Indore Water Pipeline Leakage ने इंदौर की पेयजल व्यवस्था को संकट में डाल दिया है। 50 साल पुरानी पाइपलाइन, लीकेज, मिक्स सप्लाई और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी से शहर में दूषित पानी की आशंका बढ़ती जा रही है।
Indore Water Pipeline Leakage: जर्जर लाइनों पर टिका शहर का जीवन
Indore Water Pipeline Leakage अब सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि शहर की सेहत और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है। देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था भीतर ही भीतर खोखली हो चुकी है। नगर निगम के अमृत-2 योजना के तहत कराए गए अध्ययन ने जो तस्वीर सामने रखी है, वह चौंकाने वाली है।
करीब 3,500 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइन में से 650 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा पूरी तरह जर्जर हो चुका है, लेकिन इन्हीं लाइनों के भरोसे शहर की प्यास बुझाई जा रही है।
50 साल पुरानी पाइपलाइनें बनी सबसे बड़ी कमजोरी
शहर के कई हिस्सों में ऐसी पाइपलाइनें आज भी चालू हैं, जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है। लोहे और कास्ट आयरन की ये लाइनें अब जगह-जगह से कमजोर हो चुकी हैं। समय के साथ इनकी मोटाई कम हो गई, जोड़ ढीले पड़ गए और मिट्टी के दबाव से इनमें दरारें आ गईं।
यही कारण है कि Indore Water Pipeline Leakage की घटनाएं अब रोजमर्रा की बात बन चुकी हैं।
40% लाइन लॉस: पानी बह रहा, सिस्टम खामोश
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि शहर में कुल लाइन लॉस 15 से 17 प्रतिशत बताया जाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से करीब 40 प्रतिशत नुकसान शहरी वितरण पाइपलाइनों में ही हो रहा है।
यानी पानी नर्मदा से शहर तक पहुंच तो रहा है, लेकिन लोगों के नलों तक पहुंचने से पहले ही बह जाता है या जमीन में रिस जाता है।
तकनीकी स्टाफ की भारी कमी, व्यवस्था भगवान भरोसे
जल वितरण जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी फिलहाल ऐसे सिस्टम के भरोसे है, जिसमें तकनीकी दक्षता सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है।
-
नर्मदा परियोजना से जुड़े पीएचई विभाग में
-
सिर्फ 10% कर्मचारी तकनीकी रूप से दक्ष
-
आवश्यकता: 32 इंजीनियर
-
उपलब्ध: सिर्फ 4 इंजीनियर
टंकियों और मैदानी स्तर पर भी केवल 20% तकनीकी कर्मचारी ही मौजूद हैं। बाकी पूरा सिस्टम मस्टर कर्मियों और निजी एजेंसियों के सहारे चल रहा है।
मिक्स सप्लाई वाले इलाके बने हाई-रिस्क जोन
Indore Water Pipeline Leakage का असर कुछ इलाकों में ज्यादा खतरनाक रूप ले चुका है। यहां पीने के पानी में सीवरेज के दूषित तत्व मिलने की आशंका लगातार बनी रहती है।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र:
- जूनी इंदौर
- जूना रिसाला
- मिल क्षेत्र
- जबरन कॉलोनी
- आज़ाद नगर
- मूसाखेड़ी
- भागीरथपुरा
- लाबरिया भेरू
- चंदननगर
- बाणगंगा के कई हिस्से
इन इलाकों में मिक्स सप्लाई की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

