इंदौर विश्वविद्यालय में जैनालाजी कोर्स का शुभारंभ, जैन धर्म और संस्कृति को मिलेगा नया आयाम
इंदौर: इंदौर विश्वविद्यालय में जैन धर्म, जैन संस्कृति और जैनालाजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महानगर इंदौर के लिए यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय द्वारा अथक प्रयासों के बाद जैन धर्म और संस्कृति से जुड़े कई कोर्स अब शुरू किए जा रहे हैं। धर्म और समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इन कोर्सों का उद्देश्य जैन धर्म के गहन अध्ययन और जैन संस्कृति के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
यह कार्यक्रम 13 अक्टूबर 2025 सोमवार, प्रातः 10 बजे, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय आडिटोरियम, खंडवा रोड पर आयोजित किया जाएगा। इस शुभारंभ अवसर पर माननीय मंत्रीजी, कई वरिष्ठ IAS अधिकारी, और इंदौर विश्वविद्यालय के कुलगुरू की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न होगा।
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों के व्याख्यान की श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी। इसमें शामिल हैं:
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डॉ. संगीता दिलीप मेहता, इंदौर
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डॉ. नलीन शास्त्री, दिल्ली
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डॉ. ऋषभ फोजदार, दमोह
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डॉ. रजनीश जैन, इंदौर
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कुलगुरू राकेश सिंघई, इंदौर विश्वविद्यालय
ये विशेषज्ञ जैन धर्म, जैन संस्कृति और जैनालाजी के विभिन्न पहलुओं पर गहन जानकारी साझा करेंगे और छात्रों तथा आम जनता को जैन धर्म की समृद्ध विरासत से परिचित कराएंगे।
इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी, टीके वेद हंसमुख गांधी, मन्यक जैन, नरेंद्र वेद, सुशील पांड्या और फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, श्रीमती रेखा जैन श्रीफल, तथा महिला परिषद् की चेयर पर्सन श्रीमती मुक्ता जैन ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण क्षण है।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल छात्रों को जैन धर्म और जैनालाजी का अकादमिक ज्ञान प्रदान करना है, बल्कि समाज में जैन संस्कृति और धार्मिक मूल्य को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में अहिंसा, साधना, संयम और समाज सेवा की जो परंपरा रही है, उसे नए पीढ़ी तक पहुँचाने में यह कोर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर जैन समाज के विभिन्न वर्गों के लोग और अन्य समुदाय के सदस्य भी आमंत्रित हैं। आयोजक सभी जैन भाई-बहनों से आग्रह कर रहे हैं कि वे इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर जैन संस्कृति और धर्म के संरक्षण में योगदान दें।
इंदौर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि यह कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगा, जो जैन धर्म, दर्शन, साहित्य, कला और संस्कृति के गहन अध्ययन में रुचि रखते हैं। इसमें जैन ग्रंथों का अध्ययन, धार्मिक अनुष्ठान, और जैन संस्कृति के ऐतिहासिक पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस कोर्स के शुभारंभ से इंदौर शहर में जैन धर्म और संस्कृति के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी। साथ ही, यह पहल अन्य विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनेगी, ताकि देशभर में जैनालाजी और जैन धर्म के अध्ययन को और मजबूत किया जा सके।
जैन समाज की प्रतिष्ठित हस्तियों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक प्रयासों से जैन संस्कृति, धार्मिक परंपराएं, और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही युवा पीढ़ी जैन धर्म और दर्शन के महत्व को समझ पाएगी और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाएगी।
अतः सभी जैन भाई-बहनों और अन्य समुदायों के सदस्यों से प्रार्थना है कि वे 13 अक्टूबर 2025 को प्रातः 10 बजे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय आडिटोरियम में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित हों और इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनें।
इस शुभारंभ कार्यक्रम के माध्यम से इंदौर विश्वविद्यालय ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय समाज के विकास के लिए आवश्यक है। जैनालाजी कोर्स के माध्यम से न केवल जैन धर्म के अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक जागरूकता को भी मजबूती मिलेगी।
