Hormuz Strait विवाद: ट्रंप की धमकी, ईरान की शर्त और भारत पर पड़ने वाले असर
मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को Hormuz Strait खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर ईरान ने मंगलवार शाम तक इस पर कोई कदम नहीं उठाया, तो उसके पावर प्लांट और पुल सुरक्षित नहीं रहेंगे। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट खोलने के लिए अपनी शर्त रख दी है। इस टकराव का असर न केवल मध्य-पूर्व, बल्कि भारत और अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप का अल्टीमेटम
अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण में खामी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ट्रंप ने कहा कि:
- ईरान के पास स्ट्रेट खोलने के लिए मंगलवार शाम तक का समय है।
- अगर ईरान ऐसा नहीं करता, तो उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा।
- ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) बड़े हमले पर विचार कर सकता है।
यह अल्टीमेटम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य न केवल स्ट्रेट को खोलवाना है, बल्कि तेल की आपूर्ति पर भी नियंत्रण रखना है।
ईरान की शर्त
ईरान ने अपनी शर्त स्पष्ट कर दी है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े अधिकारी मेहदी तबातबाई ने कहा कि:
- होर्मुज स्ट्रेट तभी खोला जाएगा, जब ट्रांजिट टोल का एक हिस्सा युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
- यह कदम ईरान की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
- ईरान का कहना है कि स्ट्रेट को खोलना केवल अमेरिका के एकतरफा दबाव में संभव नहीं होगा।
ईरानी संसद का संदेश
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ ने ट्रंप की धमकियों के जवाब में चेतावनी दी:
- उनके अनुसार अमेरिका के लापरवाह कदम पूरे क्षेत्र को खतरे में डाल रहे हैं।
- गालिबाफ ने कहा, “आपके कदम अमेरिका को हर परिवार के लिए नरक की ओर खींच रहे हैं और हमारा पूरा क्षेत्र जल उठेगा।”
- यह संदेश विशेष रूप से इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के समर्थन पर आधारित अमेरिका की रणनीति के खिलाफ है।
ट्रंप की उम्मीद और धमकी
ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि सोमवार तक ईरान के साथ डील हो सकती है। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा:
- “मुझे लगता है कि सोमवार अच्छा मौका है, वे अभी बातचीत कर रहे हैं।”
- अगर कोई डील नहीं होती है, तो वे “सबकुछ उड़ा देने और तेल पर कब्जा करने” पर विचार कर रहे हैं।
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इससे पहले ट्रंप ने ईरान को गाली देते हुए चेतावनी दी थी:
“होर्मुज स्ट्रेट को खोलो वरना नरक में जाओगे – देखते रहिए! अल्लाह से प्रार्थना करो।”
ट्रंप का यह रुख एक सख्त सैन्य विकल्प की संभावना को भी दर्शाता है।
भारत पर असर
भारत में फिलहाल तेल की कोई आपूर्ति संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन एलपीजी और उर्वरक की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
- सरकार ने एलपीजी ग्राहकों को पीएनजी पर शिफ्ट करने की योजना बनाई है।
- बीते एक महीने में करीब 8 लाख ग्राहक पीएनजी पर शिफ्ट हो चुके हैं।
- होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने पर यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
- यह कदम कृषि क्षेत्र और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर असर डाल सकता है।
इसलिए भारत सरकार ने पहले ही सप्लाई विकल्प और वैकल्पिक स्रोत सुनिश्चित करने की तैयारी कर ली है।
वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर असर
होर्मुज स्ट्रेट विश्व तेल और गैस सप्लाई का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
- स्ट्रेट बंद रहने या तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
- मध्य-पूर्व से यूरोप और एशिया में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होगी।
- भारत सहित तेल आयातक देश इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक बाजार में ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
- ट्रंप और ईरान के बीच टकराव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, तेल आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
- ईरान की शर्त और अमेरिकी धमकी ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
- भारत और अन्य तेल आयातक देशों को इसके लिए सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी।
- अगर डील नहीं होती है, तो मध्य-पूर्व और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भारी प्रभाव पड़ सकता है।
यह विवाद न केवल राजनीतिक, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा दृष्टि से भी अहम है। होर्मुज स्ट्रेट का खुलना या बंद रहना आने वाले हफ्तों में पूरे क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

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