Indore में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में अव्यवस्था: किसानों को न पानी, न भोजन, सिर्फ दिखावे की व्यवस्था
Indore लक्ष्मीबाई नगर अनाज मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू होते ही व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। सरकार और प्रशासन जहां मंचों से चाक-चौबंद व्यवस्था के दावे कर रहे थे, वहीं जमीनी हकीकत बेहद अलग और चिंताजनक नजर आई। किसानों के लिए न तो पीने के पानी की उचित व्यवस्था थी और न ही भोजन की सुविधा। केवल दिखावे के लिए कुछ स्थानों पर कुर्सियां और बोर्ड लगाए गए थे, जबकि वास्तविक सुविधाएं नदारद थीं।
गुरुवार को जब किसानों ने अपनी उपज लेकर मंडी में पहुंचना शुरू किया तो उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से लेकर दोपहर तक किसान अपनी ट्रालियों के साथ कतार में खड़े रहे, लेकिन पीने के पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। जहां पानी उपलब्ध कराने का बोर्ड लगाया गया था, वहां या तो पानी नहीं था या फिर मटके खुले में ठेले पर रखे हुए थे, जिससे स्वच्छता पर भी सवाल उठे।
दिखावे की बैठक व्यवस्था, सिर्फ 5 कुर्सियां
Indore मंडी परिसर में प्रशासन की ओर से “बैठक व्यवस्था” का बोर्ड लगाया गया था, लेकिन मौके पर सिर्फ पांच कुर्सियां ही रखी हुई थीं। किसानों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था बेहद अपर्याप्त थी। कई किसान जमीन पर बैठने या खड़े रहने को मजबूर रहे। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि नेताओं के आने से पहले सब कुछ ठीक दिखाया जाता है, लेकिन उनके जाने के बाद हालात जस के तस रह जाते हैं।
कैंटीन का उद्घाटन, लेकिन भोजन नदारद
मंडी परिसर में प्रशासन ने किसानों के लिए एक कैंटीन भी स्थापित की थी, जिसमें 5 रुपये में भोजन देने की बात कही गई थी। लेकिन वास्तविकता यह थी कि कैंटीन में न तो खाना था, न चाय और न ही नाश्ता। काउंटर पर रखी सभी सामग्री खाली पाई गई। यहां तक कि कढ़ाही में तेल तक मौजूद नहीं था।
कर्मचारियों ने बताया कि कैंटीन का संचालन करने वाला व्यक्ति मौजूद नहीं है, इसलिए भोजन तैयार नहीं हो सका। बाद में मंडी सचिव मौके पर पहुंचे और उन्होंने कैंटीन संचालक को निर्देश दिया कि धीरे-धीरे भोजन तैयार किया जाए।
शिकायत भोपाल पहुंची तो पहुंचे अधिकारी
किसानों की समस्याओं और अव्यवस्थाओं की शिकायत जब भोपाल तक पहुंची, तब मंडी सचिव आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का निरीक्षण किया और कर्मचारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। लेकिन इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर शिकायत करने वालों पर नाराजगी भी जताई।
मंडी सचिव ने कर्मचारियों से कहा कि झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद मंडी परिसर में मौजूद लोगों के बीच असंतोष और बढ़ गया।
पहले दिखाया गया सब ठीक, बाद में खुली पोल
सूत्रों के अनुसार, एक दिन पहले ही कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मंडी पहुंचे थे। उस समय उन्हें पूरी व्यवस्था “चाक-चौबंद” दिखाने की कोशिश की गई थी। लेकिन उनके जाने के बाद असल स्थिति सामने आ गई।
किसानों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए व्यवस्थाएं करता है, जबकि वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। पीने के पानी से लेकर बैठने और खाने तक की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं।
किसानों की नाराजगी बढ़ी
किसानों ने बताया कि वे सुबह से भूखे-प्यासे कतारों में खड़े हैं। कई किसान दूर-दराज से ट्रैक्टर-ट्रालियों में उपज लेकर आए हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। इससे किसानों में नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है।
कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मटकों में खुले में रखा गया पानी पीने लायक नहीं है, जिससे स्वास्थ्य पर खतरा हो सकता है।
व्यवस्था सुधार के दावे, लेकिन सवाल बरकरार
मंडी सचिव ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए और कर्मचारियों से कहा कि धीरे-धीरे भोजन और पानी की व्यवस्था की जाए। लेकिन किसानों का कहना है कि यह सब केवल कागजी और अस्थायी प्रयास हैं।
किसानों ने मांग की है कि खरीद केंद्रों पर स्थायी और स्वच्छ व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े।
निष्कर्ष
Indore की लक्ष्मीबाई नगर मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान सामने आई अव्यवस्थाएं प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जहां एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो किसानों का असंतोष और बढ़ सकता है।
