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Indore की बेटी सपना शर्मा ने पैरा ताइक्वांडो में जीता चौथा राष्ट्रीय गोल्ड

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Published On: 31 March 2026
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— "इंदौर की सपना शर्मा ने पैरा ताइक्वांडो में जीता चौथा नेशनल गोल्ड"

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Indore की बेटी सपना शर्मा ने पैरा ताइक्वांडो में जीता चौथा राष्ट्रीय गोल्ड

Indore की 35 वर्षीय पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी सपना शर्मा ने एक बार फिर भारतीय खेल जगत में अपना नाम रोशन किया है। उन्होंने पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह सपना का लगातार चौथा राष्ट्रीय गोल्ड है, जिससे उनकी मेहनत, समर्पण और अदम्य साहस का परिचय मिलता है। उनके इस उपलब्धि ने न केवल मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

दिव्यांगता को बनाया ताकत

सपना शर्मा ने अपनी दिव्यांगता को कभी बाधा नहीं बनने दिया। इसके बजाय, उन्होंने इसे अपनी ताकत और प्रेरणा का स्रोत बनाया। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाली सपना ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। उन्होंने पैरा ताइक्वांडो को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया और लगातार कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन के जरिए अपने खेल को नए मुकाम पर पहुंचाया।

सपना का यह दृष्टिकोण यह साबित करता है कि शारीरिक सीमाएँ कभी भी आत्मविश्वास और मेहनत के आगे बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों को सकारात्मक रूप से लिया और अपने खेल कौशल को लगातार बेहतर किया।

नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन

पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में सपना शर्मा ने सभी प्रतियोगियों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में देश भर से कई शीर्ष पैरा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन सपना की रणनीति, फुर्ती और मानसिक दृढ़ता ने उन्हें सबसे आगे रखा।

प्रतियोगिता के दौरान सपना ने अपनी हर मुहिम को पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया। उनका वार्म-अप, तकनीकी अभ्यास और मैच रणनीति इतनी प्रभावशाली थी कि निर्णायक मुकाबलों में उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को कोई मौका नहीं दिया। उनके कोच और टीम के मेंटर्स ने भी उनके अनुशासन और खेल भावना की सराहना की।

चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन

Indore इस जीत के साथ सपना शर्मा चार बार की नेशनल चैंपियन बन गई हैं। उनकी लगातार सफलता ने पैरा ताइक्वांडो के खेल में उनके दबदबे को साबित किया है। उन्होंने यह दिखा दिया है कि अगर लगन, मेहनत और धैर्य साथ हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

सपना के इस रिकॉर्ड ने नए खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणा पैदा की है। युवा खिलाड़ी अब उनके कदमों का अनुसरण करते हुए अपने खेल में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि खेल में निरंतरता और मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।

परिवार और कोचिंग का योगदान

सपना की सफलता केवल उनके अथक प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि उनके परिवार और कोचिंग स्टाफ के समर्थन का भी प्रतिफल है। उनके परिवार ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया और मुश्किल समय में भी उनका हौसला बढ़ाया। कोचों ने तकनीकी प्रशिक्षण, मानसिक तैयारी और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया, जिससे सपना ने हर मुकाबले में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कोच ने बताया, “सपना एक अनुशासित खिलाड़ी हैं। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें नेशनल स्तर पर लगातार सफलता दिलाई है। वह न केवल खेल में बल्कि जीवन में भी दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”

पैरा खेलों में बढ़ता ध्यान

सपना शर्मा की उपलब्धि ने पैरा खेलों की ओर देश और राज्य दोनों में ध्यान खींचा है। पैरा ताइक्वांडो जैसे खेलों में दिव्यांग खिलाड़ियों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम को उचित मंच मिलना जरूरी है। उनकी सफलता से यह साफ संदेश गया है कि पैरा खेलों में भी उतनी ही मेहनत, उत्साह और प्रतिस्पर्धा होती है जितनी सामान्य खेलों में।

सपना की जीत ने यह भी साबित किया है कि दिव्यांगता खेलों में बाधा नहीं बन सकती। उनके साहस और लगन ने साबित किया कि पैरा खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

सपनों की उड़ान और भविष्य की योजना

सपना शर्मा अब भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का लक्ष्य रख रही हैं। उनका उद्देश्य देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करना है। उन्होंने कहा, “मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि मैं अपनी सीमाओं को पार कर सकूँ और देश के लिए गर्व का कारण बन सकूँ। हर चुनौती एक नई सीख है और मैं अपने खेल में निरंतर सुधार करती रहूँगी।”

सपना का यह दृष्टिकोण उन्हें और भी ऊँचाइयों तक पहुंचाएगा। उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति जुनून उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी सफलता दिलाने में मदद करेगा।

निष्कर्ष

Indore की बेटी सपना शर्मा ने पैरा ताइक्वांडो में लगातार चौथा नेशनल गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी सफलता न केवल उनके लिए बल्कि मध्य प्रदेश और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने साबित कर दिया कि दिव्यांगता कभी भी किसी के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।

सपना शर्मा की मेहनत, समर्पण और साहस से नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल रही है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वह न केवल पैरा ताइक्वांडो में बल्कि भारतीय खेलों में एक प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं।

 

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