—Advertisement—

Indore के एमवाय अस्पताल में सफाई और सुरक्षा में लापरवाही पर कड़ा रुख: सुपरिटेंडेंट व भवन अधिकारी को नोटिस, BVG पर जुर्माना

Author Picture
Published On: 18 February 2026
INDORE
— “इंदौर एमवाय अस्पताल में वायरल वीडियो के बाद सख्ती: सुपरिटेंडेंट व भवन अधिकारी को नोटिस, BVG पर जुर्माना”

—Advertisement—

Indore के एमवाय अस्पताल में सफाई और सुरक्षा में लापरवाही पर कड़ा रुख: सुपरिटेंडेंट व भवन अधिकारी को नोटिस, BVG पर जुर्माना

देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान रखने वाले Indore की स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने शहर के सरकारी एमवाय अस्पताल की व्यवस्थाओं और साफ-सफाई पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वीडियो में देखा गया कि दो महिलाएं एक मरीज को पहिए वाले स्ट्रेचर पर लेकर भरे ट्रैफिक के बीच सड़क पार कर रही थीं। इस वीडियो ने न केवल अस्पताल की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई और भवन में रखरखाव की कमी को भी उजागर किया।

वायरल वीडियो का विवरण

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दो महिलाएं मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल के बाहर से सड़क पार करती दिख रही हैं। वीडियो के अनुसार महिलाएं पहले शासकीय डेंटल कॉलेज के सामने से गुजरती हैं और एमवाय अस्पताल के मुख्य गेट तक पहुंचती हैं, लेकिन मुख्य गेट बंद होने के कारण उन्हें स्ट्रेचर को अगले गेट तक ले जाना पड़ता है। यह घटना नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच चिंता का विषय बन गई।

वीडियो के सामने आने के बाद सवाल उठे कि यदि स्ट्रेचर सरकारी अस्पताल का है तो वह सड़क पर कैसे पहुंचा, और ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं कि मरीज के परिजनों को खुद स्ट्रेचर पर मरीज ले जाना पड़ा। इस मामले ने केवल एक वायरल वीडियो से कहीं बढ़कर अस्पताल की आपातकालीन सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

डीन का कड़ा रुख और नोटिस

Indore एमवाय अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। उन्होंने अस्पताल सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव और भवन अधिकारी जितेंद्र रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में साफ-सफाई, भवन मेंटेनेंस और व्यवस्थाओं में लापरवाही के लिए जवाब मांगा गया है।

इसके अलावा सुपरविजन और मेंटेनेंस का काम करने वाले भारत विकास ग्रुप (BVG) पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। डीन ने कहा कि अस्पताल में दीवारों और टाइल्स में फफूंद, गंदगी और टूट-फूट देखी गई, जो गंभीर लापरवाही का संकेत है। उन्होंने सुपरिटेंडेंट और भवन अधिकारी पर नाराजगी जताई और कहा कि यह मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका था, लेकिन सुधार नहीं किया गया।

निरीक्षण और गंदगी की जांच

डीन ने अस्पताल का दौरा कर चौथी और पांचवीं मंजिल सहित अन्य हिस्सों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई दीवारों और टूटी टाइलों में फफूंद और गंदगी देखी गई। डीन ने कहा कि अस्पताल की साफ-सफाई और भवन मेंटेनेंस में गंभीर कमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा सामने आया है। इससे पहले भी एक माह पूर्व डीन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी।

कलेक्टर, कमिश्नर और मुख्यमंत्री के दौरे के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। अब दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की सुविधा

प्रबंधन ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के लिए 108 एंबुलेंस की केंद्रीकृत सुविधा उपलब्ध है और किसी भी मरीज को स्ट्रेचर पर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है। सुरक्षा गार्ड, स्ट्रेचर बॉय और अन्य कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।

साथ ही अस्पताल ने दोहराया कि मरीजों को परिसर से बाहर ले जाने से रोकने के सख्त निर्देश पहले से लागू हैं। प्रशासन का कहना है कि वायरल वीडियो जैसी स्थिति भविष्य में दोबारा न उत्पन्न हो, इसके लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जाएगा।

व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

वीडियो के वायरल होने के बाद नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अस्पताल की आपातकालीन सुविधाएं, स्टाफ की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था क्यों पर्याप्त नहीं थीं। यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी अस्पतालों की मरीज-केन्द्रित सेवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक अस्पताल में सुरक्षा और साफ-सफाई का स्तर सीधे मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। यदि स्ट्रेचर और मरीजों को सड़क पर ले जाना पड़ रहा है, तो यह अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

पूर्व इतिहास और सुधार की आवश्यकता

एमवाय अस्पताल पहले भी समय-समय पर सुधार और निरीक्षण के लिए चर्चा में रहा है। डीन ने कहा कि प्रशासन ने पहले भी अस्पताल में सफाई और भवन मेंटेनेंस सुधार के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके सुधार कार्य अधूरा रहे।

अब इस मामले में नोटिस जारी करने के साथ-साथ सुपरिटेंडेंट, भवन अधिकारी और बीवीजी की जवाबदेही तय की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी और अस्पताल की सुरक्षा और साफ-सफाई की निगरानी और बढ़ाई जाएगी।

सारांश और भविष्य की दिशा

Indore के एमवाय अस्पताल में वायरल वीडियो ने अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। डीन द्वारा नोटिस जारी करना और BVG पर जुर्माना लगाना प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया का संकेत है।

यह घटना मरीजों की सुविधा और अस्पताल की विश्वसनीयता को बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर करती है। भविष्य में अस्पताल प्रशासन को न केवल साफ-सफाई और भवन मेंटेनेंस पर ध्यान देना होगा, बल्कि सुरक्षा और मरीज सेवा में भी सुधार लाना होगा।

इस मामले से यह सीख मिलती है कि स्वच्छता, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही किसी भी अस्पताल की विश्वसनीयता और शहर की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp