Indore गैस पाइपलाइन हादसा: हाईकोर्ट ने FIR न होने पर जताई नाराजगी, 13 जुलाई तक सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
Indore के विजय नगर क्षेत्र में हुए अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को लगभग 20 मिनट तक चली सुनवाई में अदालत ने पूछा कि जब नगर निगम की जांच रिपोर्ट में एक स्थानीय पार्षद का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित है, तो उनके खिलाफ अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई।
कोर्ट ने इस देरी को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि इतने गंभीर मामले में शुरुआती रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
नगर निगम की रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निगम की जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया और यह जानना चाहा कि जब रिपोर्ट तैयार होकर संबंधित विभागों तक पहुंच चुकी है, तो उस पर आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या जांच रिपोर्ट को सही तरीके से आगे नहीं भेजा गया या फिर जानबूझकर कार्रवाई में देरी की जा रही है। अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की भारी कमी दिखाई दे रही है, जो किसी भी बड़े हादसे के बाद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि केवल “जांच जारी है” कहना पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब एक आधिकारिक रिपोर्ट पहले से उपलब्ध हो।
13 जुलाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट के निर्देश
Indore हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले में 13 जुलाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि नगर निगम और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में देरी या भ्रम की स्थिति न बने।
23 जून का हादसा: कैसे हुआ गैस पाइपलाइन विस्फोट
यह पूरा मामला 23 जून को इंदौर के विजय नगर स्थित सुमन नगर और जैन मंदिर क्षेत्र के पास हुए गैस पाइपलाइन विस्फोट से जुड़ा है। उस समय अवंतिका गैस पाइपलाइन में अचानक तेज विस्फोट हुआ था, जिससे इलाके में आग फैल गई और अफरा-तफरी मच गई थी।
इस हादसे में चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था।पीड़ितों को मुआवजा न मिलने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि हादसे के कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी घायल को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि घायलों में कई लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं और लंबे समय तक काम करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में उनके परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। वकीलों ने कोर्ट से आग्रह किया कि पीड़ितों को तुरंत राहत राशि दी जाए और इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।
खुदाई और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
पीड़ित पक्ष के वकीलों ने यह भी महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया कि शहर में कई जगहों पर बिना पर्याप्त तकनीकी जांच के खुदाई कार्य शुरू कर दिया जाता है। इसके कारण भूमिगत गैस पाइपलाइन, बिजली के केबल और अन्य यूटिलिटी सेवाएं प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारों और श्रमिकों को अक्सर यह जानकारी नहीं होती कि जमीन के नीचे कौन-कौन सी महत्वपूर्ण लाइनें मौजूद हैं, जिससे ऐसे हादसे होने का खतरा लगातार बना रहता है।
कोर्ट ने इस पहलू को भी गंभीरता से लेते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल जरूरी हैं।
जांच एजेंसियों को बेहतर समन्वय के निर्देश
अदालत ने साफ कहा कि नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना होगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि एक विभाग रिपोर्ट तैयार करता है और दूसरा उस पर कार्रवाई नहीं करता, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार से विस्तृत जवाब तलब
Indore हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 13 जुलाई तक इस पूरे मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि अब तक किन-किन स्तरों पर जांच हुई है, किन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है और आगे की कार्रवाई क्या होगी।
अगली सुनवाई 13 जुलाई को
अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, जिसमें राज्य सरकार को सभी सवालों का जवाब देना होगा। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि कार्रवाई में और देरी पाई गई तो सख्त आदेश भी पारित किए जा सकते हैं।
