इंदौर में 200 एकड़ पर सोलर क्रांति — हर माह 5 करोड़ रुपये की बिजली बचत से नर्मदा जल परियोजना बनेगी आत्मनिर्भर
इंदौर बना सौर ऊर्जा का अग्रदूत
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर देश में उदाहरण पेश करने जा रही है। स्वच्छता में सातवीं बार नंबर-1 बनने के बाद अब इंदौर ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है।
इंदौर नगर निगम ने जलूद (Indore से लगभग 70 किलोमीटर दूर) में 200 एकड़ भूमि पर 60 मेगावाट क्षमता वाला सोलर पार्क स्थापित किया है। इस सौर ऊर्जा संयंत्र से हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये की बिजली लागत में बचत होगी।
कैसे करेगा काम — सौर ऊर्जा से नर्मदा जल की आपूर्ति
वर्तमान में नर्मदा नदी से इंदौर तक जल लाने में नगर निगम को करीब 3 करोड़ यूनिट बिजली की आवश्यकता पड़ती है। यह बिजली अब तक पारंपरिक ग्रिड से ली जाती थी, जिसकी लागत काफी अधिक थी।
लेकिन इस नए सोलर पावर पार्क से हर दिन लगभग 60 लाख यूनिट बिजली उत्पन्न की जाएगी। यह ऊर्जा सीधे नर्मदा जल परियोजना में उपयोग की जाएगी, जिससे पानी की आपूर्ति का पूरा सिस्टम ग्रीन एनर्जी से संचालित होगा।
सात सेक्टरों में लगे अत्याधुनिक सोलर पैनल
निमाड़ क्षेत्र की उपजाऊ भूमि पर फैले इस 200 एकड़ के सोलर पार्क को सात अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर सेक्टर में आधुनिक और उच्च क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं।
इन पैनलों से उत्पन्न बिजली को अब 132 केवी सब-स्टेशन के माध्यम से मुख्य ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। रविवार को इस कार्य के लिए पावर ट्रांसमिशन लाइन का शटडाउन लिया गया था।
अब बस अंतिम चरण में बिजली वितरण कंपनी से औपचारिक अनुमति प्राप्त की जानी है, जिसके बाद सौर ऊर्जा से पूर्ण उत्पादन शुरू हो जाएगा।
300 करोड़ रुपये के बांड से जुटाई गई फंडिंग
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इंदौर नगर निगम ने इसके लिए राज्य सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं ली।
नगर निगम ने स्वयं 300 करोड़ रुपये के बांड जारी कर फंड जुटाया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निवेश अगले 10 वर्षों में पूरी तरह वसूल हो जाएगा।
वर्तमान में नगर निगम को हर माह 18 से 20 करोड़ रुपये तक बिजली बिल देना पड़ता है। इस नई परियोजना के शुरू होने के बाद यह खर्च काफी हद तक घट जाएगा।
नर्मदा प्रोजेक्ट को मिलेगी नई ऊर्जा
इंदौर नगर निगम का यह प्रयास एशिया के सबसे महंगे पेयजल प्रोजेक्टों में से एक — नर्मदा जल परियोजना — को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब तक यह परियोजना पूरी तरह परंपरागत बिजली पर निर्भर थी, लेकिन सोलर पावर के जुड़ने से यह देश की पहली बड़ी “ग्रीन वॉटर सप्लाई स्कीम” बन जाएगी।
यह कदम न केवल बिजली की बचत करेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को भी घटाएगा, जिससे पर्यावरण को सीधा लाभ होगा।
“देश का पहला ग्रीन मॉडल बनेगा इंदौर” — जलकार्य समिति प्रभारी
नगर निगम की जलकार्य समिति के प्रभारी अभिषेक शर्मा (बबलू) ने बताया —
“देश के किसी भी नगरीय निकाय ने अब तक इस तरह की ग्रीन एनर्जी परियोजना पर काम नहीं किया है। इंदौर का यह मॉडल अन्य शहरों के लिए मिसाल बनेगा। यह नगर निगम को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा और आने वाले वर्षों में करोड़ों रुपये की बचत होगी।”
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से इंदौर “स्मार्ट सिटी” ही नहीं, बल्कि “सस्टेनेबल सिटी” की दिशा में भी अग्रसर हो गया है।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव बोले — ‘50 साल आगे की सोच’
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि नगर परिषद ने पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में दो बड़े कार्य किए हैं, जिनका लाभ आने वाले 50 वर्षों तक शहरवासियों को मिलेगा।
“यह सोलर प्रोजेक्ट तय समय सीमा के भीतर पूरा हुआ है। इससे नगर निगम के बिजली खर्च में भारी कमी आएगी। बची हुई राशि को शहर के अन्य विकास कार्यों में उपयोग किया जाएगा,”
उन्होंने कहा।
इसके साथ ही, नर्मदा परियोजना के चौथे चरण को भी मंजूरी मिल चुकी है। इस चरण के तहत शहर के नए इलाकों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का काम जल्द शुरू होगा।
पर्यावरण और ऊर्जा — दोनों को मिलेगा लाभ
इस इंदौर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट से जहां आर्थिक बचत होगी, वहीं पर्यावरणीय लाभ भी बड़े स्तर पर दिखाई देंगे।
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हर साल 7.2 करोड़ यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन
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करीब 50,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी
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राज्य सरकार की “ग्रीन मध्य प्रदेश मिशन” में बड़ा योगदान
इस परियोजना से यह भी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में इंदौर को कार्बन न्यूट्रल सिटी घोषित किया जा सकेगा।
तकनीकी विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि 60 मेगावाट का सौर संयंत्र इंदौर जैसे बड़े शहरी निकाय के लिए संतुलित और व्यावहारिक समाधान है।
सोलर ऊर्जा के कारण बिजली की निर्भरता घटेगी और नर्मदा पंपिंग स्टेशन लगातार काम कर सकेगा।
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो भोपाल, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर भी इसे अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
इंदौर का हरित भविष्य — ग्रीन एनर्जी से ग्रीन सिटी तक
इंदौर नगर निगम की यह पहल सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य की नीति का संकेत है।
एक ऐसा शहर जो स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और अब सौर ऊर्जा से जल आपूर्ति—तीनों मोर्चों पर देश में अग्रणी है।
इंदौर सोलर पार्क आने वाले समय में देशभर में शहरी विकास के “ग्रीन मॉडल” के रूप में जाना जाएगा।

