Iran-Israel संघर्ष के बीच भारत पहुंचा कच्चा तेल: कैप्टन की सूझबूझ से मिसाइलों को चकमा
Iran-Israel संघर्ष की वजह से पूरी दुनिया में होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली ईंधन सप्लाई प्रभावित हुई है। इस दौरान भारत सहित कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में सऊदी अरब से कच्चे तेल की बड़ी खेप लेकर भारत आने वाला जहाज काफी अहम साबित हुआ। जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने में भारतीय कैप्टन सुखांत सिंह संधू की सूझबूझ काम आई।
होर्मुज स्ट्रेट से भारत तक की यात्रा
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ‘शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स’ नामक जहाज सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से 1 मार्च को लोड होकर भारत के लिए रवाना हुआ था। जहाज में 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल था। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज की आखिरी लोकेशन 8 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट में मिली। इसके बाद ट्रैकिंग सिस्टम से जहाज का सिग्नल गायब हो गया, क्योंकि चालक दल ने खतरनाक जलक्षेत्र में AIS (Automatic Identification System) को बंद कर दिया था।
AIS को बंद करना समुद्री संचालन में ‘गोइंग डार्क’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि जहाज अपनी पहचान और लोकेशन को छुपा देता है। खतरे वाले क्षेत्र को पार करने के बाद चालक दल ने फिर से AIS ऑन किया और सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंचा।
कैप्टन की रणनीति और टीम की बहादुरी
जैसा कि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया, जहाज के कैप्टन सुखांत सिंह संधू ने मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए विशेष रणनीति अपनाई। इसके तहत जहाज की पहचान प्रणाली को बंद कर खतरनाक जलक्षेत्र से गुजरना शामिल था।
इस जहाज में भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 लोगों का दल मौजूद था। कैप्टन और चालक दल की सूझबूझ और अनुभव की वजह से जहाज सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह के जवाहर द्वीप टर्मिनल पर पहुंचा। तेल को उतारकर पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जा रहा है।
ऊर्जा संकट के बीच राहत
ईरान-इजरायल संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हुआ। कई देशों में गैस और तेल की सप्लाई बाधित हुई, जिससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कमी दोनों की चिंता पैदा हुई।
भारत के लिए यह तेल टैंकर राहत लेकर आया। यह खेप न केवल भारतीय ऊर्जा बाजार को संतुलित करेगी, बल्कि घरेलू पेट्रोलियम कंपनियों और रिफाइनरियों के संचालन को भी सुचारू बनाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट और सुरक्षा चुनौतियाँ
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री जलमार्गों में से एक है, और ईरान-इजरायल संघर्ष के समय यह अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बन गया। फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद कई जहाज मार्ग में फंस गए।
भारत सरकार के मुताबिक, फारस की खाड़ी में भारतीय झंडे वाले कुल 28 जहाज संचालित हो रहे हैं। इनमें 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज पूर्वी हिस्से में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
पिछले हमले और खतरे
ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गए थे। हाल ही में थाई मालवाहक जहाज ‘मयूरी नारी’ पर हमला हुआ था। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात से कांडला बंदरगाह जा रहा था। हमले में आग लग गई और 3 चालक दल के सदस्य लापता हो गए, जबकि 20 अन्य को थाई नौसेना और ओमान अधिकारियों ने बचाया।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि संघर्ष का प्रभाव सिर्फ सप्लाई चेन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नाविकों और जहाजों की सुरक्षा भी गंभीर खतरे में है।
जहाज और चालक दल की उपलब्धि
‘शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स’ जहाज की मुंबई पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है। कैप्टन सुखांत सिंह संधू और उनके दल ने न केवल खतरनाक क्षेत्र से सुरक्षित पार किया, बल्कि मिसाइल हमलों और अन्य खतरों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक निर्णय लिया।
इस तरह यह जहाज पहला भारतीय तेल टैंकर बन गया, जो ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलकर भारत आया।
भविष्य में संभावित चुनौतियाँ
ईरान-इजरायल संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। भविष्य में भी होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में जोखिम बना रहेगा। भारत सरकार और पोत संचालन कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। इसके लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल, मार्ग तय करना और गोइंग डार्क जैसी रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं।
इस स्थिति में भारतीय कैप्टन और चालक दल की अनुभव और सूझबूझ ही भविष्य में ऐसे खतरनाक मिशनों को सफल बनाने की कुंजी होगी।
निष्कर्ष
Iran-Israel संघर्ष के बीच सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत आने वाला ‘शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स’ जहाज ऊर्जा संकट के समय भारत के लिए राहत लेकर आया। कैप्टन सुखांत सिंह संधू और उनके चालक दल ने खतरनाक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हुए मिसाइल हमलों और सुरक्षा खतरों को चकमा दिया।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि सुरक्षा, सूझबूझ और रणनीति के सही मिश्रण से वैश्विक संघर्षों के बीच भी महत्वपूर्ण सप्लाई को सुरक्षित किया जा सकता है।
