अंतर्राष्ट्रीय ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 2026 : 6 से 13 फरवरी | णमोकार तीर्थ नासिक में अद्भुत–अपूर्व दिव्य आयोजन
✍️ पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार की विशेष रिपोर्ट
कोटा
णमोकार तीर्थ नासिक में होने जा रहा है विश्व स्तरीय दिव्य आयोजन
महाराष्ट्र के नासिक जिले स्थित पावन णमोकार तीर्थ पर 6 से 13 फरवरी 2026 तक इतिहास का सबसे भव्य और विशाल अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं महामस्तकाभिषेक आयोजित होने जा रहा है।
तीर्थ के प्रणेता परम पूज्य आचार्य 108 देव नंदी जी गुरुदेव एवं विशाल साधु–साध्वी संघ के सान्निध्य में यह आयोजन अत्यंत दिव्य, अनुपम और अलौकिक होने वाला है।
इस आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा की उपाध्यक्ष श्रीमती ज्योति पाटनी (नागपुर) ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” पत्रकार को बताया कि 2026 का यह पंचकल्याणक महोत्सव जैन धर्म के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।
3000 जिनप्रतिमाओं का पंचकल्याणक — दुर्लभ व सौभाग्यशाली अवसर
इस प्रतिष्ठा महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण है—
3000 से अधिक जिनप्रतिमाओं का पंचकल्याणक संस्कार
यह अवसर अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, जिसे देखने और उसमें भाग लेने का सौभाग्य कई जन्मों के पुण्य उदय पर ही मिलता है।
हर प्रतिमा में पंचकल्याणक—
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गर्भ कल्याणक
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जन्म कल्याणक
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तप कल्याणक
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ज्ञान कल्याणक
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मोक्ष कल्याणक
की दिव्य प्रक्रिया सम्पन्न होगी। यह आयोजन जैन धर्म के साधकों के लिए आत्मिक ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्वितीय पर्व बनकर सामने आएगा।
125 एकड़ में विकसित हो रहा ‘पंचकल्याणक नगर’
लगभग 125 एकड़ में तैयार हो रहा विशाल पंचकल्याणक नगर इस आयोजन की विराटता को दर्शाता है।
नगर के भीतर—
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दो विशाल मंडप, प्रत्येक 1 लाख वर्गफीट
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श्रद्धालुओं के लिए आवासीय व्यवस्थाएँ
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भव्य मंच
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धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अलग-अलग सेक्टर
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सांस्कृतिक व आध्यात्मिक कार्यक्रम स्थल
तैयार किए जा रहे हैं।
यह नगर एक पूर्ण दिव्य आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित होगा, जहाँ हर दिशा में धर्म, अनुशासन और भक्ति की दिव्यता देखने को मिलेगी।
400+ साधु–साध्वी ससंघ का अलौकिक सान्निध्य
2026 के इस पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में देशभर के दिगंबर जैन समुदाय के 400 से अधिक साधु–साध्वियों के आगमन की संभावना है।
इतने विशाल संत-संघ का एक ही स्थान पर विराजमान होना अपने आप में एक महान आध्यात्मिक घटना है।
साधु–साध्वी संघों के उपदेश, प्रवचन और धर्मानुष्ठान से पूरा माहौल पूर्णतः पावन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहेगा।
10 लाख से अधिक श्रावक–श्राविकाएँ होंगे सहभागी
देश–विदेश से 10 लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं के इस आयोजन में आने की संभावना व्यक्त की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए विशाल व्यवस्था तैयार हो रही है—
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300 सूट
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700 अस्थायी कक्ष
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500 डॉरमेट्री
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उच्च स्तरीय भोजनालय
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परिवहन और पार्किंग की आधुनिक सुविधा
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चिकित्सकीय और आपातकालीन सेवा केंद्र
सब कुछ अत्यंत सुव्यवस्थित तरीके से निर्मित किया जा रहा है।
अद्भुत–अपूर्व–अलौकिक आयोजन: कई जन्मों का संचित पुण्य
जैन धर्म में पंचकल्याणक को महान पुण्यदायी माना गया है।
जब 3000 जिनप्रतिमाओं का एक साथ पंचकल्याणक हो, वह भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, तो ऐसा सुअवसर अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक सिद्ध होता है।
धर्मप्रेमी परिवारों के लिए यह जीवन का ऐसा पर्व है जिसे न केवल देखा जाता है, बल्कि आत्मा तक अनुभव करती है।
कई जन्मों का संचित पुण्य जब फलित होता है तभी ऐसे दिव्य आयोजन का दर्शन मिलता है।
सभी इष्ट–मित्रों के साथ पुण्य संचय का आह्वान
समिति की ओर से सभी जैन समाजजनों, बंधु–भगिनियों और धर्मानुरागी श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे—
6 से 13 फरवरी 2026
के बीच होने वाले इस दिव्य ऐतिहासिक आयोजन में अपनी उपस्थिति देकर पुण्य का अपार संचय करें और इस युगांतकारी महापर्व के साक्षी बनें।
प्रस्तुति
पारस जैन “पार्श्वमणि”
पत्रकार, कोटा
📞 9414764980



