धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति समर्पित बाहुबली पांड्या का अमृत महोत्सव भव्य रूप से संपन्न
रिपोर्ट: राजेश जैन ‘दद्दू’ | स्थान: इंदौर समाचार (Indore News)
इंदौर, 11 नवंबर 2025।
हर पल धर्म, समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी, लेखक, पत्रकार एवं सन्मतिवाणी पत्रिका के संपादक बाहुबली पांड्या का अमृत महोत्सव (75वां जन्मोत्सव) अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
यह समारोह महावीर ट्रस्ट, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद और सोशल ग्रुप फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में महावीर बाल संस्कार केंद्र, कंचन बाग (इंदौर) में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शहर और प्रदेश भर से समाज के गणमान्य सदस्य, धर्मगुरु, पत्रकार, समाजसेवी और अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि द्वारा हुआ सम्मान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री महेश जैन (डीआईजी, नारकोटिक्स विभाग) थे। उन्होंने बाहुबली पांड्या को समाज सेवा और धर्मप्रचार में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पगड़ी, माला, शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
अभिनंदन पत्र का वाचन समाजसेवी श्री आदित्य कासलीवाल द्वारा किया गया।
इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों की ओर से भी बाहुबली पांड्या का भावपूर्ण सम्मान किया गया। समारोह में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती इन्द्रा पांड्या भी सादगीपूर्ण उपस्थिति के साथ मौजूद रहीं।
मुख्य अतिथि ने दी शुभकामनाएं
मुख्य अतिथि श्री महेश जैन ने कहा कि,
“बाहुबली पांड्या समाज के एक कर्मठ, जागरूक और समर्पित समाजसेवी हैं। उन्होंने अपने जीवन के 75 वर्ष न केवल धर्म और संस्कृति को समर्पित किए, बल्कि नई पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनकर समाज में आदर्श स्थापित किया है। मैं उनकी दीर्घायु और शतायु होने की हार्दिक कामना करता हूँ।”
समाज नेतृत्व की प्रेरक बातें
समाज अध्यक्ष श्री राजकुमार पाटोदी ने अपने वक्तव्य में कहा —
“बाहुबली पांड्या केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था के समान हैं। उन्होंने समाज की अनेक संस्थाओं की गतिविधियों को नई दिशा दी है और हर स्तर पर समाजहित में योगदान दिया है। उनके अनुभव और दृष्टिकोण से समाज की कई पहल सफल हुई हैं।”
महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री अमित कासलीवाल ने कहा कि श्री पांड्या का सम्पूर्ण जीवन समाज उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने निःस्वार्थ भाव से धर्म, शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
ग्रुप फेडरेशन अध्यक्ष श्री मनोहर झांझरी ने श्री पांड्या को “सहज, सरल और सौम्य व्यक्तित्व वाला समाज का सच्चा मार्गदर्शक” बताया।
लेखक और पत्रकार के रूप में योगदान
डॉ. अनुपम जैन ने बाहुबली पांड्या के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा —
“श्री पांड्या एक श्रेष्ठ लेखक, चिंतक और समाजहित में सक्रिय पत्रकार हैं। उनकी लेखनी ने सदैव समाज को जागरूक किया है। ‘सन्मतिवाणी’ पत्रिका के माध्यम से उन्होंने समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाने का कार्य किया है।”
उनकी लेखन शैली में समाज की गहराई, धर्म की पवित्रता और सेवा की भावना झलकती है। दशकों से वे जैन समाज की गतिविधियों, धर्मप्रचार और युवा पीढ़ी में नैतिक शिक्षा के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भावनात्मक क्षण और आभार
सम्मान ग्रहण करते हुए भावुक हुए श्री बाहुबली पांड्या ने अपने संबोधन में कहा —
“मेरा जीवन समाज और धर्म के प्रति समर्पित रहा है। आज जो कुछ भी मैं हूँ, उसमें स्वर्गीय प्रदीप कासलीवाल और उनके परिवार का विशेष योगदान रहा है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, पूरे जैन समाज की सेवा भावना का सम्मान है।”
उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
मंगलाचरण और संचालन
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई, जिसे श्रीमती कुसुम पांड्या, शिखा कासलीवाल और राधा कासलीवाल ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन श्री प्रदीप चौधरी ने कुशलता से किया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अमृत महोत्सव में समाज के अनेक प्रमुख गणमान्य उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं —
हंसमुख गांधी, डॉ. जैनेन्द्र जैन, होलास सोनी, राजेश जैन ‘दद्दू’, डी.के. जैन, डीएसपी कमलेश कासलीवाल, कीर्ति पांड्या, प्रिंसिपल टोंग्या, रितेश पाटनी, श्रीमती रेखा जैन, संजय पापड़ीवाला, ललित राठौर, जिनेन्द्र कासलीवाल आदि।
सभी ने एक स्वर में कहा कि बाहुबली पांड्या जैसे वरिष्ठ समाजसेवी का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति के मूल्यों को अपने कर्म से जीवंत रखा।
बाहुबली पांड्या: समर्पण और सेवा का पर्याय
बाहुबली पांड्या का नाम इंदौर और मध्यप्रदेश के जैन समाज में सेवा, सादगी और संगठन का प्रतीक माना जाता है। वे कई दशकों से धर्म प्रचार, शिक्षा, पत्रकारिता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता के लिए कार्यरत हैं।
‘सन्मतिवाणी’ पत्रिका के माध्यम से उन्होंने समाज के भीतर संवाद, जागरूकता और प्रेरणा का एक नया अध्याय रचा है।
उनका मानना है कि —
“धर्म तभी जीवित रह सकता है जब समाज संगठित, शिक्षित और संवेदनशील हो।”
समारोह का सार
अमृत महोत्सव केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक आयोजन था जिसने यह संदेश दिया कि यदि व्यक्ति अपने जीवन को धर्म और समाज के प्रति समर्पित कर दे, तो वह स्वयं एक संस्था बन जाता है।
बाहुबली पांड्या का यह अमृत महोत्सव न केवल उनके जीवन का उत्सव था, बल्कि समाज सेवा, धार्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों का भी उत्सव बन गया।

