बुज़ुर्ग हमारी असली पूँजी: ‘बीइंग रेस्पॉन्सिबल’ डे केयर सेंटर ने पूरे किए तीन गौरवशाली वर्ष
Indore , 28 फरवरी 2026: “यस्य वृद्धाः गृहे नित्यं तस्य तत्र वसति लक्ष्मीः” – जिस घर में बुज़ुर्गों का सान्निध्य होता है, वहाँ सुख और समृद्धि स्वयं निवास करते हैं। इस शास्त्रीय संदेश को आत्मसात करते हुए उत्तर भारत की जानी-मानी संस्था पीआर 24×7 के सीएसआर डिवीजन ‘बीइंग रेस्पॉन्सिबल’ द्वारा संचालित वरिष्ठजन डे केयर सेंटर ने अपने तीन सफल वर्ष पूरे कर लिए।
तीसरी वर्षगाँठ का आयोजन शुभ-लाभ रेसिडेंसी स्थित प्रगति स्थल पर बड़े ही धूमधाम और आत्मीयता के साथ किया गया। यह आयोजन न केवल वरिष्ठजनों के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से की गई। इस अवसर पर मंच पर उपस्थित थे गेस्ट ऑफ ऑनर सीए मनीष अग्रवाल और चीफ गेस्ट डॉ. अतुल मलिकराम, पीआर 24×7 के फाउंडर। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही इस कार्यक्रम की गरिमा और ऊर्जा का संकेत मिल गया।
स्वागत भाषण में गोपाल माहेश्वरी जी ने कहा कि यह सेंटर सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि एक परिवार है। यहाँ वरिष्ठजन अपनापन महसूस करते हैं और अपने हमउम्रों के साथ समय बिताकर खुशियाँ साझा करते हैं।
बुज़ुर्ग: समाज की दिशा दर्शाने वाली शक्ति
सेंट्र के सबसे वरिष्ठ सदस्य आई.आर. कुमार जी ने अपने प्रमुख भाषण में बुज़ुर्गों को समाज की दिशा बताने वाली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने वरिष्ठजनों का सम्मान करता है, वही वास्तविक रूप से आगे बढ़ता है।
उनका मानना है कि बुज़ुर्ग केवल अनुभव और ज्ञान का स्रोत नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सम्मान समारोह और गरिमामयी उपस्थिति
सम्मान समारोह के दौरान अध्यक्ष एवं गेस्ट ऑफ ऑनर सीए मनीष अग्रवाल सहित कार्यकारिणी सदस्य मंच पर उपस्थित रहे:
- आई.आर. कुमार (चेयरमैन)
- नरेशचंद माहेश्वरी (उपाध्यक्ष)
- गोपाल माहेश्वरी (अध्यक्ष)
- आर.डी. खंडेलवाल (सचिव)
- श्रीमती मधुलिका अशोक गुप्ता (कार्यकारिणी सदस्य)
सभी वरिष्ठजनों और विशेष आमंत्रितों को सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान और सशक्तिकरण स्थापित करना सिद्ध हुआ।
संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम में संगीत की मधुर छटा भी बिखरी।
आर.डी. खंडेलवाल जी ने अपनी सुमधुर आवाज़ में गीतों की प्रस्तुति दी, जिसने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। संस्था की ओर से विनीत भट्ट, सुरभि चौरसिया और रोहित ढोलिया ने कार्यक्रम की बागडोर संभाली और सभी गतिविधियों को सहज और सुव्यवस्थित बनाया।
नए संकल्प और विकास की दिशा
तीसरी वर्षगाँठ के अवसर पर सदस्यों की संख्या बढ़ाने, गतिविधियों का विस्तार करने और अधिक वरिष्ठजनों को इस परिवार से जोड़ने जैसे कई संकल्प लिए गए।
डॉ. अतुल मलिकराम ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह पहल सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य है। उनका उद्देश्य है कि सभी वरिष्ठजन अपने घर के अतिरिक्त एक और घर पाएँ, जहाँ वे अपनापन, खुशी और सामाजिक सहभागिता का अनुभव कर सकें।
मनीष अग्रवाल जी ने इसे समाज के लिए प्रेरक मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में सोसाइटी की कार्यकारिणी इस पहल की पूरी सराहना करती है।
आई.आर. कुमार जी ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह सेंटर और भी ऊँचाइयों को छुएगा और शहर के वरिष्ठजनों को उनके अधिकार, सम्मान और सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा।
बच्चों और बुज़ुर्गों में समानता
समापन भाषण में मधुलिका गुप्ता जी ने कहा कि बचपन और बुढ़ापे में एक समानता है – दोनों को सबसे अधिक जरूरत होती है प्यार, साथ और सुनने वाले कानों की। बीइंग रेस्पॉन्सिबल यही माध्यम बन गया है जो इस समानता को महसूस कराता है और वरिष्ठजनों को आत्मनिर्भरता और अपनापन का अनुभव कराता है।
कार्यक्रम का गरिमामय समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
संस्था का शहर में योगदान
‘बीइंग रेस्पॉन्सिबल’ इंदौर में चार डे केयर सेंटर्स संचालित कर रही है। इसके अतिरिक्त, संस्था शहर के अन्य प्रतिष्ठित केंद्रों में भी सक्रिय योगदान दे रही है।
संस्था का मानना है कि बुज़ुर्गों का सम्मान केवल संस्कार नहीं, बल्कि हमारा सौभाग्य है। यही संदेश इस ऊर्जामयी आयोजन ने पूरे शहर को दिया।
वरिष्ठजन डे केयर सेंटर का उद्देश्य
- बुज़ुर्गों के लिए एक सुरक्षित और अपनापन भरा वातावरण प्रदान करना।
- वरिष्ठजनों को सामाजिक और मानसिक सक्रियता का अवसर देना।
- बुज़ुर्गों के अनुभव और ज्ञान का समाज और युवा पीढ़ी के लिए उपयोग सुनिश्चित करना।
- वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, खुशहाली और सामाजिक सहभागिता में वृद्धि।
- समाज में बुज़ुर्गों के सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
समापन टिप्पणी
तीसरी वर्षगाँठ का यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि शहर में बुज़ुर्गों के महत्व और उनके योगदान की सराहना का प्रतीक भी था। वरिष्ठजन डे केयर सेंटर ने यह सिद्ध किया कि बुज़ुर्ग हमारी असली पूँजी हैं और उनके अनुभव और ज्ञान समाज के लिए अमूल्य हैं।
संस्थान के प्रयासों से बुज़ुर्गों को समाज का हिस्सा महसूस होता है और वे नए सिरे से खुशियाँ बाँट सकते हैं। आने वाले वर्षों में इस सेंटर के और अधिक विस्तार और नए कार्यक्रम बुज़ुर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे।
