Iraq में अमेरिकी मिलिट्री प्लेन क्रैश और ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग: विवरण और वैश्विक असर
Iraq में अमेरिकी विमान क्रैश, शिया विद्रोही गुट ने ली जिम्मेदारी
Iraq में अमेरिकी सेना का KC-135 सैन्य विमान क्रैश हो गया है। इसके तुरंत बाद इराक के एक शिया विद्रोही गुट ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस इन Iraq ‘ ने दावा किया कि विमान को उसी ने मार गिराया। यह संगठन ईरान समर्थित कई गुटों का गठबंधन है और पश्चिमी इराक में एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर अमेरिकी विमान को निशाना बनाने का दावा किया।
हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि विमान किसी हमले या गोलीबारी के कारण नहीं गिरा। उनके अनुसार हादसा फ्रेंडली एयरस्पेस में हुआ और सुरक्षा कारणों से यह विमान दुर्घटना का शिकार हुआ। CENTCOM ने यह भी बताया कि इस घटना में एक और अमेरिकी विमान सुरक्षित रूप से इजराइल में उतर गया।
कुवैत में पहले भी हुए विमान हादसे
इससे पहले, 2 मार्च को कुवैत में फ्रेंडली फायरिंग के कारण तीन अमेरिकी विमान क्रैश हो गए थे। इस घटना से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। इराक और कुवैत में इन घटनाओं के बाद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियान और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर पर गंभीर हमले का दावा
ब्रिटिश मीडिया के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें इतने गंभीर चोटें आईं कि उनका एक पैर काटना पड़ा और पेट या लिवर में भी गंभीर चोटें आईं। कहा गया कि खामेनेई कोमा में हो सकते हैं और उनका इलाज तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में कड़ी सुरक्षा में चल रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इंटरव्यू में कहा कि उन्हें लगता है कि खामेनेई जिंदा हैं, लेकिन गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं ईरान के अधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम लीडर सुरक्षित हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। ईरान के राजदूत अलीरेजा सलारियन ने भी बताया कि खामेनेई के पैरों, हाथ और बांह में चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत सार्वजनिक भाषण देने के लायक नहीं है।
मिसाइल हमले और अमेरिका-इजराइल जवाबी कार्रवाई
Iran ने गुरुवार को इजराइल पर कई मिसाइलें दागीं, जिन्हें इजराइली डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी मिसाइल लॉन्चर पर हमला करने का फुटेज जारी किया। अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।
भारत को राहत: होर्मुज से तेल पहुंचा मुंबई
Iran और अमेरिका-इजराइल जंग के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई। युद्ध शुरू होने के बाद गुरुवार को होर्मुज स्ट्रेट से पहला तेल टैंकर ‘सीलिन एक्सप्रेस’ मुंबई पहुंचा। जहाज ने लगभग 13.5 लाख बैरल कच्चा तेल मुंबई के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर पहुंचाया। सुरक्षा कारणों से जहाज ने यात्रा के दौरान AIS सिस्टम को बंद रखा, जिसे ‘डार्क मोड’ कहा गया। यह तेल टैंकर भारत के लिए युद्ध के दौरान सुरक्षित सप्लाई का पहला संकेत है।
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी
जंग और तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर गई हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दूसरे देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल खरीदने की अस्थाई अनुमति दी। यह छूट केवल 11 अप्रैल तक वैध रहेगी और इसका उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना है।
नेतन्याहू का ईरान पर बयान
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान सरकार का गिरना तय नहीं है, लेकिन इजराइल ऐसी परिस्थितियां बनाना चाहता है जिससे ईरान की सरकार कमजोर हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेगा और अपने न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम के खतरे को समाप्त करना चाहता है।
Iran की रणनीति और नेतृत्व
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी सेना के कमान को सात छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर रखा है। इसके अलावा हर पद के लिए चार संभावित उत्तराधिकारी पहले से तय किए गए हैं। इसका उद्देश्य लंबे समय तक जंग लड़ने की क्षमता बनाए रखना है।
ट्रम्प प्रशासन की दृष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके सलाहकारों का मानना है कि युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी। पिछले साल के हमलों के अनुभव से उन्होंने अनुमान लगाया कि तेल बाजार अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक स्थिर रहेगा।
निष्कर्ष
Iraq में अमेरिकी विमान क्रैश, ईरान के सुप्रीम लीडर पर हमला, और अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग की घटनाओं ने मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता पैदा की है। भारत के लिए होर्मुज से तेल पहुंचना राहत की खबर है, लेकिन इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक तनाव अभी भी उच्च स्तर पर हैं।
इस जंग ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गहरा असर डाल रहा है।
