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रिकॉर्ड तोड़ कमाई: इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड में 1086 करोड़ का आंकड़ा पार, देखिए कैसे बना यह शानदार मुकाम

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Published On: 1 April 2026
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इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड में इस बार धमाल मच गया है। जानिए कैसे करदाताओं के सहयोग से निगम ने 1086 करोड़ रुपये से अधिक की ऐतिहासिक कमाई की है और पिछले साल से 155 करोड़ ज्यादा वसूले।

इंदौर के करदाताओं का कमाल: नगर निगम ने वसूला ₹1086 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व, पिछले साल से ₹155 करोड़ ज्यादा की कमाई

इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में देश का मान बढ़ाने वाले इंदौर के नागरिकों ने अब कर भुगतान के मामले में भी नई मिसाल पेश की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति पर इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड ने सभी पुराने अनुमानों को ध्वस्त कर दिया है। निगम के खजाने में इस वर्ष 1086.92 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड राशि जमा हुई है, जो शहर के विकास और नागरिकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

यह उपलब्धि न केवल निगम प्रशासन के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है। आइए, इस ऐतिहासिक उपलब्धि की विस्तृत समीक्षा करते हैं और जानते हैं कि कैसे इंदौर ने कर संग्रहण में भी अपना परचम लहराया।

पिछली बार की तुलना में भारी बढ़ोतरी

इंदौर नगर निगम के लिए यह वित्तीय वर्ष किसी वरदान से कम नहीं रहा। इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड को तोड़ते हुए संग्रहण में पिछले वर्ष की तुलना में 155 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में निगम को कुल 932 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 1086.92 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

यह 16.6% की वृद्धि दर्शाता है, जो किसी भी महानगर के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने इस सफलता का श्रेय करदाताओं के सक्रिय सहयोग और निगम की पारदर्शी कार्यप्रणाली को दिया है।

किन मदों से हुई सबसे ज्यादा कमाई?

इस ऐतिहासिक राजस्व संग्रहण में विभिन्न करों और शुल्कों का योगदान रहा। निगम को प्राप्त आय के प्रमुख स्रोत इस प्रकार हैं:

मद (Source) योगदान (लगभग) विवरण
संपत्ति कर और जलकर 480 करोड़ रुपये सबसे बड़ा स्रोत, ऑनलाइन भुगतान और छूट योजनाओं का लाभ।
बिल्क वॉटर शुल्क और SWM शुल्क 310 करोड़ रुपये नियमित बिलिंग और शहर की 24×7 जलापूर्ति परियोजना का असर।
बिल्डिंग परमिशन और कॉलोनी सेल 150 करोड़ रुपये शहर में बढ़ते निर्माण कार्य और डिजिटल अनुमति प्रणाली से वृद्धि।
मार्केट एवं लाइसेंस शुल्क 85 करोड़ रुपये व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से संग्रहण और नए लाइसेंस।
अन्य शुल्क (विज्ञापन, पार्किंग आदि) 61.92 करोड़ रुपये अन्य मदों से प्राप्त आय।

इस तालिका से स्पष्ट है कि संपत्ति कर अभी भी निगम की आय का सबसे मजबूत स्तंभ है। हालांकि, SWM शुल्क और बिल्डिंग परमिशन जैसी मदों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

महापौर और आयुक्त ने जताया आभार

इस अभूतपूर्व सफलता पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर जानकारी साझा की। महापौर ने कहा, “यह सिर्फ एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, यह इंदौर के नागरिकों की अपने शहर के प्रति निष्ठा और विश्वास का प्रतीक है। जिस तरह से उन्होंने सफाई में हमारा साथ दिया, उसी तरह समय पर टैक्स भरकर विकास कार्यों में भी हमारी भागीदार बने हैं।”

निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि यह इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड डिजिटल पहलों और पारदर्शिता की बदौलत संभव हो सका। उन्होंने बताया कि निगम ने कर संग्रहण के लिए कई नई सुविधाएं शुरू कीं, जिनका नागरिकों ने खूब लाभ उठाया।

राजस्व वृद्धि के पीछे की रणनीति और तकनीकी पहल

इतनी बड़ी वृद्धि के पीछे केवल नागरिकों की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि निगम प्रशासन की सक्रिय रणनीति भी रही। कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार थीं:

