Indore Swachh Survekshan में बैकलेन पर फोकस, 200 अंक होंगे निर्णायक
4500 से अधिक बैकलेन की सफाई और सुंदरता पर टिकी है इंदौर की स्वच्छता रैंकिंग
इंदौर, जो लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने का गौरव हासिल करता आ रहा है, इस बार Swachh Survekshan में एक नए मानक के साथ फिर से परीक्षा के दौर में है। इस बार बैकलेन की स्वच्छता और सुंदरता पर 200 महत्वपूर्ण अंक निर्धारित किए गए हैं, जो शहर की रैंकिंग तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
नगर निगम और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से इंदौर ने अब तक 4500 से अधिक बैकलेन की पहचान की है, जिनमें से 3000 से ज्यादा को आदर्श और स्वच्छ स्वरूप दिया जा चुका है।
बैकलेन बने स्वच्छता का नया मॉडल
इंदौर में पहले जिन बैकलेन को गंदगी और कचरे के लिए जाना जाता था, वे अब स्वच्छता और नवाचार का उदाहरण बन चुके हैं।
कई बैकलेन में अब साफ-सफाई के साथ-साथ खेल गतिविधियां, पेंटिंग और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। यहां तक कि कई जगहों पर पोहा पार्टी जैसे स्थानीय आयोजन भी हो रहे हैं, जिससे लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण टीम का दौरा जल्द
स्वच्छ सर्वेक्षण टीम के मई के अंतिम सप्ताह में इंदौर पहुंचने की संभावना है। टीम शहर में केवल मुख्य सड़कों की नहीं बल्कि बैकलेन की भी विस्तृत जांच करेगी।
टीम यह देखेगी कि जिन बैकलेन को मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, क्या वे वास्तव में स्वच्छ और व्यवस्थित बने हुए हैं या फिर वहां दोबारा गंदगी फैलने लगी है।
200 अंकों की अहम भूमिका
इस बार स्वच्छता रैंकिंग में बैकलेन के लिए 200 अंक तय किए गए हैं, जो इंदौर की स्थिति को मजबूत या कमजोर करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यदि इन बैकलेन को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखा गया तो इंदौर अपनी नंबर वन की स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
नगर निगम की बड़ी पहल
नगर निगम ने अब तक हजारों बैकलेन को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सफलता हासिल की है। इन स्थानों पर न केवल सफाई की गई है बल्कि दीवारों पर पेंटिंग, हरियाली और सजावटी कार्य भी किए गए हैं।
नगर निगम का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासन की नहीं बल्कि नागरिकों की भागीदारी से संभव हुआ है।
जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
इंदौर की स्वच्छता का सबसे बड़ा आधार यहां के नागरिकों की भागीदारी है। लोगों ने अपने स्तर पर बैकलेन को अपनाया और उन्हें साफ रखने में योगदान दिया।
कई स्थानों पर स्थानीय निवासियों ने स्वयं निगरानी की जिम्मेदारी भी ली है ताकि कोई भी कचरा दोबारा न डाला जाए।
अब चुनौती: स्वच्छता बनाए रखना
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती बनाई गई स्वच्छता को बनाए रखना है।
यदि बैकलेन में दोबारा कचरा या गंदगी फैलती है, तो इसका असर सीधे स्वच्छ सर्वेक्षण के अंकों पर पड़ेगा।
टीम करेगी बारीकी से जांच
स्वच्छ सर्वेक्षण टीम यह भी जांच करेगी कि क्या नागरिक वास्तव में इन बैकलेन का उपयोग साफ-सुथरे तरीके से कर रहे हैं या नहीं।
टीम यह भी देखेगी कि नगर निगम द्वारा किए गए नवाचार कितने प्रभावी और टिकाऊ हैं।
इंदौर की प्रतिष्ठा दांव पर
लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता में नंबर वन रहने वाला इंदौर इस बार भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए प्रयासरत है।
शहर के लिए यह केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि अपनी पहचान बनाए रखने की चुनौती है।

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