प्रेस विज्ञप्ति
आज 12 मई ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स डे’ मनाया गया
सेवामूर्तियों का सम्मान समारोह संपन्न हुआ ज्ञान शिखर में
Indore में अंतर्राष्ट्रीय Nurse Day का भव्य आयोजन
Indore , 12 मई। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडिकल विंग द्वारा आज अंतर्राष्ट्रीय Nurse Day के अवसर पर ज्ञानशिखर ओमशांति भवन, इंदौर में एक गरिमामय एवं भावनात्मक “सेवामूर्ति नर्स सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, सेवा भावना एवं मानवता के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को सम्मानित करना था।
इस अवसर पर शहर के प्रमुख अस्पतालों—एम.वाय. हॉस्पिटल, डी.एन.एस., सी.एच.एल. हॉस्पिटल एवं क्योरवेल हॉस्पिटल—से बड़ी संख्या में नर्सों की उपस्थिति रही। सभी नर्सों का पारंपरिक रूप से तिलक, पुष्पमाला, दुपट्टा, बैज एवं प्रेरणादायी स्लोगन कार्ड देकर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ एवं वातावरण
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों एवं आयोजकों ने मिलकर ज्ञान, सेवा और मानवता के प्रकाश का प्रतीकात्मक संदेश दिया। पूरा सभागार आध्यात्मिकता, शांति और सेवा भावना के वातावरण से परिपूर्ण रहा।
नर्सिंग सेवा: करुणा और मानवता का प्रतीक
इस अवसर पर इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि नर्स का कार्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि दया, करुणा, सेवा और मानवता का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि नर्सें अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज के जीवन में आशा का संचार करती हैं। गंभीर परिस्थितियों में, जब मरीज और उनके परिजन मानसिक तनाव में होते हैं, तब नर्सें न केवल चिकित्सा सेवा देती हैं बल्कि भावनात्मक सहारा भी प्रदान करती हैं।

आध्यात्मिक शक्ति का महत्व
हेमलता दीदी ने आगे कहा कि आज के तनावपूर्ण कार्य वातावरण में नर्सों के लिए आध्यात्मिक शक्ति अत्यंत आवश्यक है। यदि वे परमात्मा से जुड़ाव रखकर कार्य करें, तो उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि मुस्कान और मधुर वाणी किसी औषधि से कम नहीं है। एक नर्स की मुस्कान मरीज के दर्द को आधा कर देती है। उन्होंने सभी नर्सों को “मानवता की सच्ची सेवामूर्ति” बताते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
चिकित्सकीय दृष्टिकोण और नर्सों का योगदान
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध फिजिशियन डॉ. शिल्पा देसाई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नर्सें चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ होती हैं। उन्होंने कहा कि नर्सें दिन-रात मरीजों की सेवा करती हैं और उन्हें मातृत्व भाव से संभालती हैं।
डॉ. देसाई ने कहा कि कोरोना काल में नर्सों ने जो अद्वितीय सेवा दी, वह अविस्मरणीय है। उस समय जब मरीज अकेले थे, तब नर्सों ने उन्हें न केवल दवाइयाँ दीं बल्कि मानसिक रूप से मजबूत भी किया। उन्होंने सभी नर्सों को हृदय से नमन किया।
नर्सिंग पेशा: सैनिकों जैसी जिम्मेदारी
एम.वाय. हॉस्पिटल की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर एलविना सिंह ने कहा कि नर्सिंग सेवा एक सैनिक की तरह है। जिस प्रकार सैनिक देश की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार नर्सें समाज के स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं।
उन्होंने कहा कि नर्सें हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखकर सेवा करती हैं, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों। नर्सिंग केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक जीवन समर्पण है।

अनुभव साझा एवं भावनात्मक क्षण
कार्यक्रम के दौरान नर्स प्रियंका फावड़े ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मरीजों की सेवा करते समय कई बार भावनात्मक और कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन मरीजों की एक मुस्कान सभी थकान को दूर कर देती है।
उन्होंने कहा कि नर्सिंग सेवा ने उन्हें जीवन का वास्तविक अर्थ सिखाया है—सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
कार्यक्रम संचालन एवं समापन
कार्यक्रम का सफल संचालन मेडिकल विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक संदेशों के साथ जोड़ते हुए नर्सों की सेवा भावना की सराहना की।
अंत में ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों, नर्सों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सभी सेवामूर्तियों के प्रति समाज की गहरी कृतज्ञता का प्रतीक है।
शांति एवं सकारात्मक संदेश के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ, जिसमें विश्व शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की गई। पूरा वातावरण सेवा, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
यह आयोजन नर्सिंग समुदाय के प्रति समाज के सम्मान और आभार का एक प्रेरणादायक संदेश बनकर सामने आया, जिसने यह स्पष्ट किया कि नर्सें वास्तव में मानवता की सच्ची सेवामूर्ति हैं।

