इंदौर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव में भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पार्श्वनाथ जैन मंदिर में भव्य कलशारोहण और ध्वजारोहण सम्पन्न।
इंदौर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव
परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी और आचार्य सुलभ सागर जी महाराज के आशीर्वाद से तथा श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज (ससंघ) के मंगल सानिध्य में यह आयोजन सम्पन्न हुआ।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू के अनुसार यह आयोजन इंदौर के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
भव्य शोभायात्रा का दृश्य
इंदौर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत छोटा बांगड़दा से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।
जयकारों के बीच जब पांच जिनवर भगवान की प्रतिमाओं का रथ निकला, तो श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था।
श्रावक-श्राविकाएं केसरिया वस्त्रों में नृत्य करते हुए प्रभु की अगवानी कर रहे थे। मार्ग में जगह-जगह समाज जनों ने पाद-प्रक्षालन और आरती कर मुनि संघ का स्वागत किया।
यह दृश्य न केवल भक्ति से परिपूर्ण था बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक ऊर्जा का प्रतीक भी था।
मंदिर पहुंचने पर भावविभोर करने वाला दृश्य
जब शोभायात्रा वेदांश स्कूल मार्ग से होते हुए विद्या पैलेस जिनालय पहुंची, तो वहां का वातावरण अत्यंत भावुक और दिव्य हो गया।चांदी की थालियों से मुनि संघ का पाद प्रक्षालन किया गया, जो श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था।श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
कलशारोहण और ध्वजारोहण की दिव्यता
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के शिखर पर कलशारोहण और ध्वजारोहण की मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं।जैसे ही मंदिर की चोटी पर धर्म ध्वजा लहराई, पूरा परिसर “जय पार्श्वनाथ” और“आदित्य सागर गुरुवर की जय”के नारों से गूंज उठा।यह क्षण उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय रहा।
प्रमुख लाभार्थी और सहभागी
इस इंदौर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य लाभार्थी रहे:
- श्री मयंक मयूर मुकेश जी झिरीवाल परिवार
- श्री अशोक जी राणा परिवार
- श्री राहुल सावला परिवार
शिखर कलश का पुण्य अर्जन झिरीवाल परिवार द्वारा तथा ध्वजा स्थापना का पुण्य अर्जन राणा परिवार द्वारा किया गया।कार्यक्रम में दिगंबर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा सहित राजेश जैन दद्दू, नकुल पटौदी, पिंकेश टोंग्या, टीके वेद, कैलाश वेद और पारस जैन सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक महत्व और संदेश
मंदिर समिति के महामंत्री मयंक जैन ने बताया कि मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद यह ऐतिहासिक क्षण आया है।विधि-विधान के साथ पांच जिनवर भगवान की प्रतिमाओं को वेदी स्थल पर विराजमान किया गया।इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि धर्म, संस्कृति और एकता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाया जा सकता है।
