Indore जाली नोटकांड: मास्टरमाइंड ने 500 रुपये के नकली नोट छापने की बात कबूली, 1 हजार के बदले देता था 4 हजार
Indore। मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए बड़े जाली नोट रैकेट मामले में मास्टरमाइंड संजय वैष्णव ने पुलिस पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस रिमांड में उसने स्वीकार किया है कि वह 500 रुपये के जाली नोट भी छापता था और बाजार में उन्हें खपाने के लिए संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था। आरोपी ने यह भी बताया कि वह एक हजार रुपये के बदले चार हजार रुपये के जाली नोट उपलब्ध कराता था।
इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी की है और जांच को और तेज कर दिया गया है।
200 रुपये के नोटों के साथ शुरू हुई थी गिरफ्तारी
Indore पुलिस के अनुसार, संजय वैष्णव, दीपक पटेल और रवि प्रताप चौधरी को पहले 200 रुपये के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से कुल 424 नकली नोट बरामद किए गए थे। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है।
इसके बाद जब संजय वैष्णव से गहराई से पूछताछ की गई तो उसने पूरे रैकेट की परतें खोलनी शुरू कर दीं।
2017 से चल रहा था नकली नोटों का धंधा
जांच में सामने आया कि संजय वैष्णव ने वर्ष 2017 में संदीप रघुवंशी के साथ मिलकर धार जिले में जाली नोट छापने का काम शुरू किया था। उस समय उन्होंने प्रिंटर मशीन का इस्तेमाल कर लाखों रुपये के नकली नोट तैयार किए और उन्हें बाजार में खपाया।
कुछ समय बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया था और जेल भेज दिया गया था। हालांकि जमानत पर बाहर आने के बाद संजय ने फिर से इस अवैध धंधे को शुरू कर दिया।
मूसाखेड़ी बना नया ठिकाना, 500 और 200 के नोट छापे
जमानत पर रिहा होने के बाद संजय वैष्णव ने इंदौर के मूसाखेड़ी क्षेत्र को अपना नया ठिकाना बनाया। यहां उसने रवि प्रताप चौधरी के साथ मिलकर जाली नोट छापने का काम फिर से शुरू किया।
इस दौरान उसने 500 रुपये और 200 रुपये के नकली नोटों का निर्माण किया और उन्हें अलग-अलग माध्यमों से बाजार में खपाने की योजना बनाई। शुरुआती दौर में उसने करीब आठ लाख रुपये के नकली नोट तैयार किए और उन्हें अलग-अलग लोगों को बेच दिया।
ग्रामीण इलाकों में फैलाई गई जालसाजी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों को निशाना बनाते थे, जहां नकली नोटों की पहचान करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है। इसी वजह से उन्होंने ऋतिक बामनिया जैसे लोगों को नकली नोट बेचने के लिए शामिल किया।
ऋतिक बामनिया, जो धार का निवासी है और एक छात्रावास संचालक है, ने भी पुलिस पूछताछ में यह स्वीकार किया कि वह ग्रामीण इलाकों में जाली नोट खपाने का काम करता था।
ऋतिक की गिरफ्तारी से खुला बड़ा नेटवर्क
पुलिस ने धार से ऋतिक बामनिया को गिरफ्तार किया है, जिसकी निशानदेही पर कई अहम जानकारी सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि वह लाखों रुपये के जाली नोट खरीदकर बाजार में चला रहा था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और अब तक कितनी बड़ी रकम के नकली नोट बाजार में फैलाए जा चुके हैं।
पहले भी जेल जा चुका है मास्टरमाइंड
संजय वैष्णव का आपराधिक इतिहास भी लंबा रहा है। वह पहले भी इस तरह के मामलों में जेल जा चुका है। वर्ष 2021 में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कार्रवाई के दौरान वह फरार हो गया था और तीन साल बाद फिर पुलिस की गिरफ्त में आया।
इस बार उसकी गतिविधियों में और अधिक संगठित तरीके से नकली नोट छापने और उन्हें बाजार में फैलाने की योजना सामने आई है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। इसलिए पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली नोट किन-किन जिलों और राज्यों में खपाए गए हैं।
आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस मामले ने एक बार फिर नकली नोटों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे गिरोह देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
