Indore-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड: 20 गांवों की बदलेगी तस्वीर, 662 किसानों को ₹626 करोड़ मुआवजा
Indore और उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड सड़क परियोजना अब जमीन पर तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है। इस महत्वाकांक्षी 48 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे इंदौर जिले के करीब 20 गांवों और उज्जैन जिले के 8 गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस परियोजना के तहत कुल 313.839 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें से लगभग 292.523 हेक्टेयर भूमि निजी और 21.326 हेक्टेयर भूमि शासकीय है। परियोजना से जुड़े 662 किसानों को अब तक 626 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि सिर्फ सांवेर तहसील में ही 95 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं।
129 किसानों को मिला पहला बड़ा भुगतान
सांवेर क्षेत्र में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। यहां कुल 414 प्रभावित किसानों में से 129 किसानों को 95 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एसडीएम राकेश मोहन त्रिपाठी के अनुसार, जिन गांवों में मुआवजा दिया जा रहा है, वहां साथ ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाई जा रही है ताकि परियोजना में देरी न हो।
मुआवजा राशि में बड़ा बदलाव
शुरुआत में इस परियोजना के लिए 484.140 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी, लेकिन किसानों के विरोध और बेहतर मुआवजे की मांग के बाद सरकार ने ‘सेल डीड एनालिसिस’ प्रक्रिया अपनाई। इसके बाद मुआवजा राशि में बड़ा संशोधन किया गया और इसे बढ़ाकर 583.935 करोड़ रुपये कर दिया गया।
इस बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को बाजार मूल्य के करीब मुआवजा देना और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारू बनाना है।
सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य
Indore के पितृ पर्वत के पास से शुरू होकर उज्जैन तक बनने वाली यह सड़क सिंहस्थ 2028 से पहले पूरी करने का लक्ष्य लेकर बनाई जा रही है। यह परियोजना धार्मिक, आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह दोनों शहरों के बीच आवागमन को तेज और सुगम बनाएगी।
डिजाइन में बड़ा बदलाव: अब नॉन-एक्सेस कंट्रोल्ड रोड
शुरुआत में इस सड़क को एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में बनाया जाना था, जिसमें सर्विस रोड भी शामिल थी। लेकिन किसानों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद इसमें बदलाव करते हुए इसे नॉन-एक्सेस कंट्रोल्ड सड़क में बदल दिया गया है।
इस बदलाव के बाद सड़क को जमीन की सतह पर ही बनाया जाएगा, जिससे किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में किसी तरह की बाधा नहीं होगी। साथ ही, सड़क के दोनों ओर प्रस्तावित सात-सात मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी अब नहीं बनाई जाएगी।
इस फैसले से ग्रामीणों को राहत मिली है क्योंकि अब वे अपनी कृषि भूमि तक सीधे पहुंच सकेंगे और जल निकासी की समस्या भी कम होगी।
परियोजना की लागत और निर्माण एजेंसी
इस ग्रीन फील्ड रोड परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत बनाया जा रहा है। सरकार ने सितंबर 2025 में इसके लिए 2935 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।
निर्माण कार्य के लिए मेसर्स सीगल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुबंध दिया गया है, जिसने लगभग 1089 करोड़ रुपये की बोली लगाकर परियोजना का ठेका प्राप्त किया है।
20 गांवों पर पड़ेगा सीधा असर
इस परियोजना से इंदौर और उज्जैन के कुल 28 गांव सीधे प्रभावित होंगे। इंदौर जिले के जिन प्रमुख गांवों से यह सड़क गुजरेगी उनमें बुढ़ानिया, हातोद, सगवाल, कांकरिया बोडिया, जंबूड़ी सरवर, रतनखेड़ी, बीबी खेड़ी, पिपलिया कायस्थ, हरियाखेड़ी, पोटलोद, चित्तौड़ा और रालामंडल जैसे गांव शामिल हैं।
इन गांवों में जमीन अधिग्रहण के साथ-साथ तेजी से विकास कार्यों के भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
ग्रामीणों और किसानों की उम्मीदें
इस परियोजना को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में मिश्रित प्रतिक्रिया है। एक ओर जहां मुआवजा मिलने से आर्थिक राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग भूमि खोने को लेकर चिंतित भी हैं।
हालांकि अधिकांश ग्रामीण मानते हैं कि इस सड़क के बनने से इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा आसान होगी, व्यापार बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
निष्कर्ष
Indore-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड परियोजना मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह परियोजना अब वास्तविक रूप से आकार ले रही है।
यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि इंदौर और उज्जैन के आर्थिक विकास में भी एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
