Indore विकास प्राधिकरण में बड़ा फर्जीवाड़ा: NOC रैकेट का खुलासा, अफसरों के नकली साइन कर जारी की गईं फर्जी एनओसी, ऑनलाइन सिस्टम लागू करने की तैयारी
Indore विकास प्राधिकरण (IDA) में जमीन से जुड़ी एनओसी (No Objection Certificate) को लेकर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि प्राधिकरण के ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर नकली एनओसी तैयार की जा रही थीं और उन्हें नक्शा मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCPC) विभाग में भेजा जा रहा था।
यह मामला तब सामने आया जब टीएनसीपी अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच के दौरान एनओसी पर साइन में असंगतता (signature mismatch) दिखाई दी। संदेह बढ़ने पर जब आईडीए से पुष्टि की गई तो खुलासा हुआ कि संबंधित एनओसी विभाग की ओर से जारी ही नहीं की गई थी।
योजना 97 पार्ट 4 की जमीन से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला Indore की योजना 97 पार्ट 4, बिजलपुर क्षेत्र की जमीन से जुड़ा है। करीब 20 हजार वर्गफुट से अधिक क्षेत्रफल वाली यह जमीन आईडीए की योजना में शामिल बताई गई है। जमीन मालिक की ओर से इस भूमि के ले-आउट को स्वीकृति देने के लिए टीएनसीपी में आवेदन किया गया था।
जांच के दौरान जब टीएनसीपी ने एनओसी की मांग की, तो संबंधित दस्तावेज में यह दावा किया गया कि भूमि आईडीए की योजना में शामिल नहीं है। हालांकि दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने पर अधिकारियों को साइन संदिग्ध लगे, जिसके बाद पूरा मामला उजागर हो गया।
डेढ़ महीने में दो बार भेजी गई फर्जी एनओसी
टीएनसीपी अधिकारी शुभाशीष बनर्जी के अनुसार, यह मामला पहली बार लगभग डेढ़ महीने पहले सामने आया था। उस समय जो फाइल ले-आउट स्वीकृति के लिए आई थी, उसमें संलग्न एनओसी में कुछ साइन संदिग्ध पाए गए थे।
टीएनसीपी ने तत्काल आईडीए से संपर्क कर दस्तावेजों की पुष्टि की, जिस पर आईडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई एनओसी जारी नहीं की गई है। इसके बाद उस फाइल को निरस्त कर दिया गया।
हालांकि चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ दिनों बाद वही फाइल संशोधित रूप में दोबारा टीएनसीपी के पास पहुंची। दूसरी बार भी दस्तावेजों की जांच में वही गड़बड़ी सामने आई और आईडीए से पुनः पुष्टि की गई, जहां से फिर से एनओसी को फर्जी बताया गया।
अधिकारियों के नकली साइन का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट में आईडीए के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर नकली एनओसी तैयार की जा रही थी।
भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने भी पुष्टि की है कि उनके नाम से भी फर्जी साइन बनाकर एनओसी जारी की गई। इतना ही नहीं, टीएनसीपी और प्लानिंग विभाग के अन्य अधिकारियों के साइन भी नकली पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई छोटी घटना नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा रैकेट हो सकता है।
विधि विभाग के कर्मचारी पर शक
IDA प्रशासन को संदेह है कि विधि विभाग से जुड़ा कर्मचारी शुभम श्रीवास्तव इस पूरे मामले में शामिल हो सकता है। बताया जा रहा है कि मामले के सामने आने के बाद से वह कार्यालय नहीं आया है और उसका मोबाइल फोन भी बंद है। उसके घर पर भी उसका पता नहीं चल पाया है, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
जांच के दायरे में कई पुराने मामले
इस खुलासे के बाद आईडीए प्रशासन अब केवल इस एक मामले तक सीमित नहीं रहना चाहता। प्राधिकरण ने संकेत दिए हैं कि पिछले एक वर्ष में जारी सभी एनओसी की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन को आशंका है कि इससे पहले भी कई मामलों में इसी तरह फर्जी एनओसी जारी कर जमीन से जुड़े बड़े सौदे किए गए होंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस रैकेट में शामिल लोग जमीन की कीमत और डील के आधार पर अवैध रूप से एनओसी तैयार कर मोटा लाभ कमा रहे थे। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
ऑनलाइन सिस्टम से रुकेगा फर्जीवाड़ा
IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े ने बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित योजना की सभी फाइलों की गहन जांच की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी दस्तावेज को आगे बढ़ाने से पहले उसकी पूरी तरह से पुष्टि की जाए।
सीईओ ने यह भी कहा कि फर्जी एनओसी के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन प्रणाली में बदला जाएगा। इससे दस्तावेजों में छेड़छाड़ और फर्जी हस्ताक्षर की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में
IDA प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इस पूरे रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
निष्कर्ष
Indore विकास प्राधिकरण में सामने आया यह NOC फर्जीवाड़ा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि एक संगठित रैकेट की ओर भी इशारा करता है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन से जुड़े मामलों में बड़े स्तर पर हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में और कौन-कौन नाम सामने आते हैं और प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
