Indore हनी ट्रैप केस: सागर से रेशू चौधरी गिरफ्तार, नेटवर्क की कड़ी मानी जा रही अहम कड़ी; श्वेता जैन बनना चाहती हैं सरकारी गवाह
Indore में सामने आए बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस ने सागर से एक और महिला आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी के रूप में हुई है। पुलिस का मानना है कि वह इस पूरे हनी ट्रैप नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गिरफ्तारी के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच और तेज कर दी है तथा डिजिटल सबूतों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
यह पूरा मामला शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर से जुड़ी कथित ब्लैकमेलिंग और हनी ट्रैपिंग से संबंधित है। आरोप है कि एक संगठित नेटवर्क बनाकर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाया जाता था और निजी वीडियो व ऑडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर भारी रकम की मांग की जाती थी।
सागर से गिरफ्तारी, नेटवर्क की कड़ी पर शक
Indore पुलिस सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सागर से रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को हिरासत में लिया गया। उसे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। इससे पहले भी इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें मास्टरमाइंड बताई जा रही श्वेता विजय जैन, अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप दीक्षित, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा शामिल हैं।
पुलिस को संदेह है कि यह पूरा गिरोह योजनाबद्ध तरीके से काम करता था और अलग-अलग राज्यों व जिलों में प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाता था।
श्वेता जैन सरकारी गवाह बनने की इच्छुक
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब सामने आया जब आरोपी श्वेता जैन ने पुलिस के सामने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्वेता जांच में सहयोग करने को तैयार है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अदालत और जांच एजेंसियों के स्तर पर लिया जाएगा।
क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि रेशू चौधरी, अलका दीक्षित और श्वेता जैन मिलकर कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क को संचालित कर रही थीं। इनका मकसद प्रभावशाली व्यक्तियों को फंसाकर उनसे पैसे वसूलना था।
डिजिटल सबूतों की जांच तेज
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा की जांच कर रही है। कुछ ऑडियो और वीडियो फाइलें रिकवर होने की भी जानकारी सामने आई है, जिन्हें मामले में अहम सबूत माना जा रहा है। जांच टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि किन-किन लोगों को इस नेटवर्क के जरिए निशाना बनाया गया।
राजनीतिक और सामाजिक कनेक्शन की जांच
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कुछ राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों से जुड़े कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह गिरोह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
हेड कॉन्स्टेबल से भी पूछताछ
इस मामले में हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा से भी लंबी पूछताछ की गई है। पुलिस को संदेह है कि उनका संपर्क इस नेटवर्क की एक महिला आरोपी अलका दीक्षित से था। इसी आधार पर उनसे लगातार सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं गंभीर आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने पहले भी निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को निशाना बनाया था। कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क ने फर्जी वीडियो और ऑडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग की योजना बनाई थी।
शिकायत मिलने के लगभग 19 दिन बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद से जांच तेज कर दी गई है।
पहले की गिरफ्तारियां
इससे पहले पुलिस ने श्वेता जैन को भोपाल स्थित मीनाल रेजिडेंसी से हिरासत में लिया था। इसके अलावा अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, लाखन चौधरी और अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि यह गिरोह निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की मांग कर रहा था।
जांच जारी
Indore क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले को एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के रूप में देख रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल सबूतों की जांच जारी है।
