Indore में 6 हजार प्लॉट धारकों का इंतजार, ₹5.89 करोड़ जमा कराने के बाद भी 32 साल से अटकी स्कीम 171 से मुक्ति
Indore के करीब 6 हजार प्लॉट धारकों के लिए स्कीम 171 का मामला लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की इस योजना में शामिल 13 गृह निर्माण सोसायटियां पिछले करीब 32 वर्षों से योजना से बाहर निकलने का इंतजार कर रही हैं। खास बात यह है कि संबंधित सोसायटियों और अन्य कॉलोनियों की ओर से योजना से मुक्ति के लिए दिसंबर 2024 में करीब 5.89 करोड़ रुपये की राशि भी जमा कराई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक अंतिम राहत नहीं मिल सकी है।
अब एक बार फिर इस मामले में जांच शुरू की गई है। प्रशासन ने संबंधित सोसायटियों के रिकॉर्ड, ऑडिट और सदस्यों की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हजारों प्लॉट धारकों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
13 सोसायटियों की फिर होगी जांच
स्कीम 171 में शामिल 13 सोसायटियों को योजना से बाहर करने की प्रक्रिया पहले भी चल चुकी है, लेकिन अलग-अलग कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब कलेक्टर शिवम वर्मा ने इन सोसायटियों की जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पंवार को सौंपी है।
अपर कलेक्टर ने हाल ही में कलेक्टोरेट में संबंधित सोसायटियों के अध्यक्षों और प्रशासकों के साथ बैठक की। इस बैठक में सामने आया कि ज्यादातर सोसायटियों का ऑडिट कई वर्षों से लंबित है। केवल चार संस्थाओं का ऑडिट अपेक्षाकृत समय पर हुआ है, जबकि बाकी नौ सोसायटियों के रिकॉर्ड अभी भी अधूरे हैं।
प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शेष नौ सोसायटियों को सात दिन के भीतर अपना ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अधिकारियों को मामले की लगातार समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है।
ऑडिट में देरी पर उठे सवाल
सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं के लिए नियमित ऑडिट कराना जरूरी होता है। सामान्य तौर पर हर वर्ष संस्था का ऑडिट किया जाना चाहिए, लेकिन स्कीम 171 से जुड़ी कई सोसायटियों के मामलों में वर्षों से ऑडिट लंबित पाया गया है।
कुछ संस्थाओं का ऑडिट कई साल पीछे चल रहा है। वहीं कुछ सोसायटियों का ऑडिट हाल के वर्षों तक पूरा हुआ है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ऑडिट में इतनी लंबी देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।
मामले में सहकारिता विभाग की भूमिका भी सामने आई है। सोसायटियों में प्रशासक नियुक्त होने के बावजूद कई संस्थाओं का वर्षों तक ऑडिट नहीं हुआ। ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग के अधिकारियों की होती है। इसी वजह से संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सदस्यता और प्लॉट आवंटन की भी होगी जांच
जांच केवल ऑडिट तक सीमित नहीं रहेगी। प्रशासन ने संबंधित सोसायटियों के सदस्यों की वरिष्ठता सूची को भी अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। इसके जरिए यह देखा जाएगा कि वर्तमान में सोसायटियों में कितने सदस्य हैं और किन सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए गए हैं।
साथ ही प्लॉट आवंटन की स्थिति और संस्था के रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि योजना से मुक्ति की प्रक्रिया में सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड सही स्थिति में हैं या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच और ऑडिट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामले को आगे बढ़ाया जा सकेगा। प्रशासन की ओर से इस पूरी प्रक्रिया की लगातार समीक्षा करने की बात कही गई है।
किन सोसायटियों का मामला शामिल है?
स्कीम 171 में शामिल 13 प्रमुख गृह निर्माण सोसायटियों में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था, न्याय विभाग कर्मचारी संस्था, इंदौर विकास गृह निर्माण, मजदूर पंचायत, लक्ष्मण नगर गृह निर्माण, सूर्या गृह निर्माण और मारुति गृह निर्माण सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार कुछ संस्थाओं का ऑडिट वर्ष 2007-08 से 2023-24 के बीच ही हुआ है। वहीं मारुति गृह निर्माण, श्रीकृपा गृह निर्माण, अप्सरा गृह निर्माण और सन्नी गृह निर्माण संस्था का ऑडिट वर्ष 2024-25 तक पूरा बताया गया है। संजना गृह निर्माण संस्था का ऑडिट भी लंबे समय से पीछे चल रहा है और इसका रिकॉर्ड 2017-18 तक ही पूरा हुआ है।
इन रिकॉर्ड में अंतर के कारण भी प्रशासन अब विस्तृत जांच कर रहा है।
₹5.89 करोड़ जमा, फिर भी दो साल से अटकी प्रक्रिया
स्कीम 171 से मुक्ति के लिए संबंधित सोसायटियों और अन्य कॉलोनियों की ओर से दिसंबर 2024 में करीब 5.89 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। यह राशि विकास शुल्क के रूप में जमा कराई गई थी। उम्मीद थी कि राशि जमा होने के बाद योजना से बाहर करने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी।
हालांकि, राशि जमा होने के करीब दो साल बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इससे प्लॉट धारकों में निराशा बढ़ रही है। लंबे समय से योजना में शामिल जमीनों पर विकास कार्य नहीं होने और योजना से मुक्ति नहीं मिलने के कारण कई प्लॉट धारक अपने भूखंडों पर निर्माण भी नहीं कर पा रहे हैं।
32 साल से क्यों अटका है मामला?
स्कीम 171 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी लंबी अवधि के बाद भी सोसायटियों को योजना से बाहर क्यों नहीं किया जा सका। नियमानुसार यदि किसी योजना में लंबे समय तक विकास कार्य नहीं किया जाता है, तो निर्धारित अवधि के बाद जमीन को योजना से बाहर करने का प्रावधान है।
बताया गया है कि स्कीम 171 में शामिल कई क्षेत्रों में लंबे समय तक विकास कार्य नहीं किए गए। इसके बावजूद संबंधित जमीनें योजना के दायरे से बाहर नहीं हो पाईं। इस कारण प्लॉट धारकों के लिए स्थिति जटिल बनी रही।
अब प्रशासन द्वारा दोबारा जांच शुरू किए जाने से उम्मीद जगी है कि लंबित दस्तावेजों, ऑडिट और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करके मामले को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
प्लॉट धारकों को अब राहत की उम्मीद
करीब 6 हजार प्लॉट धारकों के लिए यह मामला सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वर्षों पुराने निवेश और संपत्ति के अधिकार से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से योजना से मुक्ति नहीं मिलने के कारण वे अपने प्लॉट का पूरी तरह उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
अब प्रशासन ने सात दिन में लंबित ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए हैं और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू की है। यदि जांच और दस्तावेजी प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो 13 सोसायटियों को स्कीम 171 से बाहर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल हजारों प्लॉट धारकों की नजर प्रशासन की जांच पर है। 32 वर्षों से चली आ रही इस समस्या के बीच ₹5.89 करोड़ जमा होने के बाद भी राहत नहीं मिलने का मामला प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है। अब देखना होगा कि नई जांच के बाद स्कीम 171 से जुड़ी सोसायटियों और प्लॉट धारकों को वास्तव में कब तक राहत मिल पाती है।
