार्थों जैसे दाल, हरी सब्जियाँ, अनाज और दूध से पौष्टिक भोजन कैसे तैयार किया जा सकता है।
- स्वच्छता और मातृ स्वास्थ्य बच्चों के विकास पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
सत्र के दौरान यह भी समझाया गया कि “स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे की नींव होती है।” इसलिए माताओं को अपने स्वास्थ्य, एनीमिया (Anemia) से बचाव और सही खानपान की आदतों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी गई।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव का प्रेरक संदेश
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने संदेश में कहा—
“ट्रस्ट सदैव समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए कार्य करता आया है।
कुपोषण सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि समाज की संवेदना और जिम्मेदारी का विषय है।
जब एक माँ जागरूक होती है, तभी एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण होता है।
हमारा लक्ष्य है कि भारत का हर बच्चा पौष्टिक भोजन पाए और हर माँ आत्मनिर्भर व स्वास्थ्य जागरूक बने।”
यह संदेश माताओं में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना जगाने वाला रहा।
कार्यक्रम प्रभारी सौंपा चटर्जी का वक्तव्य
ट्रस्ट की जबलपुर संभाग अध्यक्ष श्रीमती सौंपा चटर्जी ने बताया कि माताओं ने इस काउंसलिंग सत्र को बहुत उपयोगी और प्रेरक बताया।
“आज की काउंसलिंग से माताएँ बच्चों के पोषण, स्वच्छता और अपने स्वास्थ्य के महत्व को बेहतर ढंग से समझ पाईं।
ऐसे कार्यक्रम समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने कहा कि यह पहल माताओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने और कुपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयास को मजबूत करेगी।
पोषण पुनर्वास केंद्र की अधिकारी का वक्तव्य
पोषण पुनर्वास केंद्र की प्रभारी अधिकारी ने ट्रस्ट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा—
“भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की पहल बेहद प्रेरणादायक है।
इससे माताओं में जागरूकता बढ़ रही है और बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
हम भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”
राष्ट्रीय कार्यकारिणी और सदस्यों का संदेश
कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, मनीष गुप्ता, संतोष सिंह पंवार, डॉ. प्रेमकुमार वैध, श्रीमती अनीता दुबे, जीवनलाल जैन (चायवाले), भावेश नाहर, कु. आस्था जैन, उमेश जैन और सुश्री सोना जैन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
सभी ने एक स्वर में कहा—
“स्वास्थ्य जागरूकता तभी संभव है जब हम घर-घर तक पोषण का महत्व पहुँचा सकें।
यह अभियान माताओं में विश्वास और बच्चों में सेहत दोनों बढ़ाएगा।”
महिला प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मधु शर्मा का प्रेरक संदेश
ट्रस्ट की मध्यप्रदेश महिला प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मधु शर्मा ने कहा—
“महिलाओं का सशक्तिकरण तभी पूर्ण होगा जब वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों।
माताओं का यह प्रशिक्षण अभियान ‘स्वस्थ भारत – सशक्त भारत’ की दिशा में एक मजबूत कदम है।”
संस्था का मुख्य संदेश: “स्वस्थ माँ, स्वस्थ बच्चा — यही स्वस्थ भारत की पहचान”
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने यह स्पष्ट किया कि कुपोषण उन्मूलन केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है।
संस्था का उद्देश्य है कि हर परिवार में पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संचार हो।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे अपने घरों और समुदायों में “पोषण और स्वास्थ्य के संदेशवाहक” बनेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ी कुपोषण-मुक्त और सशक्त भारत की नींव रख सके।
