इंदौर: 200 करोड़ का बड़ा घोटाला—EOW की दिनभर कार्रवाई, हार्ड डिस्क-पेनड्राइव-बैलेंस शीट सहित कई अहम दस्तावेज जब्त
Indore EOW Raid News:
इंदौर में 200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित आर्थिक घोटाले (200 Crore Scam in Indore) ने एक बार फिर शहर की सुर्खियों को गर्म कर दिया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने मंगलवार को कनाड़िया रोड स्थित सेवाकुंज अस्पताल एवं आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी के दफ्तर पर दिनभर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान EOW अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क, पेनड्राइव, बैलेंस शीट और विभिन्न लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात जब्त किए।
कैसे शुरू हुआ मामला – FIR दर्ज होने के बाद तेज हुई कार्रवाई
यह पूरा मामला तब सामने आया जब संस्था के पूर्व चेयरमैन अनिल संघवी ने सोसायटी के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए भोपाल EOW में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अनिल संघवी ने बताया कि संस्था के नाम पर लिए गए करोड़ों के बैंक लोन का उपयोग नियमों के अनुसार नहीं किया गया, बल्कि इनका कथित तौर पर दूसरी जगह दुरुपयोग हुआ है।
शिकायत के आधार पर EOW ने जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं—
- जयनारायण चौकसे
- अनुपम चौकसे
- धर्मेंद्र गुप्ता
- श्वेता चौकसे
- पूनम
- पूजाश्री
- आशीष जायसवाल
इन सभी पर संस्था में आर्थिक अनियमितताएँ और धन दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दिनभर चली गहन पड़ताल—EOW टीम ने खंगाले दस्तावेज
EOW के डीएसपी पंकज गौतम के नेतृत्व में टीम ने मंगलवार की सुबह कार्रवाई शुरू की और शाम तक विभिन्न दस्तावेजों की विस्तृत तलाशी चलती रही। EOW अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक जांच में कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें वेरिफाई करने के लिए बड़ी मात्रा में डिजिटल और भौतिक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
जिन वस्तुओं को कब्जे में लिया गया है, उनमें मुख्य रूप से—
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हार्ड डिस्क
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पेनड्राइव
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बैलेंस शीट
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लेन-देन का रजिस्टर
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बैंक दस्तावेज
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आंतरिक फाइलें
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कॉन्ट्रैक्ट और एग्रीमेंट से जुड़े कागजात
इन सभी की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि पूरे घोटाले की वित्तीय श्रृंखला को समझा जा सके।
मीडिया कवरेज पर हंगामा—गार्ड और बाउंसरों ने नहीं दिया प्रवेश
कार्रवाई के दौरान एक और विवाद सामने आया, जब घटनास्थल पर कवरेज के लिए पहुंचे मीडिया कर्मियों को अस्पताल में मौजूद गार्ड और बाउंसरों ने अंदर जाने से रोक दिया। इस बात को लेकर कुछ देर तक बहसबाजी भी हुई। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें तथ्य छुपाने की नीयत से कवरेज करने नहीं दिया जा रहा, हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
संस्था में करोड़ों की गड़बड़ी के आरोप पहली बार नहीं
अनिल संघवी ने पहले भी कई बार संस्था में वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। उनका आरोप है कि संस्था के नाम पर लिए गए लाखों-करोड़ों के बैंक लोन का उपयोग शिक्षा या सामाजिक कार्यों में होने की बजाय निजी हितों में किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से संस्था के संचालन में पारदर्शिता नहीं रही और कई बार मांगे जाने के बावजूद वित्तीय रिकॉर्ड सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराए गए। उनके अनुसार, यह पूरा घोटाला व्यवस्थित तरीके से किया गया आर्थिक अपराध है जिसकी विस्तृत जांच जरूरी है।
EOW अब करेगा व्यापक विश्लेषण
EOW अधिकारियों के मुताबिक, जो दस्तावेज जब्त किए गए हैं, उनकी कई स्तरों पर जांच की जाएगी—
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फोरेंसिक ऑडिट – यह पता लगाने के लिए कि डिजिटल फाइलों से कुछ हटाया या बदला गया है या नहीं।
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बैंक लेन-देन की ट्रेल – करोड़ों रुपये कहां से आए और कहां भेजे गए।
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लोन उपयोग रिपोर्ट – क्या संस्था से लिए गए लोन का वास्तविक उपयोग हुआ?
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अनियमित भुगतान और फर्जी बिल – क्या फर्जी बिल, फर्जी सप्लायर या काल्पनिक परियोजनाओं के नाम पर पैसे निकाले गए?
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है।
200 करोड़ के घोटाले से शहर में हड़कंप
इस बड़े आर्थिक घोटाले की खबर सामने आते ही इंदौर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। शहर में यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि संबंधित संस्था का नाम लंबे समय से सामाजिक व शैक्षिक कार्यों से जुड़ा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी आर्थिक अनियमितता हुई है, तो यह विश्वासघात है और जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
EOW की अगली कार्रवाई क्या होगी?
सूत्रों के अनुसार—
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EOW जल्द ही संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है।
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संस्था के कुछ पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया जा सकता है।
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जब्त दस्तावेजों की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद जांच और तेज होगी।
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यदि लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले, तो अन्य एजेंसियों की भी जांच शामिल हो सकती है।
निष्कर्ष
इंदौर में सामने आया यह 200 करोड़ रुपये का कथित घोटाला शहर की सबसे बड़ी आर्थिक अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है। EOW की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। जब्त किए गए दस्तावेजों से जांच को नई दिशा मिलने की पूरी संभावना है।
