इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सड़क निर्माण में लापरवाही पर सख्त तेवर दिखाए, खुदाई रोकने के आदेश दिए
इंदौर: शहर की सड़क निर्माण प्रक्रिया में लगातार हो रही लापरवाही ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को नाराज कर दिया। शुक्रवार को महापौर बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक तीन इमली चौराहे पहुंचे और उन्होंने वहां चल रही खुदाई को तुरंत रोकने के आदेश दिए। महापौर के इस कदम ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों के लिए चेतावनी का संदेश दे दिया है।
दरअसल, गुरुवार रात एक राहगीर ने महापौर को वीडियो भेजा, जिसमें नई बनी सड़क के हिस्से पर फिर से खुदाई हो रही थी। महापौर को इस काम की जानकारी नहीं थी। वीडियो मिलने के बाद उन्होंने फोन पर पूछताछ करने की बजाय सीधे मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
खुदाई रोकने के पीछे महापौर की नाराजगी
तीन इमली चौराहे पर पहुँचने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव खुद भी हैरान रह गए। सड़क निर्माण का काम आधा भी पूरा नहीं हुआ था और उसी पर फिर से खुदाई चल रही थी। महापौर ने तुरंत अपर आयुक्त अभय राजन, जोनल अधिकारी अतीक खान, पार्षद राजेंद्र राठौड़ और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाया।
महापौर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “आप ऐसे काम करते हो जिससे शहरवासियों को परेशानी और निगम को आर्थिक नुकसान होता है। यह लापरवाही सीधे तौर पर स्वीकार्य नहीं है।”
स्टॉर्म वॉटर लाइन के नाम पर सड़क की दोबारा खुदाई
अधिकारियों ने महापौर को बताया कि सड़क पर स्टॉर्म वॉटर लाइन डालने के कारण खुदाई जरूरी थी। इस पर महापौर ने कड़ा रुख अपनाया और कहा, “सड़क बनने के बाद खुदाई कौन-सी समझदारी है? यह सीधी लापरवाही है। पहले यह जानकारी क्यों नहीं दी गई कि लाइन डालनी है?”
महापौर ने यह भी पूछा कि क्या इस इलाके में सड़क पूरी होने के बाद जलजमाव या पानी जमा होने की कोई शिकायत आई थी, जिससे यह लाइन डालना अनिवार्य हुआ। अधिकारियों ने इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
कंसल्टेंट एजेंसी पर सख्त कार्रवाई का आदेश
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मौके पर ही स्पष्ट निर्देश दिए कि जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर तुरंत टर्मिनेट किया जाए और कंसल्टेंट एजेंसी से नुकसान की भरपाई वसूली जाए।
महापौर ने कहा, “हम कंसल्टेंट एजेंसी को अच्छा पैसा देते हैं, फिर मॉनिटरिंग कौन कर रहा है? यह निगम की जवाबदेही भी तय करता है। ऐसे काम से शहरवासियों की परेशानी बढ़ती है और निगम को आर्थिक नुकसान होता है।”
नगर निगम और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किया कि निर्माण के दौरान मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल निर्माण एजेंसी नहीं बल्कि कंसल्टेंट एजेंसी भी जिम्मेदार होगी।
उन्होंने यह आदेश भी दिया कि निर्माण एजेंसी पर पेनल्टी लगाई जाए और भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो। महापौर ने जोर देकर कहा कि शहर की जनता को सुविधाजनक सड़कें मिलनी चाहिए और ऐसे काम से जनता की परेशानियों में इजाफा नहीं होना चाहिए।
सड़क निर्माण विवाद और शहरवासियों की परेशानी
तीन इमली चौराहे की सड़क निर्माण प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही केवल नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की नहीं बल्कि पूरे शहर की सुविधा पर असर डालती है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि भविष्य में सड़क निर्माण में पारदर्शिता और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाए।
सड़क निर्माण विवाद ने शहरवासियों की नाराजगी भी बढ़ा दी है। नई सड़क बनते ही फिर से खुदाई करने से आम जनता को यातायात में दिक्कतें हो रही थीं। महापौर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों और एजेंसियों को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव की सख्ती से जुड़े मुख्य बिंदु:
- तीन इमली चौराहे पर सड़क की दोबारा खुदाई रोकने का आदेश।
- कंसल्टेंट एजेंसी और निर्माण एजेंसी पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश।
- निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर टर्मिनेट करने और पेनल्टी लगाने की हिदायत।
- नुकसान की भरपाई कंसल्टेंट एजेंसी से वसूली जाए।
- भविष्य में सड़क निर्माण के दौरान पारदर्शिता और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का आदेश।
निष्कर्ष
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि शहर की सड़क निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही और अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। महापौर ने स्पष्ट कर दिया कि कंसल्टेंट एजेंसी पेनल्टी के साथ जिम्मेदारी से मुक्त नहीं होगी और भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं होगी।
इस तरह महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने न केवल सड़क निर्माण विवाद को सुलझाने का कदम उठाया बल्कि शहरवासियों को यह भरोसा भी दिलाया कि इंदौर की सड़कें अब व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से बनेंगी।
