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Indore MGM Medical College में जल संरक्षण की अनोखी पहल, डॉक्टरों ने उठाया जल संकट से निपटने का जिम्मा

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Published On: 4 June 2026
Indore MGM Medical College में जल संरक्षण की अनोखी पहल, डॉक्टरों ने उठाया जल संकट से निपटने का जिम्मा

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Indore MGM Medical College में जल संरक्षण की अनोखी पहल, डॉक्टरों ने उठाया जल संकट से निपटने का जिम्मा

भीषण गर्मी में सामने आया जल संकट

इस वर्ष भीषण गर्मी के दौरान Indore MGM Medical College परिसर में पानी की गंभीर समस्या सामने आई। कई बोरवेल सूख गए और भूजल स्तर लगातार नीचे जाने लगा, जिससे अस्पताल और छात्रावासों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई। इस स्थिति ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और डॉक्टरों को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस समाधान की जरूरत है।

डॉक्टरों और प्रबंधन की पहल से शुरू हुआ अभियान

जल संकट को देखते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज, उससे जुड़े अस्पतालों और हॉस्टल परिसर में बड़े स्तर पर जल संरक्षण अभियान शुरू किया गया है। इस पहल के तहत लगभग 100 बोरिंग के पास वाटर रिचार्जिंग पिट बनाए जा रहे हैं, ताकि वर्षा का पानी सीधे जमीन में पहुंचकर भूजल स्तर को पुनर्जीवित कर सके।

100 से अधिक रिचार्जिंग पिट बनाने की योजना

अब तक परिसर में करीब 10 रिचार्जिंग पिट तैयार किए जा चुके हैं। कॉलेज प्रबंधन का लक्ष्य है कि आने वाले समय में सभी बोरवेल के पास ऐसे पिट बनाए जाएं। इन संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोककर जमीन के अंदर संग्रहित किया जाएगा, जिससे भविष्य में पानी की समस्या कम हो सके।

डॉक्टर और स्टाफ खुद कर रहे श्रमदान

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थी खुद श्रमदान कर रहे हैं। सफेद कोट में मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर अब फावड़ा और औजार लेकर जल संरक्षण कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इससे न केवल अभियान को गति मिली है, बल्कि समाज में एक मजबूत संदेश भी गया है।

भूजल संकट ने दिखाई गंभीर तस्वीर

पिछले कुछ महीनों में बोरवेल सूखने और पानी की कमी ने यह साफ कर दिया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए बोरवेल खोदना समाधान नहीं है, बल्कि वर्षा जल का संरक्षण और भूजल पुनर्भरण ही स्थायी उपाय है।

देश का अनोखा मेडिकल कॉलेज मॉडल

प्रबंधन का दावा है कि यह देश का पहला मेडिकल कॉलेज है, जहां डॉक्टरों की प्रत्यक्ष भागीदारी से बड़े स्तर पर जल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। आमतौर पर ऐसे अभियान नगर निगम या सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जाते हैं, लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग खुद पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

पर्यावरण के साथ सुंदरता का भी ध्यान

रिचार्जिंग पिट को और अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाने के लिए इनमें कमल के पौधे लगाने की योजना भी बनाई गई है। इससे परिसर में हरियाली बढ़ेगी और जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।

बड़े स्तर पर जनभागीदारी

इस जल संरक्षण अभियान में एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी इसे एक मजबूत और प्रभावी पहल बना रही है। लगभग 4500 छात्र, 1500 नर्सिंग स्टाफ और करीब 350 वरिष्ठ डॉक्टर इस अभियान से सीधे जुड़े हुए हैं और लगातार श्रमदान तथा तकनीकी सहयोग दे रहे हैं। छात्रों की ऊर्जा, नर्सिंग स्टाफ की नियमित भागीदारी और वरिष्ठ डॉक्टरों के मार्गदर्शन ने इस पूरे प्रयास को एक संगठित स्वरूप प्रदान किया है।

सभी मिलकर बोरवेल के पास वाटर रिचार्जिंग पिट बनाने, वर्षा जल संचयन व्यवस्था को मजबूत करने और परिसर में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं। इस सामूहिक प्रयास ने न केवल अभियान को गति दी है, बल्कि इसे एक जनआंदोलन का रूप भी दे दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जब विभिन्न वर्ग एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होते हैं, तो बड़ा बदलाव संभव हो सकता है।

भविष्य के लिए स्थायी समाधान की दिशा में कदम

कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि यह जल संरक्षण पहल आने वाले समय में परिसर की पानी की समस्या को काफी हद तक कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रिचार्जिंग पिट के माध्यम से वर्षा का पानी सीधे जमीन की गहराई तक पहुंचाया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में धीरे-धीरे सुधार होगा। लंबे समय से गर्मियों में बोरवेल सूखने और पानी की कमी की जो समस्या सामने आ रही थी, वह इस व्यवस्था से काफी हद तक नियंत्रित हो सकेगी।

इससे न केवल अस्पताल और छात्रावासों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में पानी पर निर्भरता भी कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल लगातार प्रभावी रूप से लागू रहा तो यह एक स्थायी समाधान बन सकता है। इस पहल से गर्मी के मौसम में होने वाली जल संकट की समस्या से राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है और परिसर अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।

निष्कर्ष

एमजीएम मेडिकल कॉलेज की यह पहल केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मॉडल बन रही है जो यह संदेश देती है कि यदि समाज के हर वर्ग के लोग मिलकर प्रयास करें तो पर्यावरण संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। डॉक्टरों की यह पहल आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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