मध्यप्रदेश में बनेगा रीजनल मेडिकल हब, Indore-Ujjain कॉरिडोर को मिला सबसे उपयुक्त विकल्प,
भोपाल में आयोजित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन वर्कशॉप के दौरान मध्यप्रदेश में विशेष रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप देश में पांच रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश को भी प्रमुख स्थान मिलने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशन में राज्य सरकार ने इस दिशा में औपचारिक और तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाना, मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
Indore-Ujjain कॉरिडोर को बताया गया सबसे उपयुक्त स्थान
वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से माना कि इस विशेष रीजनल मेडिकल हब के लिए इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर सबसे उपयुक्त क्षेत्र है।
इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसका मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सड़क, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी है। इंदौर पहले से ही एजुकेशन और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित शहर है, जबकि उज्जैन धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर और ओंकारेश्वर जैसे ज्योतिर्लिंगों के कारण यह क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि इस मेडिकल हब का मुख्य उद्देश्य विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और किफायती इलाज उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की चिकित्सा क्षमता को वैश्विक पहचान मिलेगी और देश मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत मेडिकल टूरिज्म और वेलनेस सेक्टर में मजबूत स्थिति में है, लेकिन इस परियोजना से इसमें और अधिक तेजी आएगी। खासकर मध्य एशिया, अफ्रीका और यूरोपीय देशों से मरीज भारत में इलाज के लिए आ सकते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा में वृद्धि होगी और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।
रोजगार के नए अवसरों का होगा विस्तार
सरकार का मानना है कि रीजनल मेडिकल हब बनने से प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। अस्पताल, नर्सिंग, फार्मेसी, आयुष और मेडिकल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में हजारों रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे।
इसके साथ ही होटल इंडस्ट्री, टूरिज्म सेक्टर और हेल्थ इंश्योरेंस क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे। इस परियोजना से केवल स्वास्थ्य सेवाएं ही नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आयुष और वेलनेस सिस्टम पर भी विशेष जोर
वर्कशॉप में यह भी चर्चा हुई कि आधुनिक एलोपैथी चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष सेवाओं और वेलनेस सेंटरों का विस्तार जरूरी है, जिससे लोगों को समग्र स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है और इसे और मजबूत किया जा रहा है।
इंदौर में पहले से मजबूत है हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर
वर्कशॉप में बताया गया कि इंदौर पहले से ही एक विकसित हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर वाला शहर है। यहां सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, निजी मेडिकल संस्थान और आधुनिक तकनीक आधारित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट, जटिल सर्जरी और इमरजेंसी मेडिकल सेवाएं भी अब स्थानीय स्तर पर सफलतापूर्वक की जा रही हैं, जिससे इस क्षेत्र की क्षमता और मजबूत होती है।
विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों की अहम भागीदारी
इस वर्कशॉप में स्वास्थ्य, पर्यटन, होटल इंडस्ट्री और मेडिकल सेक्टर से जुड़े कई विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए और इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि अगले तीन महीनों के भीतर एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी, जो रीजनल मेडिकल हब का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करेगी और आगे की कार्ययोजना तय करेगी।
भविष्य की बड़ी परियोजना की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश
अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना मध्यप्रदेश को मेडिकल टूरिज्म के वैश्विक नक्शे पर स्थापित कर सकती है। यदि यह योजना सफल होती है तो राज्य न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक विकास में भी नई ऊंचाइयों को छूएगा।
Indore-Ujjain कॉरिडोर इस परियोजना का केंद्र बनकर उभर सकता है, जो आने वाले वर्षों में पूरे देश के लिए एक मॉडल हेल्थ सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में प्रस्तावित रीजनल मेडिकल हब केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह योजना स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और अर्थव्यवस्था—चारों क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है।
सरकार की यह पहल मध्यप्रदेश को एक नए युग की ओर ले जा सकती है, जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक वेलनेस सिस्टम मिलकर एक वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण करेंगे।
