Iran Warship Attack: श्रीलंका के गाले तट के पास अमेरिकी हमले में डूबे ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के 84 नाविकों के शव ईरान भेजे गए। ईरान ने बदले की कसम खाई।
Iran Warship Attack: अमेरिकी हमले में डूबे युद्धपोत के 84 नाविकों के शव ईरान भेजे गए
Iran Warship Attack ने एक बार फिर दुनिया की राजनीति को हिला दिया है। हिंद महासागर में हुए इस हमले में ईरान के युद्धपोत IRIS डेना के डूबने से 84 नाविकों की मौत हो गई। श्रीलंका ने इन नाविकों के शवों को तुर्की के एक विमान के जरिए ईरान भेज दिया है।यह घटना न केवल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को बढ़ाने वाली है बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
Iran Warship Attack क्या है
Iran Warship Attack उस घटना को कहा जा रहा है जिसमें ईरान का युद्धपोत IRIS डेना अमेरिकी टॉरपीडो हमले के बाद हिंद महासागर में डूब गया।यह जहाज भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित International Fleet Review 2026 में हिस्सा लेकर वापस ईरान लौट रहा था। इसी दौरान 4 मार्च को श्रीलंका के गाले तट के पास इस पर हमला हुआ।अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास से लौट रहे इस जहाज पर हमला होने से पूरी दुनिया में सुरक्षा और कूटनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं।
श्रीलंका से ईरानी नाविकों के शव भेजे गए
हमले के बाद डूबे जहाज से कई दिनों तक राहत और बचाव अभियान चलाया गया। श्रीलंका के दक्षिणी तट गाले के पास समुद्र से कुल 84 नाविकों के शव बरामद किए गए।शुक्रवार को इन शवों को तुर्किये की एक निजी एयरलाइन के विमान से ईरान भेजा गया।श्रीलंका के करापितिया नेशनल हॉस्पिटल में इन शवों को सुरक्षित रखा गया था।मुख्य मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद इन्हें ईरान के दूतावास को सौंप दिया गया।
कैसे हुआ IRIS डेना पर हमला
रिपोर्ट्स के अनुसार Iran Warship Attack 4 मार्च को हुआ।ईरानी युद्धपोत IRIS डेना हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान उस पर अमेरिकी टॉरपीडो से हमला किया गया।हमले के बाद जहाज को भारी नुकसान हुआ और कुछ ही समय में वह समुद्र में डूब गया।ईरान का कहना है कि यह जहाज किसी युद्ध मिशन पर नहीं था बल्कि अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था।
हमले में कितने लोग मारे गए
इस हादसे में कुल 84 नाविकों की मौत हो गई जबकि 32 नाविक जीवित बच गए।घायलों को श्रीलंका के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की हालत स्थिर थी और कुछ दिनों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।यह घटना ईरान की नौसेना के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
ईरान का कड़ा रुख और बदले की चेतावनी
Iran Warship Attack के बाद ईरान ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।ईरानी सेना के कमांडर अमीर हातमी ने कहा है कि देश अपने सैनिकों की शहादत को कभी नहीं भूलेगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा:
ईरान इस हमले का जवाब जरूर देगा और अपनी समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने भी इस घटना को समुद्र में की गई बर्बरता बताया है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर संभावित असर
यह घटना वैश्विक राजनीति में एक नया संकट पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- ईरान और अमेरिका के संबंध और खराब हो सकते हैं
- हिंद महासागर में सैन्य गतिविधि बढ़ सकती है
- क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा रणनीति बदल सकती है
इस घटना ने कई देशों को चिंतित कर दिया है।
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हिंद महासागर में बढ़ता सैन्य तनाव
हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।भारत, चीन, अमेरिका और कई अन्य देशों की नौसेनाएं इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।इस वजह से Iran Warship Attack केवल एक सैन्य घटना नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व की घटना भी बन गई है।
निष्कर्ष
Iran Warship Attack ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।ईरानी युद्धपोत IRIS डेना पर हुए हमले में 84 नाविकों की मौत ने पूरे ईरान को झकझोर दिया है।श्रीलंका से इन नाविकों के शवों को सम्मान के साथ ईरान भेजा गया है, लेकिन इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना है।अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान इस हमले का जवाब किस तरह देता है और क्या इससे वैश्विक राजनीति में नया टकराव पैदा होगा।
