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“सालाना सांस्कृतिक कैलेंडर और कला व कलाकारों का प्रादेशिक विनियम एक महत्वपूर्ण कदम” — डॉ. भरत शर्मा
Indore । मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं, लोककला, शिल्प और विविध कलात्मक विधाओं को संरक्षित करने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण चर्चा इंदौर में आयोजित की गई। इस अवसर पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य तथा सांस्कृतिक प्रतिनिधि डॉ. भरत शर्मा के बीच विस्तृत संवाद हुआ।
इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों को एक संगठित स्वरूप देना, कलाकारों को अधिक अवसर उपलब्ध कराना तथा इंदौर को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाना रहा।
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक भूमिका पर जोर
डॉ. भरत शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मध्यप्रदेश हमेशा से ही भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। यहां की लोक परंपराएं, संगीत, नृत्य, नाट्य कला और शिल्प न केवल राज्य की पहचान हैं, बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को समृद्ध करती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि इन सभी गतिविधियों को एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाया जाए, ताकि कलाकारों को उनके कार्य के अनुरूप उचित मंच और पहचान मिल सके।
डॉ. शर्मा ने “सालाना सांस्कृतिक कैलेंडर और कला व कलाकारों का प्रादेशिक विनियम” को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आने वाले समय में कला जगत को नई दिशा प्रदान करेगी।
Indore की सांस्कृतिक पहचान और महापौर का दृष्टिकोण
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर केवल एक औद्योगिक या व्यापारिक शहर ही नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत समृद्ध नगर है। यहां की सांस्कृतिक विरासत, लोककला और आधुनिक कला गतिविधियां शहर को एक विशिष्ट पहचान देती हैं।
उन्होंने बताया कि इंदौर घराना, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद और INTACH जैसी संस्थाएं निरंतर रूप से कलाकारों को मंच प्रदान कर रही हैं। इनके माध्यम से स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
महापौर ने यह भी कहा कि इंदौर के ऐतिहासिक स्थल जैसे लालबाग पैलेस, राजबाड़ा और गांधी हॉल केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र भी बनते जा रहे हैं।
इन स्थलों पर आयोजित हेरिटेज वॉक, कला प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक उत्सव और लोक कला कार्यक्रम लोगों में जागरूकता पैदा कर रहे हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रहे हैं।

सांस्कृतिक आयोजनों की बढ़ती भूमिका
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाले प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे मालवा उत्सव, अहिल्या उत्सव और लिटरेचर फेस्टिवल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
इन आयोजनों में देशभर के कलाकारों की भागीदारी होती है, जिससे न केवल स्थानीय कलाकारों को सीखने का अवसर मिलता है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होती है।
डॉ. भरत शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों का विस्तार और नियमितता बेहद आवश्यक है, ताकि कला और संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहे।
सालाना सांस्कृतिक कैलेंडर की आवश्यकता
चर्चा के दौरान यह सुझाव सामने आया कि पूरे वर्ष के लिए एक सांस्कृतिक कैलेंडर तैयार किया जाए, जिसमें सभी प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समयबद्ध योजना हो।
इससे न केवल आयोजन अधिक सुव्यवस्थित होंगे, बल्कि कलाकारों और संस्थाओं को भी पहले से तैयारी करने का अवसर मिलेगा।
महापौर ने इस सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक स्तर पर भी पारदर्शिता और समन्वय बढ़ेगा।
कलाकार विनियम प्रणाली पर चर्चा
बैठक में एक और महत्वपूर्ण विषय “कला व कलाकारों का प्रादेशिक विनियम” रहा। इसके तहत कलाकारों के पंजीकरण, पहचान, चयन प्रक्रिया और मंच उपलब्धता को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने पर जोर दिया गया।
डॉ. भरत शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में कई प्रतिभाशाली कलाकार उचित मंच के अभाव में पीछे रह जाते हैं। यदि एक संगठित प्रणाली विकसित की जाए तो हर कलाकार को उसकी प्रतिभा के अनुसार अवसर मिल सकता है।
Indore को सांस्कृतिक केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर को एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
शहर में नियमित रूप से आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और कला प्रदर्शनियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी इंदौर में आयोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस अवसर पर सुनील पटेल, संघ मुन्ना ठाकुर, पार्षद योगेश गेंदर, रमेश थट्टे, सीडी शुक्ला, अमित गौर एवं जयेश तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने इस पहल का स्वागत किया और इसे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
निष्कर्ष
इंदौर में हुई यह चर्चा केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक दिशा को नई ऊंचाई देने की एक महत्वपूर्ण पहल थी।
“सालाना सांस्कृतिक कैलेंडर और कलाकार विनियम” जैसी अवधारणाएं यदि प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो इससे न केवल स्थानीय कलाकारों को लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।
यह पहल आने वाले समय में मध्यप्रदेश को भारत के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
