Indore नगर निगम फर्जी बिल घोटाला: ED ने 32 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट, 103 करोड़ के गबन का मामला
Indore । इंदौर नगर निगम में सामने आए बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने इस मामले में अदालत में करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में कुल 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, इंजीनियर, ठेकेदार फर्मों के संचालक, ऑडिट से जुड़े अधिकारी और अन्य निजी लोग शामिल हैं।
यह मामला नगर निगम में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन निकालने और करोड़ों रुपये के गबन से जुड़ा हुआ है। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए अपराध से अर्जित धन को छिपाने, उसका इस्तेमाल करने और अलग-अलग माध्यमों से उसे ठिकाने लगाने के आरोप लगाए हैं।
32 लोगों को बनाया गया आरोपी
ईडी की जांच में नगर निगम के मुख्य आरोपी इंजीनियर अभय राठौर सहित कई लोगों की भूमिका सामने आई है। चार्जशीट में ड्रेनेज और जनकार्य विभाग से जुड़े कर्मचारी, फर्जी बिल तैयार करने वाली ठेकेदार फर्मों के संचालक, बिल और फाइलों की जांच करने वाले स्थानीय निधि लेखा परीक्षा कार्यालय के अधिकारी तथा अन्य निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।
जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों ने अलग-अलग स्तर पर भूमिका निभाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकारी राशि निकालने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।
कागजों पर काम दिखाकर निकाले गए करोड़ों रुपये
यह घोटाला अगस्त 2024 में सामने आया था। जांच में पता चला कि नगर निगम में कई ऐसे कामों की फाइलें तैयार की गईं, जो वास्तव में जमीन पर हुए ही नहीं थे। इसके बावजूद फर्जी दस्तावेजों और बिलों के आधार पर भुगतान कर दिया गया।
आरोप है कि फर्जी वर्क ऑर्डर, झूठी माप पुस्तिकाएं (Measurement Book), फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और हेरफेर की गई नोटशीटों के जरिए सरकारी खजाने से बड़ी रकम निकाली गई।
नगर निगम की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
103 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का आरोप
ईडी की जांच के अनुसार, फर्जी बिलों के माध्यम से इंदौर नगर निगम के कोषागार से लगभग 103.42 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि निकाली गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह राशि ठेकेदारों, कर्मचारियों और घोटाले में शामिल अन्य लोगों के बीच बांटी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी फर्मों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर इस धनराशि को सामान्य व्यापारिक लेन-देन की तरह दिखाने का प्रयास किया गया। इसके बाद इस पैसे को अलग-अलग संस्थाओं और व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
ईडी के अनुसार, घोटाले की रकम से चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं तथा व्यक्तिगत खर्चों में भी इसका उपयोग किया गया।
फर्जी दस्तावेजों से तैयार किया गया पूरा नेटवर्क
जांच एजेंसी ने बताया कि घोटाले को अंजाम देने के लिए एक सुनियोजित तरीके से पूरा नेटवर्क बनाया गया था। इसमें फर्जी बिल तैयार करने से लेकर उन्हें पास कराने और भुगतान जारी करवाने तक कई स्तरों पर मिलीभगत की गई।
ठेकेदार फर्मों के संचालकों ने कथित तौर पर निगम के कुछ अधिकारियों और ऑडिट से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
ईडी का दावा है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और बैंक लेन-देन से इस पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आई।
59 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क
इस मामले में ईडी ने अब तक बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपियों से जुड़ी 59 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की हैं। जांच एजेंसी लगातार आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही है।
ईडी का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे जब्त करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि सरकारी धन की हेराफेरी से जुड़े मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके।
पुलिस जांच के बाद ईडी ने संभाली जांच
Indore नगर निगम में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने पुलिस थाना एमजी रोड में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस जांच के दौरान फर्जी बिल, दस्तावेजों में हेरफेर और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।
इसके बाद ईडी ने एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एजेंसी ने दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्तियों और आरोपियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच की।
आगे भी जारी रहेगी जांच
ईडी की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में मामले की आगे की सुनवाई होगी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
Indore नगर निगम फर्जी बिल घोटाला सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला माना जा रहा है। 103 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के इस कथित घोटाले में अब 32 आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
