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इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर: 28 गांवों की जमीन अधिग्रहण, 650 किसान प्रभावित, जानें मुआवजा और पूरी डिटेल

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Published On: 27 November 2025
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इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर: भूमि अधिग्रहण से लेकर मुआवजा तक, जानिए हर जानकारी

इंदौर और उज्जैन के बीच तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का सपना साकार होने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के चलते इंदौर जिले के 20 और उज्जैन जिले के 8 गांवों की कुल लगभग 175 हेक्टेयर से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जिससे दोनों जिलों के लगभग 650 किसान प्रभावित होंगे। यह परियोजना न केवल यात्रा के समय में कमी लाएगी, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक और पर्यटन विकास को एक नई दिशा देगी।

आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि यह ग्रीन फील्ड कॉरिडोर क्या है, कितनी जमीन अधिग्रहित होगी, प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की क्या प्रक्रिया है, और इसके निर्माण से region पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

ग्रीन फील्ड कॉरिडोर क्या है और यह इंदौर-उज्जैन के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर ऐसी परियोजना होती है जिसे पूरी तरह से नए सिरे से, बिना किसी मौजूदा ढांचे या बाधाओं के, डिजाइन और निर्मित किया जाता है। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच एक ऐसा ही नया, चौड़ा, high-speed एक्सप्रेसवे तैयार करना है।

वर्तमान में, इंदौर से उज्जैन की यात्रा में लगभग दो घंटे का समय लगता है। यह ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनने के बाद यह यात्रा का समय घटकर मात्र 45 मिनट से एक घंटे के बीच रह जाएगा। यह सिर्फ समय की बचत नहीं, बल्कि ईंधन की खपत में कमी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, और यात्रा के अनुभव को और सुगम बनाने जैसे कई फायदे साथ लाएगा।

विशेष रूप से, इंदौर के देवी अहिल्या बाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उज्जैन आने-जाने वाले पर्यटकों और व्यवसायियों को इससे सबसे अधिक लाभ मिलेगा। उज्जैन, महाकालेश्वर मंदिर और सिंहस्थ कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

किन गांवों की जमीन हो रही है अधिग्रहित? पूरी लिस्ट और आंकड़े

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा-19 का प्रकाशन कर दिया है। इस नोटिफिकेशन में अधिग्रहित की जाने वाली सभी जमीनों का विवरण, उनके मालिकों के नाम और रकबे की पूरी जानकारी सार्वजनिक की गई है।

इंदौर जिले का विवरण:
इंदौर जिले में यह अधिग्रहण मुख्य रूप से दो तहसीलों – सांवेर और हातोद में होगा।

  • सांवेर तहसील: इस तहसील के 20 गांवों में फैले कुल 99.992 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। यह जमीन लगभग 395 किसानों की निजी और सिंचित भूमि है। सांवेर तहसील से अधिग्रहण की जाने वाली जमीन का रकबा सबसे अधिक है।

  • हातोद तहसील: हातोद तहसील के गांवों की लगभग 75.401 हेक्टेयर जमीन इस परियोजना का हिस्सा बनेगी। इससे तहसील के लगभग 255 किसान प्रभावित होंगे।

इस प्रकार, केवल इंदौर जिले से ही कुल 175.393 हेक्टेयर जमीन ली जा रही है और 650 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

उज्जैन जिले का विवरण:
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उज्जैन जिले के भी आठ गांवों की भूमि का अधिग्रहण इस ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए किया जाना है। हालांकि, उज्जैन जिले के लिए अभी धारा-19 का प्रकाशन और विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इंदौर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उज्जैन में भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी।

भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया: धारा-19 से लेकर मुआवजा तक

भूमि अधिग्रहण एक संवेदनशील मामला है, और सरकार इसके लिए एक स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन करती है।

  1. धारा-19 का प्रकाशन (Section 19 Notification): यह पहला बड़ा कदम है। इस नोटिफिकेशन के जरिए सरकार आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करती है कि किस सार्वजनिक उद्देश्य के लिए कितनी और कहां की जमीन की जरूरत है। इसमें जमीन के मालिकों के नाम और जमीन का ब्यौरा शामिल होता है ताकि कोई विवाद न हो। सांवेर के एसडीएम घनश्याम धनगर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, *“ग्रीन फील्ड कॉरिडोर योजना के लिए धारा-19 का प्रकाशन कर दिया गया है। इसमें किसानों के नाम और योजना में आ रही भूमि की जानकारी सार्वजनिक की गई है।”*

  2. जमीन का सर्वे और मूल्यांकन: धारा-19 के प्रकाशन के बाद, राजस्व विभाग की टीम प्रभावित भूमि का विस्तृत सर्वेक्षण करेगी। इस सर्वे में निम्नलिखित बातों को आधार बनाया जाएगा:

    • जमीन की प्रकृति: जमीन कृषि योग्य है या बंजर? सिंचित है या असिंचित?

    • स्थान: जमीन मुख्य सड़क के कितनी करीब है?

    • गाइडलाइन मूल्य: उस क्षेत्र का औसत रजिस्ट्री रेट (गाइडलाइन वैल्यू) क्या है?

    • फसल का मूल्य: अगर जमीन पर खड़ी फसल है, तो उसका मुआवजा भी तय होगा।

  3. मुआवजा राशि का निर्धारण और हस्तांतरण: सर्वे और मूल्यांकन के आधार पर प्रत्येक भू-स्वामी के लिए मुआवजे की अंतिम राशि तय की जाएगी। सरकार की कोशिश होती है कि मुआवजा भूमि के बाजार मूल्य के बराबर या उससे अधिक हो। इस राशि को सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाती है ताकि किसानों को न्याय मिल सके।

प्रभावित किसानों की चुनौतियां और सरकार की जिम्मेदारी

इसमें कोई संदेह नहीं है कि जमीन का अधिग्रहण किसानों के लिए एक भावनात्मक और आर्थिक रूप से कठिन समय लेकर आता है। जमीन सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों की विरासत और आजीविका का स्रोत होती है। लगभग 650 किसानों के सामने पुनर्वास और भविष्य की योजना बनाने की चुनौती है।

सरकार की जिम्मेदारी है कि:

  • उचित और त्वरित मुआवजा: मुआवजे की राशि का भुगतान बिना किसी देरी के किया जाए।

  • पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और किसानों की हर शंका का समाधान किया जाए।

  • पुनर्वास: कुछ मामलों में, सिर्फ मौद्रिक मुआवजे के अलावा पुनर्वास की योजनाएं भी तैयार की जाती हैं।

  • वैकल्पिक रोजगार: कृषि भूमि खो चुके किसानों को अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करना।

निष्कर्ष: विकास और न्याय के बीच संतुलन जरूरी

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर निस्संदेह मालवा क्षेत्र के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह infrastructure project कनेक्टिविटी बढ़ाकर व्यापार, निवेश और पर्यटन के नए द्वार खोलेगा। हालांकि, इस विकास की राह में जिन 650 किसानों की जमीन जा रही है, उनके हितों और भविष्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

एक सफल परियोजना वह है जो न केवल ठोस इमारतें खड़ी करे, बल्कि लोगों का विश्वास और समर्थन भी जीते। प्रशासन की ओर से शुरू की गई पारदर्शी प्रक्रिया एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। अब यह देखना होगा कि मुआवजे की प्रक्रिया कितनी न्यायसंगत और तेज होती है। यदि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और सम्मान मिलता है, तो यह ग्रीन फील्ड कॉरिडोर न केवल इंदौर-उज्जैन के बीच की दूरी, बल्कि सरकार और जनता के बीच के विश्वास को भी मजबूत करेगा।

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