Indore डॉ. जेम्स पाल ने निपानिया में बारिश के बाद हुए जलभराव, कीचड़ और नगर निगम की लापरवाही पर सवाल उठाए। 100 मीटर के दायरे में दो कारें फंसीं, घंटों तक नहीं पहुंची कोई मदद। पढ़ें पूरी खबर।
डॉ. जेम्स पाल निपानिया Indore जलभराव: जोरदार बारिश में दो कारें फंसीं, नगर निगम की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल
Indore। शहर में हुई जोरदार बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी है। डॉ. जेम्स पाल ने निपानिया क्षेत्र में जलभराव और नागरिकों को हो रही परेशानियों को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हर वर्ष मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश के साथ ही व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है।
निपानिया में बारिश के बाद बिगड़े हालात
डॉ. जेम्स पाल निपानिया जलभराव मामले में सामने आए घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। निपानिया मुख्य मार्ग पर तेज बारिश के बाद भारी जलभराव और कीचड़ जमा हो गया, जिससे आम नागरिकों का आवागमन प्रभावित हो गया।
मात्र 100 मीटर की दूरी में दो कारें फंसीं
जोरदार बारिश के दौरान निपानिया मुख्य मार्ग पर मात्र 100 मीटर की दूरी में दो कारें जलभराव और कीचड़ में फंस गईं। दोनों वाहनों में परिवार मौजूद थे, जिन्हें बारिश के बीच लंबे समय तक मदद का इंतजार करना पड़ा।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काफी देर तक कोई राहत या बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
घंटों तक नहीं पहुंची नगर निगम, पुलिस या प्रशासन
डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह रही कि घटना की जानकारी होने के बावजूद मौके पर न तो नगर निगम की टीम पहुंची, न पुलिस और न ही प्रशासन का कोई अधिकारी दिखाई दिया।उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति में भी जिम्मेदार विभाग मौके पर मौजूद नहीं रहेंगे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा।
केवल निपानिया नहीं, पूरे शहर का यही हाल
डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि यह समस्या केवल निपानिया क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शहर के लगभग हर इलाके में कहीं जलभराव, कहीं धंसी हुई सड़कें, कहीं खुले गड्ढे और कहीं अधूरे निर्माण कार्य के कारण नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बारिश के दौरान कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई दीं, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को जोखिम उठाना पड़ा।
डॉ. जेम्स पाल ने निगम की जवाबदेही पर उठाए सवाल
डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि हर वर्ष मानसून आने से पहले करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं। नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और सड़क सुधार के नाम पर योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में इन दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है।उन्होंने सवाल उठाया कि—
- आखिर हर वर्ष वही स्थिति क्यों बनती है?
- बारिश के समय फील्ड पर अधिकारी क्यों नहीं दिखाई देते?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
- नागरिकों को राहत देने के लिए आपात व्यवस्था क्यों सक्रिय नहीं रहती?
नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए
डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि बारिश के दौरान यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। नगर निगम, प्रशासन और संबंधित विभागों को मानसून के दौरान पूरी सतर्कता के साथ मैदान में रहना चाहिए।उन्होंने मांग की कि—
- जलभराव वाले स्थानों की तत्काल पहचान की जाए।
- फील्ड अधिकारियों की नियमित निगरानी हो।
- आपातकालीन राहत दल सक्रिय किए जाएं।
- जल निकासी व्यवस्था में स्थायी सुधार किया जाए।
- नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए।
जनता पूछ रही है जवाब
डॉ. जेम्स पाल ने कहा कि जनता का सीधा सवाल है कि क्या जिम्मेदार विभाग केवल कार्यालयों तक सीमित रहेंगे या संकट की घड़ी में सड़कों पर उतरकर नागरिकों के साथ भी खड़े होंगे।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में और अधिक गंभीर स्थितियां सामने आ सकती हैं।
निष्कर्ष
निपानिया में हुई यह घटना केवल दो कारों के फंसने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की मानसून तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है। डॉ. जेम्स पाल ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की है कि वे कागजी दावों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करें ताकि नागरिकों को हर वर्ष ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