  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा: निगम ने ऑनलाइन भुगतान पोर्टल को और अधिक सरल बनाया। मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप सेवा शुरू की गई, जिससे नागरिक घर बैठे कर जमा कर सके। इससे न केवल संग्रहण बढ़ा बल्कि पारदर्शिता भी आई।

  • वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम (OTS): लंबे समय से लंबित संपत्ति कर के मामलों को निपटाने के लिए OTS योजना चलाई गई। इससे बड़ी संख्या में करदाताओं ने ब्याज और जुर्माने में छूट का लाभ उठाते हुए अपना बकाया चुकता किया।

  • सर्वे और वेरिफिकेशन अभियान: निगम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दर-दर जाकर सर्वे किया और नए संपत्ति करदाताओं को पंजीकृत किया। इससे कर दायरे में वृद्धि हुई।

  • जलकर और SWM शुल्क का समायोजन: 24×7 जलापूर्ति परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद, जलकर संग्रहण में भारी वृद्धि हुई। नागरिकों ने बेहतर सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान सहर्ष किया।

नागरिकों की जिम्मेदारी और शहर का विकास

इंदौर शहर, जिसे ‘स्वच्छता का मॉडल’ कहा जाता है, अब ‘कर संग्रहण का मॉडल’ बनता जा रहा है। स्थानीय निवासी रमेश अग्रवाल ने बताया, “हम देख रहे हैं कि हमारा पैसा कहाँ खर्च हो रहा है। सड़कें बन रही हैं, पानी की व्यवस्था बेहतर हो रही है, और सफाई व्यवस्था तो पहले से ही बेजोड़ है। जब हमें सेवाएँ मिल रही हैं, तो कर भरने में क्या हिचक?”

निगम के राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने कहा कि करदाताओं के इस सहयोग से शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस वित्तीय वर्ष में प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग नई फ्लाईओवर, अंडरपास और जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने में किया जाएगा।

विशेषज्ञों की राय: यह रिकॉर्ड क्यों है खास?

शहरी प्रशासन के विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड कई मायनों में खास है। वरिष्ठ शहरी योजनाकार डॉ. अनिल गुप्ता कहते हैं, “आमतौर पर नगर निगमों को राजस्व संग्रहण में कठिनाई होती है। लेकिन इंदौर ने दिखा दिया कि यदि प्रशासन पारदर्शी हो और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ दी जाएं, तो वे कर चुकाने में पीछे नहीं हटते। यह आंकड़ा इंदौर की मजबूत आर्थिक सेहत का भी संकेत है।”

इस रिकॉर्ड का एक और पहलू यह है कि यह बिना किसी नए कर का बोझ डाले हासिल किया गया है। यह सिर्फ मौजूदा कर ढांचे के बेहतर प्रबंधन और नए करदाताओं को जोड़ने से संभव हुआ है।

आगे की राह: अब आय का उपयोग कहाँ होगा?

इतनी बड़ी राशि निगम के खजाने में आने के बाद, अब सबकी निगाहें इसके उपयोग पर हैं। निगमायुक्त ने आश्वासन दिया कि इस राशि का उपयोग शहर के दीर्घकालिक विकास के लिए किया जाएगा। प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:

  • जल निकासी व्यवस्था का उन्नयन: बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा।
  • स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का विस्तार: सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को और बेहतर बनाया जाएगा।
  • स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार: निगम के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक उपकरण और सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
  • सड़कों का निर्माण और सौंदर्यीकरण: शहर की सड़कों को सीसी रोड (सीमेंट कंक्रीट) में बदलने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

निष्कर्ष

इंदौर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल स्वच्छता में ही नहीं, बल्कि शासन और विकास के हर पैमाने पर देश का अग्रणी शहर है। इंदौर नगर निगम राजस्व रिकॉर्ड को तोड़ने की यह उपलब्धि नागरिकों और प्रशासन के बीच सकारात्मक सह-अस्तित्व का प्रतीक है। अब जरूरत इस रिकॉर्ड राशि का सही और पारदर्शी तरीके से उपयोग सुनिश्चित करने की है, ताकि शहर का विकास निरंतर जारी रहे। इंदौर के करदाताओं ने जो मिसाल कायम की है, वह देश के अन्य शहरों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

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